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पत्थर व्यवसाय पर बढ़ाया रॉयल्टी टैक्स:संकट में येलो स्टोन, रॉयल्टी बढ़ाने से 500 करोड़ का कारोबार सिर्फ 10 फिसदी रह गया

जैसलमेर2 महीने पहले
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जैसलमेरी पत्थर पर बढ़ी रॉयल्टी से संकट। - Money Bhaskar
जैसलमेरी पत्थर पर बढ़ी रॉयल्टी से संकट।

विश्व स्तर पर जैसलमेर की पहचान बन चुका येलो स्टोन पर रॉयल्टी टैक्स बढ़ा दिया गया है। जिससे पहले से मंदी की मार झेल रहे पत्थर व्यवसाय को काफी नुकसान पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि जैसलमेर का पीला पत्थर देश के साथ विदेशों में भी जैसलमेर का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

भारत के साथ साथ अरब, इंग्लैण्ड, अमेरिका सहित कई देशों में जैसलमेर के पत्थर से मकान व कई इमारतें बन गई है। लेकिन अब सरकार द्वारा जैसलमेरी पत्थर पर रॉयल्टी टैक्स में बढ़ोतरी कर दी गई है। जिससे अब जैसलमेरी पत्थर के भावों में और अधिक बढ़ोतरी होने से व्यापार पर विपरीत असर पड़ने की पूरी संभावना है।

जिससे व्यापारियों में रोष भी व्याप्त हो गया है। पत्थर पर लगने वाले करों में बढ़ोतरी होने से इसकी बिक्री पर काफी असर पड़ने की संभावना है। जिससे पत्थर व्यवसाय को नुकसान पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

नुकसान इसलिए; एक ट्रक पर आएगा 3 से 5 हजार रुपए अतिरिक्त खर्चा

जैसलमेर के पीले पत्थर की चमक अब फीकी होती जा रही है। कुछ समय पहले जैसलमेरी पत्थर की डिमांड एकाएक घट गई थी। उसके बाद यलो स्टोन की बिक्री एक बार फिर से बढ़ी थी लेकिन उसके बाद कोरोना के कारण पत्थर व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया था।

जिसके बाद अब कोरोना के बाद फिर से गाड़ी पटरी पर आने की उम्मीद थी। लेकिन अब रॉयल्टी बढ़ने के बाद इसकी बिक्री पर विपरीत असर पड़ने की संभावना है। पहले की तुलना में करीब 20 टन भरे हुए पत्थर अब एक गाड़ी में 3 से 5 हजार रुपए का अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा।

इसके साथ ही गाड़ी में माल का भार बढ़ने के साथ ही रॉयल्टी में भी बढ़ोतरी होगी। जिससे ग्राहकों को अधिक पैसों का भुगतान करना पड़ेगा। जिससे हर गाड़ी पर उन पर वित्तीय भार बढ़ जाएगा। जिससे जैसलमेरी पत्थर की बिक्री पर विपरीत प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

मार्बल पर भी संकट, लाइमस्टोन फ्लोरिंग की 200 खदानें बंद, 10% ही डिमांड मिल रही

जैसलमेरी यलो मार्बल की डिमांड पहले बड़े शहरों में खूब रही और अब धीरे धीरे डिमांड एकदम घट गई है। वर्तमान में 10 प्रतिशत भी माल बाहर नहीं जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ मार्बल की खदानेेंं भी खाली हो गई और नई खदानें आवंटित नहीं हो रही है।

लाइम स्टोन फ्लोरिंग के कच्चे माल की लागत ज्यादा आने के कारण मालिकों ने खदानें बंद कर दी हैं। यहां तक कि जिनके खदान के साथ कटर भी हैं वे अपनी खदान को बंद कर दूसरी खदान से पत्थर ले रहे हैं। क्योंकि खदान से पत्थर निकालने की कॉस्ट 300 रुपए प्रति टन से ज्यादा रही है जबकि 400 रुपए टन पत्थर आसानी से मिल रहा है।

500 करोड़ का व्यापार 50 करोड़ में सिमटा

जैसलमेर में कुछ साल पहले पत्थर उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा था। जानकार बताते हैं कि सालाना 500 करोड़ का टर्न ओवर पत्थर व्यवसाय का था जो अब घटकर 50 करोड़ में सिमट गया है। पीले पत्थरों से घरों का निर्माण होने के कारण जैसलमेर दूर से सोने की नगरी की तरह चमकता है। पीले पत्थरों ने ही जैसलमेर को स्वर्णनगरी की पहचान दी है। कोरोना संकट में आर्थिक दिक्कतों की वजह से ये पत्थर खुद अपनी ही पहचान का मोहताज हो गया था।

रॉयल्टी बढ़ने से 20 टन की गाड़ी में 3 हजार से ज्यादा की बढ़ोतरी हो जाएगी। विकट परिस्थितियों के बावजूद रॉयल्टी बढ़ाई गई है। जो दोहरी मार है। इसके लिए सरकार ध्यान देना चाहिए। ताकि व्यापार को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही मंदी की मार से बाहर निकल सके। -गिरीश व्यास, सचिव, रीकाे एसोसिएशन।

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