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ई-ग्रास चालान में गड़बड़ी:19 स्टाम्प वेंडरों के लाइसेंस निरस्त, 3 सब रजिस्ट्रार को कार्यमुक्त किया, 7 लिपिक APO, 44 कार्मिकों को नोटिस

अजमेरएक महीने पहले
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सिंबोलिक इमेज। - Money Bhaskar
सिंबोलिक इमेज।
  • पंजीयन व मुद्रांक विभाग ने की कार्रवाई

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग राजस्थान ने ई-ग्रास चालानों का दुरुपयोग कर बिना शुल्क चुकाए दस्तावेजों का पंजीयन कराने का फर्जीवाड़ा पकड़ा है। ऐसा कर 7.94 करोड़ रुपए की राजस्व का नुकसान पहुंचाया। ऐसे में महानिरीक्षक अजमेर ने जयपुर के 19 स्टाम्प वेंडरों के लाइसेंस निरस्त किए और 3 सब रजिस्ट्रार को कार्यमुक्त कर रेवेन्यू बोर्ड भेज दिया है। साथ ही 7 लिपिकों को एपीओ कर 44 कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए है।

जांच की तो हो गया खुलासा

महानिरीक्षक महावीर प्रसाद के अनुसार, एक जुलाई 2021 को विभाग की जानकारी में आया था कि पहले से ही उपयोग में लिए जा चुके चालान को दस्तावेज के पंजीयन के लिए पुनः उपयोग में लिया गया है। सूचना को गम्भीरता से लेकर उसी दिन NIC और ई ग्रास की तकनीकी टीम के साथ मीटिंग कर उन्हें ई पंजीयन एवं ई ग्रास में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने तथा पुनः उपयोग में लिए गए चालानों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

NIC की ओर से 913 ऐसे दस्तावेजों की सूची उपलब्ध करवाई गई, जिनमें पहले से ही उपयोग में लिए गए चालानों के पुनः उपयोग की आशंका व्यक्त की गई। विभाग द्वारा इन मामलों में पता लगाने के लिए मुख्यालय स्तर पर एक कमेटी का गठन कर इन मामलों जांच कराई। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार कुल 17 उप पंजीयक कार्यालयों से संबंधित 876 दस्तावेजों में 7.94 करोड़ रुपए की राजस्व हानि का पता चला।

इन प्रकरणों को संबंधित उप महानिरीक्षकों को भिजवा कर दस्तावेजों की कार्यालय प्रतियों से जांच करने के निर्देश दिए गए। राजस्व हानि पाए जाने की स्थिति में वसूली करने, मामले में आपराधिक कृत्य पाए जाने पर प्रकरण दर्ज कराने तथा विभागीय स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के प्रस्ताव मुख्यालय को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए।

उप महानिरीक्षक से मिली सूचना के अनुसार 676 प्रकरणों में से 11 प्रकरणों में राशि जमा होने का सत्यापन हो गया है। शेष 665 प्रकरणों में से 218 प्रकरणों में पक्षकारों की ओर से 2.28 करोड़ जमा करवाये जा चुके हैं तथा 447 प्रकरणों में 5. 64 करोड रुपए की वसूली बकाया है।

फेक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मानी लापरवाही

मामले की गम्भीरता को देखते हुए विभाग द्वारा मुख्यालय स्तर पर भी एक उच्च स्तरीय फेक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन कर उक्त मामलों में सघन जांच की गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि कतिपय स्टाम्प वेण्डरों द्वारा कोषालय से स्टाम्प क्रय करने के लिए उपयोग में लिए गए चालानों को कूटरचित करके दस्तावेजों के पंजीयन के लिए पुनः उपयोग में लिया गया है।

संबंधित उप पंजीयक, पंजीयन लिपिक एवं अन्य स्टाफ ने राज्य सरकार और विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की अवहेलना कर चालानों का ई ग्रास साईट से सत्यापन किए बिना ही लापरवाही पूर्वक दस्तावेजों का पंजीयन किया है। यदि चालानों का सत्यापन किया जाता और समय पर अंक मिलान किया जाता तो ऐसे कूटरचित चालानों के पुनः उपयोग को रोका जा सकता था।

तीन पंजीयक कार्यमुक्त, 7 लिपिक APO, 44 को नोटिस

उप पंजीयक कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारियों की लापरवाही पाए जाने और राजस्व हानि चिन्हित होने के बावजूद भी वसूली के सार्थक प्रयास नहीं करने और चालानों के दुरूपयोग और कूटरचना के लिये दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करने में विलम्ब करने के कारण उप पंजीयक जयपुर (पंचम) साधना शर्मा, उप पंजीयक जयपुर (दशम) राजीव बड़गूजर तथा कार्यवाहक उप पंजीयक जयपुर (द्वितीय) सविता शर्मा को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया गया। तत्कालीन पंजीयन लिपिक बाबूलाल मीणा, सुशील कुमार शर्मा, बलबीर सिंह घायल, अनुपम सिंह, अशोक कुमार उप्रेती, दीपक हिंगोनिया तथा श्यामलाल कुमावत को APO किया गया है तथा 44 पंजीयकों, पंजीयक लिपिकों एवं अन्य संबंधित कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिस पर बाद जांच नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

19 स्टाम्प वेंडर के लाइसेंस निरस्त, कराई FIR

उप महानिरीक्षक जयपुर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय की ओर से ऐसे 19 स्टाम्प वेण्डरों, जिनके उपयोग में लिए गए चालानों का दस्तावेजों के पंजीयन में कूटरचित कर पुनः उपयोग किया गया है, के लाईसेन्स निरस्त किए गए। उनके विरुद्ध कूटरचना के लिये प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई गयी है। अन्य उप महानिरीक्षकों द्वारा भी ऐसे मामलों में लाईसेन्स निरस्तीकरण और प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने की कार्यवाही की जा रही है।

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