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ऑक्सीजन की किल्लत:सिविल को चाहिए ऑक्सीजन, हर महीने सिविल अस्पताल में बाहर से खरीदनी पड़ रही 1 लाख की ऑक्सीजन

लुधियाना4 महीने पहले
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जिले के सरकारी हॉस्पिटल में कुल आठ ऑक्सीजन प्लांट, इनमें से 7 चल रहे - Money Bhaskar
जिले के सरकारी हॉस्पिटल में कुल आठ ऑक्सीजन प्लांट, इनमें से 7 चल रहे
  • मार्च से टेंडर के इंतजार में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट
  • जिले के सरकारी हॉस्पिटल में कुल आठ ऑक्सीजन प्लांट, इनमें से 7 चल रहे

सिविल हॉस्पिटल में स्थापित किए गए 10 केएलडी(किलोग्राम लीटर पर डे) के लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट की शुरुआत होने में अब तक इंतजार ही चल रहा है। सितंबर, 2021 में हॉस्पिटल में लिक्विड प्लांट लगाने की शुरुआत हुई थी। 10 किलोग्राम लीटर प्रति दिन की क्षमता वाले इस प्लांट को नवंबर, 2021 में लगा दिया गया था। मार्च में इसकी टेस्टिंग भी कर दी गई। लेकिन अब लिक्विड ऑक्सीजन न होने के कारण प्लांट शुरू नहीं हो सका है। इसका नतीजा ये है कि हॉस्पिटल में अब भी सिलेंडर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

सिविल हॉस्पिटल में अब भी हर महीने 350 से 400 सिलेंडर लिए जा रहे हैं। ऐसे में सिविल को अभी हर महीने लगभग 1 लाख रुपये ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए खर्चना पड़ रहा है। वहीं, राज्य सरकार द्वारा जारी 50 लाख के फंड से तैयार ये प्लांट इस्तेमाल में नहीं आ पा रहा है। सरकार द्वारा लिक्विड ऑक्सीजन का टेंडर दे दिया जाता तो प्लांट शुरू होने पर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन के लिए सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहना होगा। जिले के सरकारी हॉस्पिटल में कुल 8 ऑक्सीजन प्लांट हैं। इनमें सिविल हॉस्पिटल लुधियाना में 3 प्लांट हैं। जबकि ईएसआई हॉस्पिटल में पीएम केयर फंड के तहत 1000 एलपीएम(लिक्विड पर मिनट), यूसीएचसी(अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर) वर्धमान में राज्य सरकार द्वारा 500 एलपीएम, यूसीएचसी जवद्दी में 165 एलपीएम, सिविल हॉस्पिटल खन्ना में 300 एलपीएम, सिविल हॉस्पिटल रायकोट में 250 एलपीएम का पीएसए(प्रेशर स्विंग एड्जॉर्ब्शन) प्लांट स्थापित किया गया है।

सिविल में दो प्लांट चल रहे, अगर तीसरा भी चले तो अन्य सरकारी अस्पतालों में भी भेजी जा सकेगी ऑक्सीजन

सिविल हॉस्पिटल में तीन ऑक्सीजन प्लांट हैं। इनमें राज्य सरकार द्वारा 700 एलपीएम(लिक्विड पर मिनट) और पीएम केयर फंड के तहत 1000 एलपीएम का पीएसए प्लांट लगाया है। जोकि 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ही चलना शुरू हो गए थे। पीएसए प्लांट में प्राकृतिक ऑक्सीजन से ऑक्सीजन बदली जाती है। जबकि लिक्विड प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन से ऑक्सीजन तैयार की जाती है और आगे सप्लाई किया जाता है। पीएसए प्लांट में हवा का प्रैशर बनाना पड़ता है। जिसके मुताबिक ही ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। सिविल में तैयार लिक्विड प्लांट शुरू हो जाता है तो न सिर्फ 250 बैड वाले सिविल हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी बल्कि अन्य सरकारी हॉस्पिटल्स में भी सिलेंडर भर कर ऑक्सीजन पहुंचाई जा सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि बाहर से ऑक्सीजन नहीं खरीदनी पड़ेगी और किल्लत भी नहीं आएगी।

हॉस्पिटल को हैंडओवर लेने के लिए कह चुके

प्लांट की स्थापना के बाद मार्च में हम इसकी टेस्टिंग कर चुके हैं। हॉस्पिटल मैनेजमेंट को हमने हैंडओवर लेने के लिए कहा है। लिक्विड ऑक्सीजन का टेंडर सरकार द्वारा लगाया जाएगा तभी जानकारी होगी कि हॉस्पिटल को लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति कहां से होगी तभी इसे चालू किया जाएगा।
- गुरपिंदर संधू, एसडीओ

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