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टिकट बंटते ही जालंधर कांग्रेस में बगावत:आदमपुर से टिकट न मिलने पर केपी के बगावती सुर, भाजपा में जाने की तैयारी, ताड़तम्य बिठाया

जालंधर8 महीने पहले
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महेंद्र सिंह केपी और मुख्यमंत्री चन्नी की फाइल फोटो - Money Bhaskar
महेंद्र सिंह केपी और मुख्यमंत्री चन्नी की फाइल फोटो

अभी कांग्रेस की पहली सूची आई है। इसमें कई पुराने कांग्रेसियों के टिकट कटने पर उन्होंने बगावत का रास्ता चुन लिया है। इनमें अब एक नाम जालंधर से महेंद्र सिंह केपी का भी शामिल होने जा रहा है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के रिश्तेदार महेंद्र सिंह केपी अन्य बगावती कांग्रेसियों की तर्ज पर हाथ का साथ छोड़ कर भगवे की शरण में जा सकते हैं। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि उन्होंने भाजपा में जाने के लिए वहां से आदमपुर सीट के लिए टिकट का पूरा जुगाड़ भी बिठा लिया है। पता चला है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का सहारा लेकर भाजपा में एंट्री करने जा रहे हैं और उन्हीं की बदौलत टिकट भी हासिल करना चाहते हैं।

महेंद्र सिंह केपी पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की टिकट पर आदमपुर विधानसभा क्षेत्र में खड़े हुए थे लेकिन इलेक्शन हार गए थे। उन्हें बसपाई से अकाली बने पवन कुमार टीनू ने हराया था। जब अब कुछ समय के लिए उनके रिश्तेदार चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के मुख्यमंत्री बने तो वह जालंधर में आदमपुर, डेरा बल्लां इत्यादि में उनके दौरों के दौरान साथ रहे।

मुख्यमंत्री चन्नी ने अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान अंतिम समय में इस क्षेत्र के कई दौरे किए और कई सौगातें इस क्षेत्र को दी। इससे राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चाएं चल निकली थी कि इस बार मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब के साथ-साख आदमपुर की सीट पर चुनाव लड़ेंगे। इसलिए ही वह बार-बार यहां के दौरे आ घोषणाएं करके अपनी जमीन तैयार कर रहे थे।

लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने अपनी पहली ही सूची में सभी क्यासों, अफवाहों चर्चाओं पर विराम लगाते हुए न टिकट मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को दिया न ही दौरों के दौरान साथ रहने वाले उनके रिश्तेदार महेंद्र सिंह केपी को दिया। बल्कि एसे शख्स सुखविंदर सिंह कोटली को दिया जो अभी पिछले महीने ही बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस में दाखिल हुआ था।

चन्नी चाहते थे आदमपुर से टिकट सिद्धू वेस्ट से

महेंद्र सिंह केपी की टिकट को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू का अपना-अपना मत था। सिद्धू चाहते थे कि महेंद्र सिंह केपी जालंधर से वेस्ट से चुनाव लड़ें जबकि केपी के रिश्तेदार मुख्यमंत्री चन्नी चाहते थे कि उन्हें आदमपुर रिजर्व सीट से टिकट दिया जाए। सिद्धू चाहते थे कि वेस्ट के मौजूदा विधायक सुशील रिंकू को आदमपुर की सीट से इस बार चुनाव लड़वाया जाए। इसके पीछे उनकी राजनीतिक भी थी। वह रिंकू की सीट इस लिए बदलवाना चाहते थे क्योंकि जालंधर में यदि उनका कोई विऱोधी है को वह सुशील रिंकू ही है। सिद्धू जब स्थानीय निकाय मंत्री थे और उन्होंने जालंधर में डिच चलवाई थी तो रिंकू ही थे जो आगे आकर खड़े हो गए थे। उन्होंने सिद्धू का जबरदस्त तरीके से विरोध किया था। लेकिन यहां पर हाईकमान न सिद्धू की सुनी और न ही चन्नी की सुनी। दोनों को साइड लाइन करते हुए बसपा से आए सुखविंदर को टिकट दे दी। हालांकि विरोधी अंदरखाते कमजोर प्रत्याशी देने का शोर मचा रहे हैं। लेकिन टाप लीडरशिप का मानना है कि मुख्यमंत्री चन्नी ने जो अंतिम समय में क्षेत्र में काम किए हैं उनका फायदा कांग्रेस को मिलेगा।

केपी को मनाने उनके घर पहुंचे राज कुमार वेरका
आदमपुर रिजर्व सीट से कांग्रेस की टिकट न मिलने पर नाराज चल रहे पूर्व सांसद महेंद्र सिंह केपी को मनाने के लिए अमृतसर से विधायक और कैबिनेट मंत्री डॉक्टर राज कुमार वेरका महेंद्र सिंह केपी के घर पहुंच गए हैं। विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रकार के डैमेज से बचने के लिए देर शाम केपी के घर पहुंचे राज कुमार वेरका की ड्यूटी हाईकमान ने लगाई है। वेरका को हाईकमान किसी भी तरीके से केपी को मनाने के लिए कहा है। राज कुमार वेरका की पूर्व सांसद महेंद्र सिंह केपी के साथ उनके घर पर मीटिंग चल रही है । राज कुमार वेरका के आग्रह पर महेंद्र सिंह केपी मानते हैं जो नहीं मानते यह मीटिंग के बाद ही पता चल पाएगा।