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होशियारपुर:रोडवेज कर्मियों की हड़ताल से 122 बसों के पहिए थमे महिलाओं को पैसे खर्च कर प्राइवेट में करना पड़ा सफर

होशियारपुरएक महीने पहले
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प्रदेश में सरकारी बसों के चक्का जाम ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। बुधवार से रोडवेज के कान्ट्रैक्ट कर्मचारी हड़ताल पर गए थे। वीरवार को पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) के कान्ट्रैक्ट कर्मचारी भी सुबह 10 बजे से इस हड़ताल में शामिल हो गए। हालांकि, बुधवार को ही हड़ताली कर्मचारियों का वेतन जारी कर दिया गया था, बावजूद इसके वीरवार को भी कांट्रैक्ट कर्मचारियों द्वारा हड़ताल खत्म नहीं की गई है।

हड़ताल पर बैठे कान्ट्रैक्ट कर्मचारी अब मोगा डिपो का ड्यूटी रोस्टर चंडीगढ़ की बजाय मोगा को ही वापस करने एवं चंडीगढ़ डिपो के फारिग किए गए दो कर्मचारियों को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। कान्ट्रैक्ट कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने की वजह से पंजाब रोडवेज की तरफ से अपने पक्के मुलाजिमों के साथ कुछ एक बसों को ही रूट पर भेजा गया है। पंजाब रोडवेज होशियारपुर डिपो से नियमित बस चालकों के जरिए कुछ चुनिंदा लाभकारी रूट पर ही बसों को भेजी जा सकी है।

कांट्रैक्ट वर्कर बोले-मांगों का हल होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा
पंजाब रोडवेज वर्कशॉप के बाहर धरने पर बैठे पंजाब रोडवेज पनबस ठेका मुलाजिम यूनियन होशियारपुर डिपो के प्रधान रमिंदर कंबोज और सचिव नरिदर सिंह ने बताया कि रोडवेज की गलत नीतियों के चलते ठेका मुलाजिमों को हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा है। राम कुमार, चरनजीत सिंह, नरिदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, कशनिदर सिंह और जस्सा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट विभाग के पास कर्मचारियों को वेतन देने, बसों में तेल डलवाने के लिए पैसे और टिकट मशीन में डालने के लिए पर्ची नहीं है। रोडवेज डिपो भगवान सहारे ही चल रहे हैं। अब जब तक वर्करों की समस्या का कोई हल नही निकल जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

वर्कशॉप में खड़ी रही सरकारी बसें
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से होशियारपुर डिपो के अधीन चलने वाले 122 रोडवेज पनबस बसें नियमित तौर पर नहीं चली। कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने पनबस की बसों को वर्कशॉप व बस स्टैंड के बाहर बसों की लंबी कतारें लगा दी। हड़ताल खत्म न हुई तो राज्य सरकार को रोजाना 10 से 11 लाख का नुकसान होगा।

हड़ताल से निजी व अन्य राज्यों की बसों को फायदा
पंजाब रोडवेज एवं पीआरटीसी बसों का चक्का जाम होने से निजी व अन्य राज्यों की बसें चांदी कूट रही हैं। यात्री मात्र निजी बसों में और इंटर स्टेट रूटों पर अन्य राज्यों की बसों में सफर करने को मजबूर रहे। सरकारी बसों के नहीं चलने से महिलाओं को मुफ्त सफर का फायदा नहीं मिला। रोडवेज के कई एेसे रूट जहां निजी बसें नहीं जाया करती है। वहा लोगों को काफी परेशानी हुई। पास होल्डर यात्रियों को पैसे देकर सफर करना पड़ा।​​​​​​​

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