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दरिंदगी:3 महीने मजदूरी करवाई, पैसे मांगने पर पहले डंडों से पीटा, फिर पैर में घुसाई नुकीली चीज

होशियारपुरएक महीने पहले
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गढ़दीवाला की संस्था पीड़ित को रेस्क्यू करती हुई।-भास्कर - Money Bhaskar
गढ़दीवाला की संस्था पीड़ित को रेस्क्यू करती हुई।-भास्कर

परिवार का पेट पालने के लिए मेरठ से पंजाब आए एक मजदूर को दो वक्त की रोटी इतनी भारी पड़ गई कि उसका पैरों पर खड़ा होना भी मुश्किल हो गया। मेहनताना मांगने पर उसके पैर में कील ठोक दिया गया। 18 दिन इसी हालात में वह गुज्जरों के डेरे पर बंधक रहा और किसी तरह वहां से निकल आया। पैर में कील लगी होने के कारण वह चल नहीं पा रहा था तो हाथों के बल घिसटते हुए किसी तरह टांडा के गांव जहूरा में गुज्जरों के

डेरे से आ गया। सड़क पर आकर किसी ने उसे देखा तो बस में बिठा दिया और उसकी टिकट भी खर्च की। सरमस्तपुर पहुंचा तो किसी ने उसे घिसटते हुए देखा तो गढ़दीवाला की समाज सेवी संस्था को काॅल कर दी। संस्था के सदस्य अलावलपुर के नजदीक सरमस्तपुर पहुंचे और मजदूर को पहले काला बकरा के सरकारी अस्पताल और फिर वहां से टांडा के प्राइवेट अस्पताल में ले गए।

कील नहीं, पहले से हुआ है ऑपरेशन
टांडा के बेबज अस्पताल के डॉ. लवप्रीत ने बताया कि मरीज को घायलावस्था में लाया गया था। पैर में कील घुंसे होने की बात पर उन्होंने कहा कि मरीज का पहले से ऑपरेशन हुआ है। एक्स-रे में ये कील नहीं लगते।

किसी ने बस में बैठा सरमस्तपुर पहुंचाया

काली नगर, सिकंदरपुर, मेरठ (यूपी) के रहने वाले पिंटू ने बताया कि 4 महीने पहले किशनगढ़ के नजदीक सरमस्तपुर गांव में काम करता था। इस दौरान टांडा के नजदीकी गांव जहूरा का एक गुज्जर उसे 8 हजार रुपए प्रतिमाह देने की बात कह अपने साथ काम के लिए ले गया। पिंटू ने बताया कि गांव के बाहर ही स्थित डेरे पर उसने चार महीने काम किया, लेकिन कोई पैसा नहीं दिया गया। 25 दिन पहले उसने पैसे गुज्जर परिवार से पैसे

मांगे, लेकिन पैसे नहीं मिले। उसने गुज्जर को बताया कि उसके परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया है। परिवार को पैसे भेजने हैं। इस पर उसे डंडों से पीटा गया और फिर पांव में 5 कीलें ठोक दीं, जो कि आरपार हो गईं। 18 दिन पीड़ा सहने के बाद किसी तरह 6 दिन पहले डेरे से निकल आया। रास्ते में भीख मांगी तो एक पगड़ीधारी व्यक्ति मिला, जिसने किराया देकर बस में बैठाया और मैं हाईवे स्थित सरमस्तपुर गांव के नजदीक गुरुद्वारा साहिब पहुंच गया। बुधवार की देर रात किसी ने उसे सड़क पर हाथों के बल रेंगते और कराहते हुए देखा तो गढ़दीवाला की संस्था को सूचना दी।

पहले सरकारी, फिर प्राइवेट अस्पताल में करवाया भर्ती
गढ़दीवाला की संस्था बाबा दीप सिंह सेवा दल के मुख्य सेवादार मनजोत सिंह तलवंडी ने बताया कि सूचना पर वे और संस्था के सदस्य पिंटू को राहत देने के लिए रवाना हो गए। एंबुलेंस में वे पहले सरकारी अस्पताल और फिर टांडा के प्राइवेट अस्पताल में पहुंचे, ताकि पैरों में लगी कीलें निकालकर पिंटू को इस असहनीय दर्द से राहत दिलाई जा सके। फिलहाल यहां पिंटू का इलाज किया जा रहा है। उन्हें मेडिकल िरपोर्टों का इंतजार है।

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