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  • Used To Steal Electricity By Burning The Meter Or Breaking The Display, Theft Of 25.03 Lakh Units Caught In 16 Months, Fined At The Rate Of Rs 10 Per Unit

मीटर से छोड़छाड़ कर बिजली चोरी करना पड़ा महंगा:मीटर को जलाकर या फिर डिस्प्ले तोड़ चुरा लेते थे बिजली, 16 माह में पकड़ी 25.03 लाख यूनिट की चोरी, 10 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से लगेगा जुर्माना

लुधियानाएक महीने पहले
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मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला या उपभोक्ता ने जलाया, जिग तकनीक से कुछ ही मिनटों में सामने आएगी हकीकत - Money Bhaskar
मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला या उपभोक्ता ने जलाया, जिग तकनीक से कुछ ही मिनटों में सामने आएगी हकीकत

अकसर उपभोक्ता मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चुराते हैं। इससे जहां पावर लोड बढ़ता है। वहीं, पावरकॉम को रेवेन्यू की भारी चपत भी लगती है। अब रीडिंग छुपाने के लिए मीटर को किसी प्रकार खराब करना या आग लगाकर मोटे बिजली बिल से अब बचना आसान नहीं होगा। पीएसपीसीएल की मीटरिंग सर्कल लैब (एमई) में जिग तकनीक के जरिए जले-सड़े मीटर से मेमोरी निकल उपभोक्ता की ओर से खर्च किए गए बिजली यूनिटों की

सही डिटेल मात्र 15 मिनट में निकाली जाती है। पीएसपीसीएल ने इस नई तकनीक के जरिए पिछले डेढ़ साल (2020-21 व इस वर्तमान के 4 चार महीने 30 जुलाई तक) के भीतर 25 लाख 3 हजार 101 यूनिट की चोरी पकड़ी है। अब इन उपभोक्ताओं से 10 रुपए प्रति यूनिट जुर्माना वसूला जा रहा है। उदाहरण के तौर पर अगर 300 यूनिट चोरी पकड़ी जाती है तो 10 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से 3000 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा।

मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला या उपभोक्ता ने जलाया, जिग तकनीक से कुछ ही मिनटों में सामने आएगी हकीकत

जानकारी के मुताबिक उपभोक्ता की तरफ से जानबूझकर मीटर को या तो जलाया होता है या फिर मीटर की डिस्प्ले किसी तरह खराब किया जाता है। लैब अधिकारियों ने बताया कि मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला है या फिर उपभोक्ता ने खुद जलाया है, इसका आसानी से पता चल जाता है। प्रदेश में पीएसपीसीएल की 14 एमई लैब हैं। इन सभी में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जहां जले या मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट वाले मीटर आते हैं, ऐसे मीटरों की मेमोरी निकालकर स्मार्ट मीटर में चिप लगा दी जाती है, जो कुछ मिनट के बाद सारी डिटेल निकाल कर सामने रख देती है।

एमई लैब में जांच के बाद पता चलेगा सच: विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कुछ उपभोक्ता किसी मीटर रीडर या फिर बिजली के जानकार की मिलीभगत से मीटर स्पार्क कर देते हैं या फिर रीडिंग वाले डिस्प्ले को किसी चीज से तोड़ या खराब कर देते हैं। इससे बिजली बिल एवरेज आने लगता है, जबकि उपभोक्ता बिजली आम की तुलना में कई गुना ज्यादा खर्च करते हैं। जब विभाग के पास एवरेज बिल एक-दो बार बनकर जाता है तो विभागीय अधिकारी ऐसे मीटर को उतरवा कर एमई लैब में जांच के लिए मंगवाते हैं। यहां लैब में चेक करने के बाद असलियत सामने आती है।

उपभोक्ताओं को उपस्थित होने के लिए भेजा जाता नोटिस : लैब में टेस्टिंग के लिए भेजे गए मीटरों की जांच के लिए उपभोक्ताओं की उपस्थिति के लिए नोटिस भेजा जाता है। उपभोक्ताओं के एमई लैब नहीं पहुंचने की स्थिति में दो एसडीओ की कमेटी बनाकर उनकी उपस्थिति में मीटर की जांच होती है। जांच में यह खुलासा हो जाता है कि मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला या फिर उपभोक्ता ने जलाया। उपभोक्ता की ओर से जलाए जाने पर चोरी का केस बनता है। वहीं, पूरी जितनी यूनिट की चोरी पकड़ी जाती है 10 रुपए के हिसाब से जुर्माना वसूला जाता है।

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