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आक्रोश:30 में से सिर्फ 3 बसें फिरोजपुर रूट पर चलीं, 90% नहीं चलीं, 2 दिन में 5 लाख रुपए का हुआ नुकसान

फाजिल्काएक महीने पहले
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मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी। - Money Bhaskar
मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी।

पंजाब रोडवेज पनबस वर्कर यूनियन ने प्रदेश कमेटी के आह्वान पर वीरवार को भी अनिश्चितकाल हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल के चलते पनबस की 30 बसों में से 27 बसें रोडवेज डिपो पर खड़ी हो गई हैं। इस दौरान सब डिपो फाजिल्का की 30 में से 27 बसों (90%) का पहिया जाम रहा, जबकि केवल 3 बसें ही चलीं, वो भी फिरोजपुर रूट पर, जिस कारण सवारियों को कई-कई घंटे बसों का इंतजार करना पड़ा।

इसके अलावा कई लोगों को निजी वाहनों और रेलमार्ग का सहारा लेना पड़ा। हड़ताल के चलते लंबे रूट यानी यमुनानगर, माता चिंतपूर्णी, जालंधर, चंडीगढ़, गंगानगर, सिरसा, हनुमानगढ़ आदि रूट की बसें भी हड़ताल के चलते बंद रहीं। इस कारण पंजाब रोडवेज व पनबस को दो दिन में 5 लाख रुपए का नुकसान हो चुका है।

रोडवेज डिपो पर सन्नाटा, प्राइवेट बसों की रही चांदी
हड़ताल के कारण जहां यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं इसका सीधे तौर पर प्राइवेट बस ऑपरेटरों व प्राइवेट वाहन चालकों को लाभ हुआ। सरकारी बस न होने के कारण काउंटर पर लगते ही तीन-चार मिनट में प्राइवेट बस भर जाती थी। दिन भर प्राइवेट बस ऑपरेटरों को यात्रियों के लिए ज्यादा परेशानी नहीं हुई। वहीं, रोडवेज के सभी डिपो पर सन्नाटा पसरा रहा तथा सरकारी बसों का संचालन ठप रहा।

लोग होते रहे परेशान
बस स्टैंड पर खड़े सुरिंदर सिंह व उसकी पत्नी बलजीत कौर ने बताया कि वह मोगा जाने के लिए सरकारी बस का इंतजार कर रहे थे, क्याेंकि उसमें पत्नी की टिकट नहीं लगेगी, लेकिन राेडवेज की हड़ताल चल रही है। इसी तरह, कुलवंत काैर ने बताया कि वह बठिंडा जाने से लिए सरकारी बस का इंतजार कर रही थी, लेकिन हड़ताल की वजह से प्राइवेट बस में जाना पड़ेगा। एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि सरकारी बसों के नहीं चलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि निजी बस वाले उन्हें उस जगह पर उतारने से इंकार कर रहे हैं, जिस जगह उन्हें जाना था।

यूनियन के अध्यक्ष मनप्रीत सिंह का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा पहले वादा किया गया था कि उनकी सरकार बनते ही कच्चे कर्मियों को रेगुलर किया जाएगा, लेकिन मौजूदा सरकार भी पिछली सरकार की तरह कच्चे कर्मियों को रेगुलर करने के लिए टालमटोल की नीति अपना रही है।

सरकार द्वारा कर्मचारियों को बराबर काम बराबर वेतन देने की जगह कर्मचारियों के बनते वेतन भी जारी न करके उन्हें परेशान किया जा रहा है, जबकि पंजाब रोडवेज जब से बना है, तब से ड‌्यूटी का रोटा पंजाब रोडवेज डिपाे में ड‌्यूटी सेक्शन द्वारा ही लगाया जाता है, लेकिन अब यह डयूटी का रोटा चंडीगढ़ हैड ऑफिस से बनाकर जानबूझकर उसमें फेरबदल कर कर्मचारियों के साथ धक्केशाही की जा रही है।

सरकार द्वारा कच्चे व पक्के कर्मचारियों में भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार कच्चे कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार त्यागकर चुनावी वादे अनुसार कच्चे कर्मियों को रेगुलर करे, जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

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