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कंज्यूमर फोरम ने बैंक पर लगाया जुर्माना:लोन की किश्त काटने में खुद देरी करके पैनल्टी भी काटी, एक साल बाद लौटाने को सेवा में कमी माना

जालंधरएक महीने पहले
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लोन की किश्त काटने में देरी के बावजूद सिटी यूनियन बैंक ने कस्टमर के बैंक खाते से पैनल्टी भी काट ली। हालांकि जब कस्टमर ने विरोध जताया तो उसे रुपए लौटा दिए। लेकिन इसमें एक साल की देरी करने को जालंधर की कंज्यूमर फोरम ने सेवा में कमी माना और सिटी यूनियन बैंक को डेढ़ हजार जुर्माना लगा दिया। इसमें 500 रुपए केस खर्च भी शामिल है। फोरम ने बैंक को जुर्माने की अदायगी करने के लिए 45 दिन का वक्त दिया है, वरना 6% ब्याज समेत रकम चुकानी होगी।

जालंधर के मॉडल हाउस राजपूत नगर में रहने वाले सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने सिटी यूनियन बैंक से प्रॉपर्टी गिरवी रखकर लोन लिया था। इसकी मासिक किश्त 15,778 रुपए थी। पहली किश्त 20 सितंबर 2018 को काटी जानी थी। इस बारे में उन्होंने बार-बार बैंक को भी कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि सिस्टम के जरिए खुद ही लोन की किश्त कट जाएगी। दो महीने ऐसे ही बीत गए।

तीसरे महीने काटी 3 किश्तें, दो बार काटी पैनल्टी

20 नवंबर 2018 को उनके खाते से 16-16 हजार की तीन किश्तें काट ली गईं। इसके बाद उनके खाते से पहले 1,500 रुपए और फिर 1,326 रुपए भी काट लिए गए। उन्होंने इसका एतराज भी जताया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

कस्टमर ने सेविंग अकाउंट को हिदायत नहीं दी थी

फोरम के नोटिस पर बैंक ने कहा कि कस्टमर ने अपने सेविंग बैंक अकाउंट को ऐसी कोई हिदायत नहीं दी थी कि उनके खाते से लोन अकाउंट में रुपए कट जाएं। इस वजह से लोन की किश्त में देरी हुई। हालांकि बाद में बैंक ने यह रकम उनको वापस लौटा दी थी।

विवादित अमाउंट लौटाई, लेकिन बैंक ने देरी की

फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि जिस अमाउंट को लेकर झगड़ा है, वह शिकायत दाखिल करने से पहले ही कस्टमर के खाते में वापस ट्रांसफर की जा चुकी है। हालांकि रकम 5 नवंबर 2019 को वापस की गई, मतलब बैंक ने इसके लिए एक साल का समय लिया। इस आधार पर बैंक की सेवा में कुछ कमी साबित होती है। इसलिए बैंक को कस्टमर को डेढ़ हजार का जुर्माना देना होगा।

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