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स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कहा:सत्य की राह में मुश्किलें हजार, मगर बिना घबराए करें पार

मुक्तसरएक महीने पहले
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श्री मोहन जगदीश्वर आश्रम कनखल हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि जी महाराज ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि सुख और दुख सिक्के के दो पहलु के समान हैं, जो जिंदगी में आते-जाते रहते हैं। मनुष्य सुख आने पर प्रसन्न होता है, लेकिन दु:ख आने पर घबरा जाता है। मनुष्य को दुखों से न घबराते हुए इसका हंसते हुए सामना करना चाहिए। मुसीबत के समय ही मनुष्य के साहस की पहचान होती है।

महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद गिरि जी महाराज ने ये विचार अबोहर रोड स्थित श्री मोहन जगदीश्वर दिव्य आश्रम में आयोजित ज्ञान भक्ति महोत्सव कार्यक्रम के दौरान प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए व्यक्त किए। श्रद्धालुओं को सत्य का पथ कभी न छोड़ने की प्रेरणा देते स्वामी जी ने कहा कि सत्यवादी राजा हरीश चंद्र ने कभी भी सत्य का दामन नहीं छोड़ा। बेशक सत्य की राह में उन्हें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा लेकिन वह इसका सामना हंसते-हंसते कर गए।

स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने दोस्ती की परिभाषा बताते हुए कहा कि दोस्त सिर्फ सच्चे व अच्छे बनाने चाहिएं। जीवन में ऐसे दोस्त बनाएं जो बुरे वक्त में काम आएं। अगर बुरे दोस्त व बुरी संगत में पड़ जाओगे तो जीवन खराब हो जाएगा। अच्छे दोस्त जीवन के पग-पग पर अपने दोस्त को सही राह दिखाते हैं। जो गलत राह दिखाए समझो वो सच्चा दोस्त व सच्चा हितैषी नहीं है। इसलिए जीवन में सच्चा दोस्त जरुर होना चाहिए। दोस्ती के बिना कोई जिंदगी नहीं होती। जिंदगी में अगर दोस्त न रहेगा तो जिंदगी क्या बचेगी।

आज कल तो वैसे दोस्तों की कमी नहीं है। सोशल मीडिया पर ही दोस्त बन जाया करते हैं। मगर दोस्तों की भीड़ में ऐसा सच्चा दोस्त होना बेहद जरुरी है जो बुरे वक्त में काम आए और गलत राह पर चलते समय दोस्त को सही राह दिखाए। जिंदगी का नाम दोस्ती, दोस्ती का नाम जिंदगी। दुनिया में कुछ भी नहीं रहता। रह जाती है तो सिर्फ दोस्ती रह जाती है।

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