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स्कूल चले हम:बच्चों को स्कूल में रहना हाेगा सिर्फ 1 घंटे, फिलहाल यूनिफॉर्म पहनना भी जरूरी नहीं

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: बकुल महेश माथुर
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  • स्कूल ताे खुल रहे हैं, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन काे लेकर अभी असमंजस है
  • ऑफलाइन मोड में एक शिक्षक पर मात्र चार छात्र होंगे। शुरू में क्लब एक्टिविटी के जरिए टॉपिक्स पढ़ाने पर जोर

काेराेना फिलहाल नियंत्रण में है। गाइडलाइन के अनुसार सोमवार से छठी से आठवीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खुल गए। हालांकि पहले दिन नाममात्र के बच्चे ही स्कूल पहुंचे। एजुकेशनिस्ट प्रतिमा शर्मा ने बताया कि बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी होने के कारण पैरेंट्स अभी रिस्क नहीं लेना चाहते। वहीं एजुकेशनिस्ट कपिल सिंह का मानना है कि एग्जाम के बाद अगले हफ्ते से बच्चे स्कूल आना शुरू कर सकते हैं।

27 सितंबर से पहली से पांचवीं तक के बच्चे भी स्कूल जा सकेंगे। ऐसे में पैरेंट्स के मन में यूनिफॉर्म, कक्षा, बैग व ट्रांसपोर्टेशन से संबंधित सवाल हैं। सिटी भास्कर स्कूल के इन महत्वपूर्ण हिस्सों के जवाब लेकर आया है जिससे आप तैयारी पूरी कर सकें। पहली से 8वीं के लिए शुरू के 2 से 3 हफ्ते यूनिफॉर्म अनिवार्य नहीं होगी।

एजुकेशनिस्ट मालिनी मलिक ने बताया कि बच्चों की दिनचर्या आरामदायक बन चुकी है। उन्हें यूनिफॉर्म व स्कूल अनुशासन की आदत नहीं रही है। ऐसे में एक्टिविटीज से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही अभिभावकों पर अभी नई यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव डालना सही नहीं होगा।

बदलाव : धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा स्कूलाें में बच्चाें का समय
ऑनलाइन क्लास के दौरान पांचवीं कक्षा के छात्रों को करीब 4 विषयों को पढ़ाया जा रहा है। लेकिन स्कूल में पहले दिन से यह नहीं किया जाएगा। एजुकेशनिस्ट कमल लोढा ने बताया कि बच्चों को स्कूल आने में जोर न आए इसलिए पहले 1 घंटे की कक्षा लगेगी। वे आएंगे समय बिताएंगे और 1 घंटा पढ़ कर घर चले जाएंगे। इससे उनमें घर से निकलने की आदत पैदा होगी। यह सुविधा पहली से पांचवीं कक्षा के लिए होगा। समय में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। वहीं ऑफलाइन मोड में 1 शिक्षक पर मात्र 4 छात्र होंगे।

आसानी : अभी बिना बैग आएंगे स्कूल, कराएंगे क्लब एक्टिविटी
घर पर भारी बैग की फिक्र नहीं थी। बच्चों की सहूलियत के लिए अभी बिना बैग के स्कूल जाएंगे। एजुकेशनिस्ट कमलजीत यादव ने बताया कि बच्चों को स्कूल आते ही बैग के लिए बोलना उनके लिए ज्यादती होगी। क्लब एक्टिविटी के जरिए टॉपिक्स काे सिखाया जाएगा। इससे उनमें स्कूल आने की इच्छा पैदा होगी। कंसेंट फॉर्म पैरेंट्स को गूगल फॉर्म के जरिए भेजा जा रहा है। फिलहाल जूनियर कक्षाओं के लिए ऑनलाइन मोड में एग्जाम होंगे ताकि सभी बच्चे एक साथ एग्जाम दे सकें।

ट्रांसपोर्टेशन : पेट्रोल और डीजल महंगा होने से बढ़ सकते हैं चार्ज
सोसायटी फॉर अनएडिड प्राइवेट स्कूल्स ऑफ राजस्थान के फाउंडर प्रेसिडेंट दामोदर गोयल ने बताया कि गाइडलाइन को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई है। लेकिन शिक्षक व अभिभावकों के मन में एक सवाल ये है कि बच्चे स्कूल आएंगे-जाएंगे कैसे, क्योंकि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्टेशन भी अब पिछले साल मार्च जितना सस्ता नहीं रहा। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए भी अभी शुरू नहीं हुआ है।

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