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पनबस-रोडवेज बसों का चक्का जाम:2 माह का वेतन देने समेत अन्य मांगें पूरी न करने पर हड़ताल पर गए कर्मचारी

जालंधर4 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो

पंजाब में पनबस और रोडवेज बसों के पहियों को बुधवार दोपहर से ब्रेक लग गई। पनबस और रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने अपनी मांगे न माने जाने के विरोध में बसों का चक्का जाम कर दिया। कर्मचारियों में इस बात को लेकर रोष है कि महंगाई आसमान छूती जा रही है और उन्हें दो माह से वेतन तक नहीं दिया जा रहा। ऐसे में उनके लिए अपना घर चलाना मुश्किल हो गया है। वह बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे।

पनबस और रोडवेज कांट्रैक्ट यूनियन के प्रधान गुरप्रीत सिंह ने कहा कि उन्होंने विभाग को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि यदि 18 मई की दोपहर तक उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ और उनका वेतन जारी नहीं किया गया तो वह दोपहर बाद बसें खड़ी कर देंगे।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों और वर्तमान सरकार में कोई फर्क नहीं है। मौजूदा सीएम भगवंत मान चुनाव से पहले कहा करते थे कि कर्मचारियों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी लेकिन सत्ता में आते ही उन्होंने परेशानियां खड़ी करनी शुरू कर दी।

गुरप्रीत सिंह ने कहा कि अधिकारी सरकार के नियंत्रण में नहीं है। वे अपनी जेबें भरने के लिए कर्मचारियों को नाहक परेशान कर रहे हैं। पिछले दिनों लुधियाना में बस के ड्राइवर-कंडक्टर पर इसलिए कार्रवाई कर दी गई क्योंकि उन्होंने तय बस स्टाप से पहले सवारियों को उतार दिया था। इसी तरह मोगा में ड्राइवर-कंडक्टर को इसलिए हटा दिया गया क्योंकि बस की सवारियों ने शिकायत कर दी कि कंडक्टर ने बकाया नहीं वापस नहीं किया। कार्रवाई से पहले ऐसी शिकायतों की जांच की जानी चाहिए।

पनबस और रोडवेज कांट्रैक्ट यूनियन के प्रधान गुरप्रीत सिंह के अनुसार, इसी तरह और भी कई मांगें विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी गई थीं। जैसे बसों में फ्री यात्रा पर रोक लगाएं क्योंकि बसों में फ्री यात्रा वाले ही इतने लोग हो जाते हैं कि उन्हें टिकट वाले यात्री ढूंढ़ने पड़ते हैं। इससे ट्रांसपोर्ट को घाटा हो रहा है। हालात यह है कि बसों में डीजल डलवाने तक के पैसे विभाग के पास नहीं है। उधारी के खाते में तेल डलवाया जा रहा है।

यूनियन प्रधान ने कहा कि उनकी हड़ताल अनिश्चितकालीन है। जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, उनका दो माह का वेतन खाते में नहीं डलवाती, तब तक वह बसें नहीं चलाएंगे। उन्होंने कहा कि जो धरने प्रदर्शन पिछली सरकारों में होते थे वही अब नई सरकार में शुरू हो गए हैं। आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आकर वादाखिलाफी की है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले वादा किया था कि सभी को समान वेतन और छुट्टियां दी जाएंगी। ठेका प्रथा खत्म करके सीधी नियमित भर्ती की जाएगी। ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को सत्ता में आते ही रेगुलर किया जाएगा, लेकिन सच्चाई यह कि ये सरकार भी पुरानी पार्टियों के पद चिन्हों पर चल निकली है।

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