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उदासीनता:उच्चाधिकारियों को कई पत्र भेजने के बाद भी पशु मेला ग्राउंड की जमीन का नहीं हो पा रहा सीमांकन

करौली4 महीने पहले
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करौली। श्री शिवरात्रि पशु मेला ग्राउंड पर हो रहे अस्थाई अतिक्रमण। - Money Bhaskar
करौली। श्री शिवरात्रि पशु मेला ग्राउंड पर हो रहे अस्थाई अतिक्रमण।
  • पशु पालन विभाग नेभेजे अतिक्रमियों को नोटिस लेकिन प्रशासनिक और विभाग की उदासीनता के कारण अतिक्रमण हटने के स्थान पर बढ़ गई संख्या

पशु पालन विभाग एवं जिला प्रशासन की उदासीनता से चलते श्री शिवरात्रि पशु मेला ग्राउण्ड की 54 बीघा 12 विस्वा भूमि अतिक्रमण की भेट चढ़ती जा रही है और इसी का फायदा उठाकर अतिक्रमणकारियों के हौंसले बुलंद हो गए है। अतिक्रमणकारियों ने जहां-तहां जमीन पर स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण करना शुरु कर दिया है तो कई लोगों ने इस खाली भूखंड को कचरा डम्प यार्ड समझ लिया है और यहां पर कचरा फैंक रहे है। ऐसी ही स्थिति रही तो आने वाले समय में पशु पालन विभाग की जमीन पर अतिक्रमणों की भरमार हो जाऐंगी। वहीं दूसरी और पशु पालन विभाग ने अपनी इस जमीन की सुरक्षा के लिए भी कोई प्रस्ताव उच्चाधिकारियों काे नहीं भेजे है।गौरतलब है कि जिला मुख्यालाय पर ही शहर के बीचों बीच पशु पालन विभाग की 56.10 विस्वा जमीन है।

इस जमीन में से कुछ भाग पर कार्यालय एवं अस्पताल का निर्माण हो रहा है और 54 बीघा 12 विस्वा जमीन खाली पड़ी हुई है। इस खाली पड़ी हुई जमीन पर किसी ने पत्थर एवं ईट डालकर तो किसी ने जानवरों का चारा भरकर तो किसी ने पत्थरगढ़ी कर तो किसी ने खोखा रखकर अतिक्रमण किया हुआ है। यहां तक की एक तो लोगों ने तो स्थाई अतिक्रमण तक कर लिया है। पशु पालन विभाग की जमीन गंदा कचरा फैंकने के काम में आ रही है। मृत मवेशियों को तो यहां फैका ही जाता है साथ ही पूरे शहर के बूचडखानों से आने वाली गंदगी भी यही फैंकी जा रही है। जिसके कारण लोगों को तो परेशानी हो ही रही है साथ ही पशुपालन विभाग की जमीन पर भी अतिक्रमण्कारी अतिक्रमण करने लगे है। शहर के बीचो बीच हाेने के कारण इस जमीन पर अधिकांशतय भूमाफियाओं की भी नजर बनी हुई है।
पशुपालन विभाग ने माना अतिक्रमण और अतिक्रमियो को भेजे नोटिस
स्वयं पशु पालन विभाग भी भूमि पर हो रहे अतिक्रमण से अवगत है। जिसके चलते गत 27 फरवरी 2020 को संयुक्त निदेशक पशु पालन विभाग करौली द्वारा अतिक्रमणकारियों को मेला मैदान पर नोटिस भेंजे गए और इसकी शिकायत कलेक्टर से की गई लेकिन पशु पालन विभाग द्वारा जिन लोगों को नोटिस भेजे गए है ।उन्होंने आज तक अपना अतिक्रमण नहीं हटाया है। पशु पालन विभाग ने अशफाक पुत्र गुलाम रसूल, फजल रहमान, अस्सो पुत्र भोपू खान, पप्पू खान पुत्र नूरा साह, अमरउद्दीन पुत्र जलालूउद्दीन, तौफीक पुत्र सत्तू खान, अशफाक खान पुत्र रफीक खान, मुन्ना पुत्र जहीर खान, नासिर अली पुत्र लियाकत अली, मुनन शाह पुत्र अशफक शाह, राशिद खान पुत्र कमालुद्दीन खान को पूर्व में ही नोटिस जारी कर रखे है। वहीं कई अतिक्रमणकारियों को अभी तक नोटिस की कार्यवाही भी नहीं की है।
वर्ष 1991 में पशु पालन विभाग ने अवाप्त की 54 बीघा 12 विस्वा जमीन
विभागीय जानकारी के अनुसार 14 मार्च 1991 में निदेशक पशु पालन विभाग जयपुर ने 54 बीघा 12 विस्वा भूमि अवाप्त करने के लिए करौली पशुपालन विभाग को निर्देशित किया। जिस पर पशु पालन विभाग ने श्री शिवरात्रि पशु मेला मैदान के लिए 32 खातेदारों से भूमि अवाप्त की, वहीं 5 सिवायचक खातों की भूमि को शामिल करते हुए पशु पालन विभाग ने कूल 54 बीघा 12 विस्वा भूमि अवाप्त की थी।
मेला आने पर विभाग को याद आता है मेला ग्राउंड का अतिक्रमण
गौरतलब बात तो यह है कि पशु पालन विभाग के अधिकारियों की जानकारी में होने के बाबजूद पशु पालन विभाग अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करता है वहीं उच्चाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी पशु पालन विभाग द्वारा मेला आने पर ही मेला ग्राउण्ड में होने वाले अतिक्रमण को लेकर पत्र भेजा गया है। हाल ही में विभाग द्वारा मेला आयोजित होने से पूर्व 4सितम्बर 2020 को तहसीलदार को पत्र भेजकर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी। इससे पूर्व कलेक्टर के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने को पत्र भेजा गया लेकिन कोरोना काल में मेला निरस्त होने के कारण प्रशासन द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं की गई और ना ही पशु पालन विभाग ने कोई अन्य पत्र भेजा। वहीं अभी कोई भी मेला ग्राउण्ड की भूमि की सुरक्षा को लेकर चार दीवारी निर्माण कराने का प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।
स्थायी अतिक्रमण नहीं है
^स्थाई अतिक्रमण नहीं है। अधिकारियों को पत्र भेजा था लेकिन सीमाज्ञान नहीं हुआ है। मेला ग्राउण्ड की चार दीवारी निर्माण के लिए मुझसे पहले वाले अधिकारी ने प्रस्ताव भेजे थे। नगर परिषद द्वारा अपना कचरा यहां डाला जाता था। जिस पर आयुक्त को भी पत्र भेजा गया था।- डॉ. खुशीराम मीना, संयुक्त निदेशक पशु पालन विभाग करौली।
^पहले नगर परिषद द्वारा वहां पर अस्थाई रुप से कचरा ड़ाला जाता था और बाद में उसे उठा लिया जाता था। वर्तमान में किसी भी प्रकार का कोई कचरा नहीं ड़ाला जा रहा है।- नरसी मीना, आयुक्त नगर परिषद करौली।

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