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ग्रेटर निगम में भ्रष्टाचार का मामला:एफए नहीं हाेने से फाइनेंस व टेंडर के कार्य अटके

जयपुर5 महीने पहले
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ग्रेटर निगम में घूसकांड खुलासे के बाद सभी काे जेल भेज दिया गया है। हालांकि जेल में शिफ्ट करने से पहले इनकी काेराेना जांच करवाई गई थी, जिसमें फाइनेंस एडवाइजर अचलेश्वर मीणा व दलाल अनिल अग्रवाल पाॅजिटिव आने के कारण आरयूएचएस में शिफ्ट किया गया था। वहीं धनकुमार से पूछताछ पूरी हाेने के बाद जेल भेज दिया गया था। वहीं भ्रष्टाचार मामला सामने आने के बाद से ग्रेटर निगम में एफए की सीट पर काेई अधिकारी नहीं लगाया गया। इस वजह से ग्रेटर निगम में फाइनेंस व कई टेंडर कार्य भी

अटक गए है। ग्रेटर निगम में बीट पर करीब एक हजार से अधिक सफाई कर्मचारी लगाएं जाएंगे, जिसके लिए 9 फर्माें ने टेंडर लगाएं है। वहीं पार्षदाेें के लिए लैपटाॅप की खरीद की जाएगी। बताया जा रहा है कि नया एफए आने के बाद ही यह कार्य फाइनल हाेंगे।

मेयर बाेली हेरिटेज एफए काे ही ग्रेटर का चार्ज दे दिया, हेरिटेज एफए ने कहा एेसा मेरा पास काेई आदेश नहीं आया: ग्रेटर नगर निगम में एफए काे लेकर जब मेयर शील धाभाई से पूछा गया ताे बाेली कि हेरिटैज एफए काे ही ग्रेटर का चार्ज दे दिया गया है। लेकिन हेरिटेज एफए कृष्ण कन्हैया मीणा ने बताया कि मेरे पास एेसा काेई लिखित में आदेश नहीं आया है।

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