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जानलेवा पिलर:बरनावदा गांव के पास बनास ब्रिज पर बने 60 सेफ्टी पिलर क्षतिग्रस्त

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
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  • 5 दिन पहले हुए हादसे में बालिका की मौत के साथ 12 लोग हुए थे जख्मी, फिर भी विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं
  • बनास नदी पर इस ब्रिज को बनाने का कार्य वर्ष 1994 में शुरू हुआ था
  • करीब पांच वर्ष में यह ब्रिज बनने के बाद वर्ष 1999 में इस पर यातायात शुरू हुआ था
  • दोनों साइडों में बने कुल 740 सेफ्टी पिल्लरों में से करीब 60 सेफ्टी पिल्लर क्षतिग्रस्त हैं

खंडार क्षेत्र में बरनावदा गांव के पास बनास नदी पर बना ब्रिज इन दिनों जानलेवा साबित हो रहा है। इस ब्रिज पर 60 स्थानों पर सेफ्टी पिल्लर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिससे बड़ी दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। अब तक कई वाहन इस ब्रिज से नदी में कूद चुके हैं, जिसमें कई लोग घायल होने के साथ एक बालिका की मौत भी हो चुकी है। दूसरी ओर संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोस है। बनास नदी पर इस ब्रिज को बनाने का कार्य वर्ष 1994 में शुरू हुआ था। करीब पांच वर्ष में यह ब्रिज बनने के बाद वर्ष 1999 में इस पर यातायात शुरू हुआ था। खास बात यह है कि जब से यह ब्रिज बना है तब से आजतक सुरक्षा के नाम पर इस पर एक कंकड़ तक नहीं रखा गया है। ब्रिज के वर्तमान हालात ठीक नहीं हैं। स्थिति यह है कि इसके दोनों साइडों में बने कुल 740 सेफ्टी पिल्लरों में से करीब 60 सेफ्टी पिल्लर क्षतिग्रस्त हैं।

यह सभी सेफ्टी पिल्लर इस ब्रिज पर लंबे समय से होती आ रही दुर्घटनाओं के कारण ही एक के बाद एक क्षतिग्रस्त हुए हैं। ऐसे में इस ब्रिज पर दोनों ही साइडों में कई स्थानों पर सेफ्टी पिल्लर टूटकर झुक रहे हैं तो कई जगह सेफ्टी पिल्लरों के खाली स्थान ही नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर तो कई फुट की दूरी तक सेफ्टी पिल्लरों का नामोनिशान तक नहीं है। ऐसे में नदी और ब्रिज पर दुर्घटनाओं को रोकने में सेफ्टी पिल्लरों की उपयोगिता का अंदाजा क्षतिग्रस्त पिल्लरों को देखकर लगाया जा सकता है। बनास नदी पर बना यह ब्रिज करीब 2000 फुट लंबा है तथा इसकी ऊंचाई करीब 20 फुट है।

ब्रिज पर इस कारण होते हैं हादसे वाहन चालकों ने बताया कि बनास ब्रिज पर कई स्थानों पर सेफ्टी पिल्लर टूट रहे हैं तथा बचे कुचे सेफ्टी पिल्लरों की भी पुताई नहीं हो रही है और ना हीं पिल्लरों और ब्रिज पर किसी तरह के सूचना संकेत या रेडियम लग रहे हैं। ऐसे में रात के समय वाहन चालकों को दोनों साइडों में ब्रिज की सीमा का सही अंदाजा नहीं लग पाता। वहीं कई बार दूसरे वाहन से साइड लेने के चक्कर में भी चालक चूक जाता है। यही कारण है कि इस ब्रिज पर दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है।

मुरारीलाल मीणा सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग खंडार का कहना है कि जब से यह ब्रिज बना है तब से ही 2 फुट ऊंचाई के ये सेफ्टी पिल्लर लगे हुए हैं। यह बात सही है कि इनकी ऊंचाई कम है, अगर 3 से 4 फुट ऊंचाई की रैलिंग लग जाए तो ब्रिज पर सुरक्षा बढ़ेगी। यह ब्रिज वर्तमान में सानिवि के अंतर्गत ही आता है। अब यह मार्ग स्टेट हाईवे घोषित हो गया है, ऐसे में शीघ्र ही इस पर निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

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