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मेहंदीपुर बालाजी मंदिर बंद होने से रोजी-रोटी पर संकट:श्रद्धालुओं की आवक कम होने से आजीविका ठप, 20 गांव के हजारों लोग हैं मंदिर पर निर्भर

मेहंदीपुर बालाजी5 महीने पहले
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राज्य सरकार द्वारा जारी की गई कोरोना गाइडलाइन को लेकर जिला प्रशासन के निर्देशन में मेहंदीपुर बालाजी मंदिर 11 जनवरी से बंद है। इससे गरीब तबके के लोगों के आगे आजीविका के साधन बंद होने से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

तंबू लगाकर रहने वाले गरीब तबके के लोगों ने बताया कि बालाजी मंदिर खुला होने के दौरान रेडी रिक्शा चलाकर एवं भीख मांग कर अपने बच्चों का पालन पोषण करते थे। मंदिर बंद होने के दौरान श्रद्धालुओं की आवक कम होने से सारा काम ठप हो गया है।

गरीब तबके के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
गरीब तबके के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने बताया कि कोरोना की पहली पहली लहर के दौरान जनप्रतिनिधियों ने भी लॉकडाउन में राशन पानी देकर हमारी मदद की थी। तीसरी लहर के दौरान हमारी मदद करने कोई भी जनप्रतिनिधि आगे नहीं आया है। मंदिर बंद होने के कारण गेस्ट हाउस और दुकानों पर काम करने वाले गरीब तबके के लोगों को संचालनकर्ताओं ने उन्हें काम से छुट्टी दे दी है।

गौरतलब है कि मेहंदीपुर बालाजी क्षेत्र के आसपास के करीब 20 गांवों के हजारों लोगों की और मेहंदीपुर बालाजी में रोड किनारे तंबू लगाकर रहने वाले गरीब तबके के लोगों की आजीविका बालाजी महाराज मंदिर के ऊपर निर्भर है। मंदिर बंद होने से यहां के लोग बेरोजगार हो गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश में बताया कि पहले वाले कलेक्टर साहब से बात की थी अब उनका तबादला हो गया है। आज नए कलेक्टर साहब से बालाजी मंदिर खुलवाने को लेकर चर्चा करेंगे।

बिजली कनेक्शन काटने से विश्राम गृह संचालकों में रोष

स्थानीय विश्राम गृह संचालकों का कहना है कस्बे में श्रद्धालुओं की आवक कम होने से सभी विश्रामगृह खाली पड़े हैं जिससे कमाने-खाने का जरिया खत्म हो गया है। बिजली का बिल चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। इस दौरान बिजली विभाग के कर्मचारी बिल ना देने पर बिजली के कनेक्शन काट रहे हैं। संचालकों का कहना है कि मंदिर नहीं खुलने तक बिजली विभाग के कर्मचारी बिल को लेकर परेशान नहीं करें तो कुछ राहत मिल सकती है।

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