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जेल की दीवारों पर कैदी ने की पेंटिंग:दुर्ग और विजयस्तम्भ के साथ ही सांवलिया सेठ और महादेव की बनाई पेंटिंग

चित्तौड़गढ़2 महीने पहले
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पेंटिंग्स करता हुआ बंदी।

प्रतिभा पर कोई रोक नहीं लगा सकता, चाहे जेल की दीवार ही क्यों ना हो। जिला जेल में बन्द एक बंदी को जेल उपाधीक्षक का प्रोत्साहन मिला तो उसने अपने टेलेंट से जेल की दीवारों की सूरत ही बदल दी। बंदी ने जेल की अंदर की दीवारों और बैरक में कई आकर्षित पेंटिंग्स बनाई। जेल की दीवारों पर यह पेंटिग्स तैयार करने में एक निजी संस्था ने इक्विपमेंट्स अवेलेबल करवाए है।

वैसे तो जेल की ऊंची-ऊंची दीवारों के पीछे कोई भी जाना पसंद नहीं करता और ना ही कोई देखना पसंद करता है। लेकिन जेल के अंदर की दीवारें और बैरक की दीवारों की एक कैदी ने ऐसी सूरत बदली की हर कोई तारीफ किए बिना नहीं रहता। चाहे मेडिकल टीम की नजर हो या किसी भी अधिकारी की नजर, एक बार भी इन दीवारों पर टिक ही जाती है। जिला जेल में करीब साढ़े तीन साल से बंद एक कैदी पुठोली निवासी शाहरुख पुत्र शरीफ खान ने जेल के अंदर मुख्य चौक, पूजा स्थल और बैरक में आकर्षण पेंटिंग बनाई।

जेलर ने देखा पेंसिल से स्केच बनाते हुए

चित्तौड़गढ़ जेल के उपाधीक्षक योगेश तेजी ने बताया कि हमेशा कोशिश की जाती है कि यहां पर बंद बंदियों के अंदर की प्रतिभा बाहर निकल के आए। उन्हें मोटिवेट भी किया जाता है। बैरक के निरीक्षण के दौरान शाहरुख को कई बार पेंसिल से स्केचिंग करते हुए देखा था। इससे पता चला कि शाहरुख अच्छा आर्ट जानता है। तब एकदम से आईडिया आया क्यों ना जेल की दीवारों पर कुछ पेंटिंग्स बनाई जाए। जब इस बारे में बंदियों से बात की तो शाहरुख ने आगे आकर पेंटिंग करने की बात कही।

पूजा घर को संवारा।
पूजा घर को संवारा।

पेंटिंग्स के साथ फोटोग्राफी का था शौक

उप अधीक्षक डिप्टी तेजी ने बताया कि शाहरुख साढ़े 3 साल से पोक्सो एक्ट में गिरफ्तार होने के बाद जेल में बंद है। मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है। शाहरुख जेल आने से पहले फोटोग्राफी और पेंटिंग्स बनाने का काम करता था। उसने इंदौर से कंप्यूटर कोर्स भी कर रखा है। इसके अलावा मुंबई से आगे की पढ़ाई भी कर रहा था।

दुर्ग और विजयस्तम्भ से सजा जेल

डिप्टी जेलर ने बताया कि जेल की दीवारों पर पेंटिंग बनाने के लिए कलर, कूंची, ब्रश की जरूरत थी। ऐसे में उन्होंने एक निजी संस्था से बात कर सभी इक्विपमेंट्स जुटाए। फिर शाहरुख ने काम करना शुरू किया। मुख्य चौक पर शाहरुख ने दीवारों पर चित्तौड़ के इतिहास को उकेरा है। चित्तौड़ की पहचान उसके दुर्ग, विजय स्तंभ से जाना जाता है। इसीलिए उसने मुख्य चौक पर दुर्ग और विजय स्तंभ को आका है। इसके अलावा पूजा स्थल पर भगवान सांवलिया सेठ, महादेव और मीरा बाई के चित्र बनाए। इसके लिए डिप्टी जेलर ने शाहरुख के मुलाकात के समय की भी अतिरिक्त समय देकर सुविधाएं बढ़ाई है।