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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:जंग से लड़ रहे उपकरण, आग बुझाने को बिछाई पाइप में लीकेज से लो प्रेशर, सप्लाई लाइन के ज्वाइंट हो चुके चोरी

होशियारपुरएक महीने पहलेलेखक: योगेश कौशल
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जंग से खस्ताहालत में आग बुझाने वाली पानी की पाइपों के लीवर। - Money Bhaskar
जंग से खस्ताहालत में आग बुझाने वाली पानी की पाइपों के लीवर।

2004 में बने मिनी सचिवालय में डीसी, एसएसपी, शिक्षा विभाग व अन्य कई सरकारी विभागों के दफ्तर हैं। इस इमारत में आग बुझाने के उपकरण जंग खा रहे हैं। न ही फायर विभाग की इमारत को एनओसी जारी है। 2018 में इस इमारत की चौथी मंजिल में आग लगने पर फायर उपकरण चलाने पर पानी का प्रैशर ही नहीं बना था। उस समय की डीसी अपनीत रियात ने आग बुझाने वाले उपकरणों को ठीक करवाने के लिए कमेटी बनाई थी, जिसमें वाटर सप्लाई विभाग, फायर विभाग व अन्य मेंबर थे।

सारे उपकरण चेक करने पर फायर विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि इमारत में बिछाई पाइप लाइन में दिक्कते हैं, जिससे पानी की पूरा प्रैशर नहीं बन रहा। तब से यह काम अधर में ही लटका है। पानी की पाइपों के आगे से पीतल के ज्वाइंट चोरी हो चुके हैं। वहीं, डीसी कार्यालय में तैनात अधिकारी अश्विनी कुमार (नाजर) ने कहा कि इसका सारा काम वाटर सप्लाई विभाग को सौंप दिया है। सब जगह पानी के कनेक्शन चालू करवा दिए हैं, पर पानी का सही प्रेशर न बनने से फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह काम नहीं कर रहा। वाटर सप्लाई विभाग को नोटिस जारी किया है।

2004 में बने सचिवालय में हैं डीसी, एसएसपी, शिक्षा विभाग समेत अन्य कई सरकारी दफ्तर

पानी की लाइन में लीकेज से नहीं दी एनओसी : फायर सेफ्टी अफसर
उधर, फायर सेफ्टी विभाग के अधिकारी सेवाज सिंह बल का कहना है कि कुछ समय पहले तत्कालीन डीसी रियात ने फायर सेफ्टी प्रोजेक्ट को चालू हालत में करने के लिए कहा था। जांच में सामने आया था कि वाटर सप्लाई विभाग ने मोटरों और कुछ उपकरणों की मरम्मत करवा दी थी पर कई जगह पानी की लीकेज थी, जिससे पानी का प्रैशर नहीं बनता। इसलिए हमारे विभाग ने इस काम की एनओसी नहीं जारी की।

मेन पंप से नई पाइपलाइन बिछाने के लिए डीसी दफ्तर में कहा गया था : जेई
वाटर सप्लाई के जेई गुरप्रीत सिंह ने कहा कि 2004 में बनी इमारत में पानी के लिए 3 लाख लीटर के 3 पाउंड बनाए गए हैं जिससे इमारत में पीने के पानी, सीवरेज और आग पर काबू पाने के लिए भी पानी उपलब्ध होता है। चुनाव से पहले उस समय की डीसी रियात ने इस फायर उपकरणों को चालू करवाने के लिए हमारे विभाग को जिम्मेदारी दी थी, जिस पर इसे चालू करवा दिया, जिसकी लागत 9 लाख बनती थी। हमें आधी रकम ही मिली। पानी का प्रैशर कम होने से समस्या आ रही है। इसके लिए डीसी कार्यालय को बताया है कि मेन पंप से एक नई पाइपलाइन बिछाई जाए तो इस समस्या का हल हो सकती है।

जल्द टेक्निकल व संबंधित विभाग से समस्या हल करवाएंगे : डीसी
उधर, मामले को लेकर डीसी संदीप हंस से बात की तो उनका कहना था कि इस संबंधी आप के माध्यम से पता चला है कि मिनी सचिवालय में फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है। वह जल्द टेक्निकल व संबंधित विभाग से मीटिंग कर समस्या का समाधान करवा देंगे। क्योंकि, मिनी सचिवालय में बहुत से प्रशासनिक विभाग हैं। ऐसी अगर कोई अप्रिय घटना घटती है तो रिकार्ड का काफी नुकसान हो सकता है। इस समस्या को जल्द हल करवा लिया जाएगा।

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