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पंजाब में रोडवेज यूनियनों ने हड़ताल वापस ली:रोडवेज-पनबस-PRTC नेताओं की 18 को CM के साथ बैठक होगी; एक दिन के चक्का जाम से जागी सरकार

जालंधर6 महीने पहले
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पंजाब में रोडवेज-पनबस और पीआरटीसी ठेका मुलाजिम यूनियन ने अपनी तीन दिन की हड़ताल रविवार शाम को वापस ले ली। यूनियन नेताओं ने सरकार की ओर से बातचीत का निमंत्रण मिलने के बाद हड़ताल को खत्म करने का ऐलान किया। मुलाजिम नेताओं की अब अपनी मांगों को लेकर 18 अगस्त को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक होगी। तब तक हड़ताल को टाल दिया गया है।

इसे पहले रविवार को रोडवेज-पनबस और पीआरटीसी ठेका मुलाजिम यूनियनों की हड़ताल की वजह से सूबे में इनकी एक भी बस नहीं चली। रोडवेज, पनबस और PRTC की बसें न चलने की वजह से लोग दिनभर परेशान होते रहे। इसके बाद शाम को सरकार जागी और तुरंत प्रभाव से यूनियन नेताओं को 18 अगस्त को बैठक के लिए न्यौता भेजा गया।

रोडवेज-पनबस और पीआरटीसी ठेका मुलाजिम यूनियन को मुख्यमंत्री कार्यालय के डिप्टी सेक्रेटरी ने बातचीत के लिए बुलावा भेजा। सरकार की तरफ से पत्र मिलने के बाद यूनियन ने राज्य के सभी 22 डिपो में हड़ताल टालने का ऐलान कर दिया।

सीएम आवास पर 1 बजे बैठक

मुख्यमंत्री के डिप्टी सेक्रेटरी की ओर से भेजे गए पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ 18 अगस्त को यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक तय की गई है। पत्र में बताया गया है कि यह बैठक दोपहर एक बजे मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर होगी।

सरकार की ओर से बातचीत का बुलावा आने के बाद यूनियन के प्रधान रेशम सिंह ने कहा कि फिलहाल हड़ताल को 18 अगस्त तक टाल दिया गया है। बैठक में देखा जाएगा कि उनकी मांगों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान क्या फैसला लेते हैं? मीटिंग में जो भी फैसला लिया जाएगा, उस पर यूनियन पदाधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा की जाएगी। उसके बाद सर्वसम्मति से आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री के कार्यालय से जारी हुई मीटिंग के लिए चिट्ठी
मुख्यमंत्री के कार्यालय से जारी हुई मीटिंग के लिए चिट्ठी

मुलाजिम रविवार से गए थे 3 दिन की हड़ताल पर

रोडवेज-पनबस और पीआरटीसी यूनियन के सभी ठेका कर्मचारी अपनी मांगें पूरी न होने की वजह से रविवार से तीन दिन की हड़ताल पर चले गए थे। इसकी वजह से पंजाब में रोडवेज के 18 और पीआरटीसी के 9 डिपो में तकरीबन 2200 बसों के पहिए दिनभर थमे रहे। इस हड़ताल की वजह से पनबस और रोडवेज की लग्जरी बसों में एडवांस बुकिंग का काम भी रुक गया।

यूनियन नेताओं का कहना था कि आम आदमी पार्टी की मौजूदा सरकार का मुलाजिमों की मांगों पर दोहरा रवैया सामने आ रहा है। एक तरफ सरकार कह रही है कि राज्य में ठेका प्रथा खत्म कर सीधी भर्ती की जाएगी और दूसरी तरफ ठेके पर बसें चलाने की तैयारी चल रही है। किलोमीटर स्कीम पर बसों को ठेके पर दिया जा रहा है।

मुफ्त यात्रा से ट्रांसपोर्ट को घाटा

मुलाजिम नेताओं ने कहा कि महिलाओं के लिए बसों में यात्रा मुफ्त किए जाने से ट्रांसपोर्ट महकमे को घाटा हो रहा है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि महिलाओं के लिए बस यात्रा पूरी तरह मुफ्त करने की बजाय उन्हें किराये में रियासत दी जाए। सरकार चाहे तो किराया 50% भी कर सकती है।

मुलाजिम नेताओं का कहना था कि ट्रांसपोर्ट विभाग के खाते में पैसे नहीं है। उधारी में सारा काम चल रहा है। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। हर बार वेतन के लिए उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ता है। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि वेतन के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया।

आम आदमी पार्टी ने वादे नहीं किए पूरे

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जो वादे किए थे, सत्ता में आने के बाद उन पर खरी नहीं उतर रही। सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार भी अन्य पार्टियों की तरह वादाखिलाफी पर उतर आई है। पूर्व की सरकारों और आम आदमी पार्टी की मौजूदा सरकार में कोई फर्क नहीं रह गया। सरकार की गलत नीतियों के कारण सरकार का कमाऊपूत ट्रांसपोर्ट निजीकरण का शिकार हो रहा है।