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पंजाब में कांग्रेस का संकट बढ़ा:2017 में पार्टी को सत्ता दिलाने वाले 3 चेहरों में से कैप्टन-जाखड़ अब BJP के साथ; सिद्धू भी निशाने पर

चंडीगढ़एक महीने पहले
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पंजाब में राहुल गांधी के सारथी बनने वाले सुनील जाखड़ ने पार्टी छोड़ दी। अब वह PM नरेंद्र मोदी के सिपहसालार बनकर पंजाब मे भाजपा को मजबूत करेंगे। पंजाब कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है। कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिद्धू के बाद सुनील जाखड़ उसी तिकड़ी का हिस्सा हैं, जो 2017 में कांग्रेस को सत्ता में लाए थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही भाजपा से गठजोड़ कर चुके हैं। अब जाखड़ भाजपाई हो गए।

नवजोत सिद्धू के भी कांग्रेस में बुरे दिन चल रहे। सोनिया गांधी उनसे पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी छीन चुकी हैं। अब उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस मिला हुआ है। जल्द ही सिद्धू पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक साल की कठोर कारावास की सजा सुना दी है।

जाखड़ के कांग्रेस छोड़ने की कहानी

प्रधान की कुर्सी छीनने से हुई थी नाराजगी : जाखड़ के कांग्रेस छोड़ने की कहानी उसी दिन शुरू हो गई थी, जब बिना किसी वजह उन्हें अचानक प्रदेश प्रधान की कुर्सी से हटा दिया गया। कांग्रेस ने उनकी जगह नवजोत सिद्धू को प्रधान बना दिया। जाखड़ तभी नाराज होकर पंजाब से बाहर चले गए थे। उन्होंने पंजाब में कांग्रेस संगठन से दूरी बना ली।

CM कुर्सी की खींचतान से भड़क गए : बाकी कसर CM की कुर्सी को लेकर मची खींचतान ने निकाल दी। कांग्रेस हाईकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटा दिया। जाखड़ इसके पक्ष में नहीं थे। हालांकि इसके बाद कांग्रेस हाईकमान जाखड़ को सीएम बनाना चाहती थी। सीएम की कुर्सी के लिए वह राहुल गांधी की च्वॉइस थे। इसके लिए जाखड़ को खास तौर पर बैंगलोर से पंजाब बुलाया गया। यहां उनके नाम पर वोटिंग कराई गई। जिसमें 78 में से 42 विधायक जाखड़ के हक में थे।

अंबिका सोनी के एक बयान से कुर्सी छिटकी : सुनील जाखड़ का सीएम बनना तय था। कांग्रेस नेता उनके घर बुके लेकर भी पहुंच गए थे। अचानक सोनिया गांधी की करीबी अंबिका सोनी के एक बयान ने उनकी कुर्सी छीन ली। अंबिका सोनी ने कहा कि पंजाब में CM सिख चेहरा ही होना चाहिए। जाखड़ खुद भी दावा करते रहे हैं कि सोनी ने कहा कि अगर हिंदू को सीएम बनाया तो पंजाब में आग लग जाएगी। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने पैर पीछे खींच लिए। फिर नवजोत सिद्धू और सुखजिंदर रंधावा को भी दरकिनार कर दिया गया। अंत में अंबिका सोनी के करीबी चरणजीत चन्नी को कांग्रेस ने सीएम बना दिया। जाखड़ ने कहा था कि जिस चरणजीत चन्नी को सीएम बनाया, उनके हक में सिर्फ 2 विधायक थे।

कैप्टन ने जाखड़ को भाजपा में शामिल होने पर बधाई दी
कैप्टन ने जाखड़ को भाजपा में शामिल होने पर बधाई दी

कैप्टन ने कुर्सी से हटाए जाने पर छोड़ दी थी पार्टी
कैप्टन अमरिंदर सिंह 2017 में पंजाब में वह चेहरा था, जिनके दम पर कांग्रेस सत्ता में आई। हालांकि सितंबर 2021 में कांग्रेस का कैप्टन से मोहभंग हो गया। कांग्रेस ने हरीश रावत को पंजाब इंचार्ज बनाकर भेजा। उन्होंने कैप्टन के कट्‌टर विरोधी नवजोत सिद्धू को सियासत में सक्रिय कर प्रधान बनवा दिया। जिसके बाद कैप्टन को सीएम की कुर्सी से हटा दिया गया। कैप्टन ने कांग्रेस छोड़ दी। हालांकि वह सीधे भाजपा में नहीं गए बल्कि पंजाब लोक कांग्रेस बना भाजपा से गठबंधन कर लिया।

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सिद्धू 'दर्शनी घोड़ा' ही बनकर रह गए
नवजोत सिद्धू ने प्रधान बनने के बाद कांग्रेस हाईकमान को कहा था कि उन्हें ताकत देना, वह दर्शनी घोड़ा बनकर नहीं रहेंगे। हालांकि पंजाब चुनाव आते-आते कांग्रेस ने उन्हें इसी लायक छोड़ दिया। पहले सिद्धू को सीएम नहीं बनाया। सिद्धू अपना पंजाब मॉडल दिखाते रहे गए लेकिन कांग्रेस ने अलग मेनिफेस्टो जारी किया। इसके बाद सिद्धू कहते रहे कि मुझे सीएम चेहरा बनाओ। कांग्रेस ने सिद्धू को दरकिनार कर चरणजीत चन्नी पर दांव खेला। सिद्धू ने कहा कि हार के जिम्मेदार चन्नी हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सिद्धू का इस्तीफा ले लिया। अब सिद्धू की जगह अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बना लिया।