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पहली बार देखिए- जलमहल के अंदर का VIDEO, PHOTOS:288 साल पुराना महल बन चुका था खंडहर, 135 करोड़ खर्चकर फिर रॉयल लुक में संवारा

जयपुर5 महीने पहले
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जयपुर में मानसागर झील के बीच 288 साल पहले बने जलमहल को 135 करोड़ खर्च कर फिर रॉयल लुक दिया गया है। जलमहल अब अपने पुराने रॉयल हेरिटेज लुक के नए अवतार में नजर आने लगा है। खंडहर होते जलमहल को जयपुर के माने हुए क्राफ्टमैन और आर्किटेक्ट ने अपने बेहतरीन आर्टवर्क से तैयार किया है। जलमहल में बर्ड की कई वैरायटी और अरावली पर्वतमाला की खूबसूरत वादियों को देखना किसी एडवेंचर से कम नहीं है। दैनिक भास्कर में देखिए जलमहल के पहले और अब की तस्वीरें।

जलमहल पहले जंगली घास और झाड़ से भरा था, अब फिर से महका चमेली बाग।
जलमहल पहले जंगली घास और झाड़ से भरा था, अब फिर से महका चमेली बाग।
मार्बल पर पेंट की मोटी परत चढ़ी थी, जिसे घिसने पर मार्बल की जाली और पिलर की खूबसूरती का पता चला।
मार्बल पर पेंट की मोटी परत चढ़ी थी, जिसे घिसने पर मार्बल की जाली और पिलर की खूबसूरती का पता चला।
जलमहल की छत पर कभी शानदार गार्डन हुआ करता था। लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया तो शाही बाग गायब हो गया। अब इंडियन गार्डन के एक्सपर्ट मिशेल एके काइट्स ने यहां शाही बाग फिर से तैयार करवाया है।
जलमहल की छत पर कभी शानदार गार्डन हुआ करता था। लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया तो शाही बाग गायब हो गया। अब इंडियन गार्डन के एक्सपर्ट मिशेल एके काइट्स ने यहां शाही बाग फिर से तैयार करवाया है।

सवाई जय सिंह ने बनवाया था
इतिहासकार बताते हैं जलमहल का निर्माण 1688 से 1743 के बीच कराया गया था। सवाई जय सिंह ने अश्वमेध यज्ञ के बाद अपनी रानियों और पंडित के साथ स्नान के लिए इसे बनवाया था। उस समय इसका उपयोग शिकार, नृत्य और कई तरह के आयोजनों के लिए भी किया जाता था। फिर देखरेख के अभाव में जलमहल धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होने लगा था।

वीरान पड़ी आनंद महल तिबारी, अब खूबसूरत रंगों से सजी है। यहां मीना और कुंदन में की गई कारीगरी को दीवार पर उतारा गया है।
वीरान पड़ी आनंद महल तिबारी, अब खूबसूरत रंगों से सजी है। यहां मीना और कुंदन में की गई कारीगरी को दीवार पर उतारा गया है।
तिबारी के हर झरोखे जो पेंट, धूल और सीलन से खराब हो रहे थे, उनकी घिसाई कर उन पर खूबसूरत कलाकारी की गई है।
तिबारी के हर झरोखे जो पेंट, धूल और सीलन से खराब हो रहे थे, उनकी घिसाई कर उन पर खूबसूरत कलाकारी की गई है।

2003 में काम शुरू हुआ था
इसे संवारने के लिए साल 2003 में पीपीपी मोड पर यह प्रोजेक्ट नवरत्न कोठारी को मिला। उन्होंने 2005 ट्रेडिशनल, क्राफ्टमैन, आर्किटेक्ट और हिस्टोरियन की मदद से आर्ट एंड कल्चर के एक्सपर्ट के साथ मिलकर यहां डिजाइन और लाइटिंग पर नए सिरे से काम किया। संजय कोठारी ने इस काम को आगे बढ़ाने की कमान संभाली।

रिनोवेशन के नाम पर पहले नॉर्मल पेंट किया जाता था, जिससे महल का ओरिजिनल लुक खत्म हो गया था। अब दीवारों को हेरिटेज लुक दिया गया हैं।
रिनोवेशन के नाम पर पहले नॉर्मल पेंट किया जाता था, जिससे महल का ओरिजिनल लुक खत्म हो गया था। अब दीवारों को हेरिटेज लुक दिया गया हैं।
जलमहल के अंदर के ये बरामदे पहले जर्जर हालत में थे। छत से पट्टियां टूट चुकी थी। इन दीवारों पर परंपरागत आइरिश के साथ ही काजल से बॉर्डर देकर खूबसूरती बढ़ाई गई है।
जलमहल के अंदर के ये बरामदे पहले जर्जर हालत में थे। छत से पट्टियां टूट चुकी थी। इन दीवारों पर परंपरागत आइरिश के साथ ही काजल से बॉर्डर देकर खूबसूरती बढ़ाई गई है।
दीवारों को बेहतरीन कैनवास पेंटिंग से सजाया गया है।
दीवारों को बेहतरीन कैनवास पेंटिंग से सजाया गया है।

महल के हेरिटेज लुक को बरकरार रखा
बीते 16 साल से इस प्रोजेक्ट को ड्राइव कर रहे आर्किटेक्ट राजीव लुंकड़ ने बताया उन्हें 2005 में इस प्रोजेक्ट को देखने का अवसर मिला था। शुरू में निराशा हुई। बाद में देशभर के नामचीन एक्सपर्ट और कलाकारों की मदद से जयपुर के इस ड्रीम को साकार किया। राजीव बताते हैं महल के हर एक हिस्से को सजाने के साथ महल के हेरिटेज लुक को बरकरार रखने का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

टूट चुकी पुरानी जालियों को हटाकर नई मार्बल की जालियां लगाई गई हैं।
टूट चुकी पुरानी जालियों को हटाकर नई मार्बल की जालियां लगाई गई हैं।
लोगों ने महल की दीवारों पर कोयले से नाम लिखकर बेहद गंदा कर दिया था। आइरिश पॉलिश और आर्ट से इन दीवारों में फिर से जान डाली गई है।
लोगों ने महल की दीवारों पर कोयले से नाम लिखकर बेहद गंदा कर दिया था। आइरिश पॉलिश और आर्ट से इन दीवारों में फिर से जान डाली गई है।

उन्होंने बताया प्राइवेट कोलेबरेशन से ट्रेडिशनल क्राफ्टमैन, आर्किटेक्ट और हिस्टोरियन ने आर्ट एंड कल्चर के एक्सपर्ट के साथ मिलकर यहां डिजाइन और लाइटिंग पर नए सिरे से काम किया। शाही चमेली बाग, आनंद महल तिबारी और सुंदर कला दीर्घाओं को उनके ओरिजिनल लुक में सजाया गया हैं।

जलमहल के झरोखों पर पानी के कारण काई और पेड़-पौधे उग गए थे। इससे दीवारें जर्जर हो चुकी थी। इन्हें दुबारा से प्लास्टर करके हेरिटेज लुक दिया गया है।
जलमहल के झरोखों पर पानी के कारण काई और पेड़-पौधे उग गए थे। इससे दीवारें जर्जर हो चुकी थी। इन्हें दुबारा से प्लास्टर करके हेरिटेज लुक दिया गया है।

अब बोटिंग करना आसान
महल के आस-पास बड़े पैमाने पर सफाई की गई। प्रदूषित हिस्से को हटाया तो पानी ज्यादा गहरा हुआ। इससे अब यहां बोटिंग करना बहुत आसान हो सकता है। महल के आस-पास वेटलैंड विकसित हो गए हैं। जिससे बगुले, सैंडपाइपर और स्टिल्ट पक्षी आकर्षित हो रहे हैं। जलीय जीवन सुधरने से कई प्रजातियों के लिए इको सिस्टम पैदा हुआ। झील के तटों को भी विकसित किया गया।

जलमहल के पास पक्षियों के बैठने के लिए बनाई मुंडेर पर काई जमी थी और पानी भी बेहद खराब स्थिति में था। टूटी मुंडेर को रिनोवेट किया गया। फिर पानी को साफ कर मानसागर में डाला गया।
जलमहल के पास पक्षियों के बैठने के लिए बनाई मुंडेर पर काई जमी थी और पानी भी बेहद खराब स्थिति में था। टूटी मुंडेर को रिनोवेट किया गया। फिर पानी को साफ कर मानसागर में डाला गया।
जलमहल एक समय पर तो सीवरेज डंप की जगह बन चुकी थी। जलमहल को बचाने के लिए मानसागर की पूरी तरह सफाई की गई। सीवरेज के लिए अलग पाइप लगाए गए। अब सीवरेज का कचरा मानसागर में नहीं आता है।
जलमहल एक समय पर तो सीवरेज डंप की जगह बन चुकी थी। जलमहल को बचाने के लिए मानसागर की पूरी तरह सफाई की गई। सीवरेज के लिए अलग पाइप लगाए गए। अब सीवरेज का कचरा मानसागर में नहीं आता है।

जलमहल की हर एक चीज पर बहुत ही बारीकी से काम किया गया है। सालों से डंप हो रहे सीवरेज और कचरे को 300 ट्रैक्टर व करीब 30 से 40 जेसीबी की मदद से साफ किया गया। जलमहल के पानी को 4 पौंड में फिल्टर करके दोबारा भरा गया। स्टोर पानी को ताजा रखने के लिए ऑक्सीजन लेवल मेंटेन करने की डिवाइस लगाई गई हैं।

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