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प्रदेश में राजनीतिक-संगठनात्मक नियुक्तियां अभी तक अधूरी:अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, फिर भी नियुक्तियों पर सत्ता और संगठन में चुप्पी

जयपुर4 महीने पहले
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राजस्थान में अगला साल चुनावी होगा। साल 2023 के आखिर में मौजूदा सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी और इसके बाद विधानसभा चुनावों के जरिए फिर से सत्ता का संघर्ष शुरू होगा। लेकिन कांग्रेस की मौजूदा स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती। हालत यह है कि न तो यहां राजनीति नियुक्तियों का काम ही पूरा हो पाया और न ही संगठन में नियुक्तियां पूरी हो सकी हैं। हालात यह है कि डेढ़ साल पहले निवर्तमान जिलाध्यक्षों, विधायकों और मंत्रियों ने अपनी तरफ से ब्लॉक अध्यक्षों के नामों के पैनल भी पीसीसी को भेजे थे लेकिन आगे जाकर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वहीं जिलाध्यक्षों की सूची भी आधी-अधूरी ही आई। 1 दिसंबर को कांग्रेस ने 13 जिलाध्यक्षों की सूची जारी की। इसके बाद शेष जिलों की सूची भी जल्द जारी होने की बात कही गई। लेकिन 45 दिन बाद भी दूसरी सूची का अता-पता नहीं है।

राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी असमंजस
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह माना जा रहा था कि राजनीतिक नियुक्तियां भी जल्द कर ली जाएंगी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कुछ नामों को लेकर अभी सहमति नहीं बन पा रही है इसलिए मामला अटका पड़ा है।

आखिरी दो साल में होती है राजनीतिक नियुक्तियां
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर प्रदेश में पहले की सरकारों का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि ज्यादातर राजनीतिक नियुक्तियां आखिर के दो साल में ही की जाती हैं। हालांकि राजनीतिक नियुक्तियों के मामले में अति महत्वपूर्ण माने जाने वाले राज्य वित्त आयोग, मानवाधिकार आयोग सूचना आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड में नियुक्तियां कर चुके हैं।

ये आयोग-बोर्ड हैं खाली
अल्प संख्यक आयोग, ओबीसी आयोग, एससी आयोग, महिला आयोग, निशक्तजन आयोग, किसान आयोग, बाल संरक्षण आयोग, एसटी आयोग, गौ सेवा आयोग, सूचना आयोग, पशुधन विकास बोर्ड, उपाध्यक्ष पशुधन विकास बोर्ड, सैनिक कल्याण बोर्ड, मगरा विकास बोर्ड, लघु उद्योग विकास बोर्ड, राज्य खाद्य बीज निगम, भूदान आयोग, केश कला बोर्ड, समाज कल्याण बोर्ड, हज कमेटी, मदरसा बोर्ड, बाल सुधार आयोग, उपाध्यक्ष एसटी आयोग, उपाध्यक्ष एससी आयोग, उपाध्यक्ष पशु कल्याण बोर्ड, अध्यक्ष विशेष योग्यजन, अध्यक्ष वक्फ बोर्ड, वेयर हाऊसिंग कॉरपोरेशन, राजस्थान वरिष्ठ नागरिक बोर्ड सहित 41 बोर्ड शामिल हैं। इनके अलावा करीब 11 यूआईटी और अन्य बोर्ड भी शामिल हैं।

पिछले कार्यकाल में इनको दिया गया था मंत्री का दर्जा
नारायण सिंह, रणदीप धनखड़, लाड़कुमारी जैन, मुमताज मसीह, अनील पारीक, माहिर आजाद, मौलाना फजले हक, सत्यनारायण सिंह, परसराम मोरदिया, लियाकत अली खान, प्रो. वीएस व्यास, विजयलक्ष्मी विश्नोई, गजेंद्र शक्तावत, जयदीप डूडी, कैन्हैया लाल झंवर, ममता भूपेश, राजेंद्र सिंह विधूड़ी, रामस्वरूप कसाना और जाहिदा खान।

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