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  • 8 Kms From Mansagar. If The Broken Canal Is Repaired, Then The Groundwater Level Of 50 Villages Will Improve, The City Is Saved From Floods, Crops Do Not Get Destroyed.

जलमहल का जल, संवार सकता है ‘कल’:मानसागर की 8 किमी. टूटी नहर सही कर दें तो 50 गांवों का भूजल स्तर सुधर जाए, शहर बाढ़ से बच जाए, फसलें ना उजड़ें

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: इमरान खान
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यहां से जाजोलाई की तलाई और कानोता बांध की ओर जाता है पानी। फोटो : महेन्द्र शर्मा - Money Bhaskar
यहां से जाजोलाई की तलाई और कानोता बांध की ओर जाता है पानी। फोटो : महेन्द्र शर्मा

मानसून में मानसागर (जलमहल) से करोड़ों लीटर पानी ओवरफ्लो होकर व्यर्थ बह जाता है। यह जलमहल के पीछे दो नहरों के जरिए एक ओर कानोता बांध और दूसरी ओर जाजोलाई की तलाई तक जाता है। जाजोलाई की ओर 8 किमी लम्बी नहर 5 किमी तक तो पक्की बनी है लेकिन आगे 3 किमी कच्ची है। इससे पानी खेतों में भर जाता है और खड़ी फसलें बर्बाद हो जाती हैं।

दूसरी ओर, कानोता बांध की ओर जाने वाली बांडी नदी अतिक्रमण की भेंट चढ़ने से कई बार बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संसाधन विभाग मानबाग, सड़वा मोड़, सराय-बावड़ी से आगे 3 किमी जाजोलाई, सुकली नदी तक पक्की नहर बनवा दे तो फसलें बर्बाद होने से बचेंगी। साथ ही 5-6 ग्राम पंचायतों के 50 से अधिक गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा और दिल्ली रोड पर भू जल स्तर भी सुधारेगा।

बर्बादी को खुशहाली में बदलने के इस रास्ते पर चले सरकार तो...शहर को हो सकते हैं कई फायदे

  1. हाथी गांव, नाहरगढ़ अभयारण्य तक कम खर्च में पानी पहुंचेगा
  2. आमेर, कूकस, रामगढ़, दिल्ली राेड पर भूजल स्तर सुधरेगा
  3. दिल्ली राेड पर ग्रीन एरिया डवलप किया जा सकेगा
  4. जयपुर-दिल्ली हाईवे इलाके की सड़कें टूटने से बचा सकेंगे

मानसागर की भराव क्षमता 3.66 मीटर, परकोटे का पानी इसी में आता है, मानसून में आमेर रोड डूब जाती है

परकोटे का बरसाती पानी मानसागर में ही पहुंचता है। झील की गहराई 3.66 मीटर, भराव क्षमता 1.14 एमक्यूएम है। मानसून में बारिश अच्छी हो तो मानसागर 5-7 बार ओवरफ्लो होता है। यह पानी पीछे की नहरों से कानोता डेम और जाजोलाई की तलाई तक जाकर बाढ़ के हालात बनाता है। आमेर रोड भी पानी में डूब जाती है। जबकि दिल्ली रोड तक 12 से अधिक गांवों के किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिलता।

नहर के री-कंस्ट्रक्शन के लिए आमेर रोड विकास समिति ने केन्द्र से लेकर राज्य सरकार तक पत्र भेजे

शहर के उत्तर-पूर्व में बहने वाली इस आधी कच्ची-आधी पक्की नहर के री-कंस्ट्रक्शन के लिए 5 साल से संघर्ष कर रहे आमेर रोड विकास समिति के प्रहलाद सहाय शर्मा केन्द्र से लेकर राज्य सरकार तक पत्राचार कर चुके हैं। शर्मा का कहना है कि कच्चे हिस्से को पक्का कर और पानी को ट्रीट कर आगे भेजा जाए तो दिल्ली रोड के इलाकों की तस्वीर संवर सकती है। पानी का सदुपयोग भी हो सकता है।

आधी पक्की, आधी कच्ची नहर, नतीजा-फसलें चौपट
आधी पक्की, आधी कच्ची नहर, नतीजा-फसलें चौपट

दिल्ली रोड पर भूजल स्तर अभी 300-400 फीट नीचे है, उसे बढ़ाया जा सकेगा
मानसागर के पीछे मानबाग से निकलने वाली नहर की कुल दूरी सुकली नदी तक 8 किमी है। इसमें से दिल्ली रोड पर मानबाग, सड़वा मोड़, सरायबावड़ी तक 5 किमी की नहर पक्की बनी हुई है। आमेर रोड विकास समिति कच्ची नहर को पक्की करवाने के लिए कलेक्टर, जल संसाधन विभाग को ज्ञापन दे चुका है।

सरकार सड़वा मोड पर ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर और नहर काे री-बिल्ट कर सुकली नदी तक जोड़े और पानी आगे पहुंचाए तो दिल्ली रोड इलाके की स्थिति सुधर सकती है। साथ ही कानोता डेम को सीधे आवक मिल सकती है। दिल्ली रोड पर ज्यादातर इलाकों में भूजल स्तर 300-400 फीट नीचे है, इसमें भी सुधार किया जा सकता है।

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