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दिल्ली से आई टीम भी ढूंढ नहीं सकी खराबी:सिविल का ऑक्सीजन प्लांट 15 दिन में ही हो गया था बंद, नहीं हुआ ठीक

रोपड़2 महीने पहले
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सिविल अस्पताल रोपड़ में लगाया गया ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट। - Money Bhaskar
सिविल अस्पताल रोपड़ में लगाया गया ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट।

कोरोनाकाल में ऑक्सीजन की कमी पूरी करने के लिए सिविल अस्पताल में लगाया गया पहला 500 एलपीएल समर्था वाला ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट सफेद हाथी बना हुआ है। जुलाई 2021 में शुरू होने के करीब 15 दिन बाद ही यह प्लांट तकनीकी खराबी के चलते बंद हो गया था और अभी तक ठीक नहीं हो पाया है।

इसकी एक साल की वारंटी भी खत्म हो चुकी है। इसे ठीक करने के लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग ने डिप्टी कमिश्नर और स्वास्थ्य सचिव पंजाब को पत्र लिखे हैं। दिल्ली से भी कई बार यह प्लांट ठीक करने पहुंची लेकिन वह भी इसे ठीक करने में नाकामयाब रही।

सूत्राें की मानें तो कोरोनाकाल में कोविड ग्रस्त तथा सांस के मरीजों की सुविधा के लिए पंजाब सरकार तथा जिला प्रशासन के प्रयासों से मुंबई की एक संस्था द्वारा बेंगलुरू में ऑक्सीजन प्लांट लगाने वाली कंपनी से खरीदकर इस ऑक्सीजन प्लांट को रोपड़ के सिविल अस्पताल में लगवाया गया था।

इसका उद्घाटन जुलाई 2021 में तत्कालीन स्पीकर राणा केपी सिंह तथा मौजूदा सांसद मनीष तिवारी ने किया था लेकिन यह कुछ ही दिन काम कर पाया। इसके बाद सेहत विभाग ने अप्रैल 2022 में 600 सिलेंडरों की समर्था वाला लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन गैस प्लांट भीलगाया। उस प्लांट में गैस भर कर टेस्टिंग की गई लेकिन एक बार टेस्टिंग के बाद उसे भी इस्तेमाल में नहीं लाया गया।

अब आलम ये है कि दोनाें प्लांट इस समय बंद हैं। इस कारण सिविल अस्पताल में पुराने ऑक्सीजन सिस्टम से ही काम चलाया जा रहा है। इस कारण एक महीने में करीब 300 बड़े और 120 छोटे ऑक्सीजन सिलेंडरों की खपत हो जाती है।

डिप्टी कमिश्नर और स्वास्थ्य सचिव को लिख चुके हैं खत

डिप्टी मेडिकल ऑफिसर (डीएमसी) डॉ. बलदेव सिंह ने बताया कि उन्होंने यह प्लांट ठीक करवाने के लिए पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन समेत डीसी और हेल्थ सचिव को खत लिखा हुआ है। मौजूदा समय में ऑक्सीजन की अधिक मांग न होने के चलते मरीजों को समर्था के अनुसार सिलेंडरों के जरिए ऑक्सीजन दी जा रही है।

डॉ. सिंह ने बताया कि सेहत विभाग को मुंबई की जिस संस्था द्वारा यह प्लांट डोनेट किया गया था, उसे भी पत्र लिखकर कहा गया है कि वे बेंगलुरू की कंपनी, जिससे यह प्लांट खरीदा गया है, को प्लांट की खराबी दूर करने को कहे ताकि इसकी तकनीकी खराबी दूर हो सके।

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