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अलवर गैंगरेप पर छात्राएं कलेक्टर से भिड़ीं:बोले- पढ़ने आती हो या राजनीति करने; पापा का नंबर दो, बेटियों ने कहा-सेफ रहेंगी तभी तो पढ़ेंगी

अलवर4 महीने पहले
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अलवर में बेजुबान बच्ची से गैंगरेप मामले पर छात्राएं शुक्रवार को गुस्सा जाहिर कलेक्टर के दफ्तर पहुंच गईं। लेकिन छात्राओं से कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया अजीब तरीके से पेश आए। अब इस पर विवाद छिड़ गया है। मुलाकात के दौरान कलेक्टर ने छात्राओं से कहा था कि वे पढ़ने आती हैं या राजनीति करने।

राजगढ़ की छात्रा मंजू मीणा से कलेक्टर ने कहा, 'आपने पापा के नंबर दो।' छात्रा ने कलेक्टर को नंबर दिए। इसके बाद कलेक्टर ने वहां खड़ी एडीएम सुनीता पंकज से कहा कि छात्रा मंजू मीणा के पिता भरोसी मीणा से फोन पर बात करो। पूछो कि उनकी बेटी पढ़ने आई हैं या राजनीति करने। दूसरे और भी जो बच्चियां आई हैं। उनके पापा से भी बात करो।

महिला मोर्चा की पदाधिकारी ने आपत्ति जताई
महिला मोर्चा की पदाधिकारी ने कहा कि कलेक्टर साहब ये आप गलत कर रहे हैं। दूसरी बच्ची ने कहा कि हम स्कूल से अपनी मर्जी से आए हैं। बेटियों के साथ अत्याचार हो रहा है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि मेरी तरफ से बच्चियों को सलाह है कि वे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें। कलेक्टर ने बच्चियों का नाम, उनके पापा के मोबाइल नंबर लिए। दूसरी बालिका से भी उनके पापा के नंबर पूछे। इसके बाद एडीएम से कहा कि इनके पापा से बात करें।

अपने हक की आवाज उठाना गलत है क्या-भाजपा
भाजपा नेताओं ने कहा कि कहा कि अपने हक की आवाज उठाना गलत है क्या। कलेक्टर ने महिला पदाधिकारियों को भी रोका। एक बालिका ने बोला कि पापाजी क्या करेंगे। बच्चियों पर अत्याचार हो रहा है। कलेक्टर एक के बाद एक कई बालिकाओं से नंबर लिए। एक-दो बेटियों ने कहा कि वे सेफ रहेगी तभी तो पढ़ाई करेंगी।

असल में अलवर में मूक बधिर बच्ची से हुई घटना के विरोध में भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के साथ राजगढ़ से एक स्कूल की कई बालिकाएं आई थीं, जो कलेक्टर से मिलीं। उन्होंने यह भी शिकायत रखी कि बेटी को न्याय मिलना चाहिए। उनके साथ भी राह चलते छेड़छाड़ की जाती है। इस पर कलेक्टर ने एक बीएससी की छात्रा से पूछा कौन-कौन सी जगह आपको दिक्कत आती है। उसकी जानकारी दें। हम वहां पुलिस लगा मॉनिटिरिंग कराते हैं ताकि आपको आगे दिक्कत नहींआए।

कलेक्टर का पूछना बन गया मुद्दा
इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के अलग-अलग कमेंट्स आ रहे हैं। कुछ इसे कलेक्टर की राय सही बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि कलेक्टर खुद अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। घटना के प्रति विरोध जताना आमजन का अधिकार है। जिसे वे दबाना चाह रहे हैं। हालांकि कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया का कहना है कि उनका मकसद बालिकाओं काे समझाने से था ताकि वे अनावश्क किसी के बहकावे में आकर खुद का समय खराब नहीं करें। केवल पढ़ाई पर फोकस रखें ताकि उनका बेहतर भविष्य हो। इसे जानबूझकर तूल दिया जा रहा है।

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