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राहत की खबर:सरिये के दाम घटे; गेट, ग्रिल, चौगाठें, अलमीरा में भी जेब ढीली नहीं होगी

जालंधर8 महीने पहलेलेखक: प्रवीण पर्व
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जालंधर में पहले सेकेंड सरिया 6400 रुपए क्विंटल था, जो अब 6250 रुपए के रेट पर आ गया है। - Money Bhaskar
जालंधर में पहले सेकेंड सरिया 6400 रुपए क्विंटल था, जो अब 6250 रुपए के रेट पर आ गया है।

घर बनाने वालों को बड़ी राहत मिली है। लोहे के दाम जनवरी से मई तक लगातार इतने बढ़े कि घर में छत में डालने वाला सरिया 8000 रुपए क्विंटल तक जा पहुंचा। इसके साथ ही गेट, ग्रिल, चौगाठें, एक्सेसरी, लोहे की अलमीरा आदि 15 से 25 फीसदी तक महंगे हो गए।

अब लोहा बनाने वाला आयरन और एक्सपोर्ट करने पर लगी 50 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी के बाद कंपनियों ने एक्सपोर्ट बंद करके लोकल मार्केट में सेल बढ़ाई है, जिससे दाम घटे हैं। लोहा पिघलाने वाला कोयला विदेश से मंगाने पर ड्यूटी फ्री होने से दूसरा लाभ हुआ क्योंकि लागत मूल्य कम हुआ है। ऐसे में जिन लोगों ने लागत मूल्य बढ़ने से घरों की कंस्ट्रक्शन रोक दी थी, अब वे दोबारा चालू कर सकेंगे।

कारखानों में इस्तेमाल होने वाले हर तरह के लोहे के दाम भी गिरे, और राहत हफ्ते भर में मिलेगी
जालंधर में पहले सेकेंड सरिया 6400 रुपए क्विंटल था, जो अब 6250 रुपए के रेट पर आ गया है। वैसे भी पिछले महीने भर से धीरे-धीरे रेट 100 रुपए क्विंटल तक गिरे थे। दूसरी तरफ प्राइमरी कैटेगरी का सरिया 7700 क्विंटल था, जो अब कम होकर 7100 रुपए पर आया है। इससे कितना लाभ होगा? इस बारे में इंजीनियर नवाजिश महाजन बताते हैं कि 10x10 का कमरा बनाने पर 80 किलो सरिया लगता है। पहले जहां 6160 रुपए लागत आती थी तो अब 5680 रुपए खर्च आएगा।

वहीं, गेट एंड ग्रिल मेन्यूफेक्चरर नरिंदर महे कहते हैं कि कीमतों में 15 से 20 फरीदी तक कमी आएगी। वजह, लोहे के दाम हफ्ते भर में और भी कम होंगे। घर बनाने में लोहे के तमाम मटीरियल इस्तेमाल होते हैं, सभी सस्ते होंगे। पांच मरले का एक घर बनाने वाले की लोहे की अलमारियां, सेनेटरी, वाश बेसिन आदि को मिलाकर कीमतों में गिरावट की बचत 50 हजार के करीब पहुंच जाएगी।

इंगट में प्रति टन 3200 रुपए तक आई गिरावट
दूसरी तरफ जालंधर की हैंडटूल, कास्टिंग इंडस्ट्री को भी राहत मिली है। जालंधर नाटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट संजीव जुनेजा कहते हैं - मंडी गोबिंदगढ़ से जालंधर आने वाले इंगट के रेट 3500 रुपए तक कमी आई है। इतनी ही गिरावट स्क्रैप के रेट में आई। जालंधर में रायपुर, राजस्थान, कोलकाता, भिवानी, मुजफ्फरनगर से इंगट आता है। इसके रेट प्रति टन 3000 से 3200 तक गिरे हैं। लोहे के रेट बेकाबू होने से फैक्ट्रियों का लागत मूल्य बढ़ा पर परचून रेट नहीं बढ़ रहे थे, इससे मुनाफे में कटौती हुई।

जिस कारण कई कारखानों ने टेंपरेरी तौर पर प्रोडक्शन कम की थी, अब वो फुल मोड पर चलेंगे। इससे श्रमिकों को काम मिलेगा। दूसरी तरफ मनीष कवात्रा ने कहा कि अभी व्यापारियों ने पुराने रेटों पर जो लोहा खरीद रखा था, वे उसके सारे दाम कम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अभी जितने रेट कम किए हैं, इसके बाद इंतजार करेंगे, फिर अगले चरण में रेट कम करेंगे। इसलिए अभी पूरी तरह से कीमतों में कमी आने में कुछ दिन लगेंगे।

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