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दरिंदगी की इंतेहा:मेरठ से पंजाब कमाने आए मजदूर को मेहताना मांगना पड़ा मंहगा, पैरों में ठोकी कील

अलावलपुरएक महीने पहले
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पैर में घुसी हुई कील। - Money Bhaskar
पैर में घुसी हुई कील।

परिवार का पेट पालने के लिए मेरठ से पंजाब आए एक मजदूर को दो वक्त की रोटी इतनी भारी पड़ गई कि उसका पैरों पर खड़ा होना भी मुश्किल हो गया। मेहनताना मांगने पर उसके पैर में कील ठोक दिया गया। 18 दिन इसी हालात में वह गुज्जरों के डेरे पर बंधक रहा और किसी तरह वहां से निकल आया। पैर में कील लगी होने के कारण वह चल नहीं पा रहा था तो हाथों के बल घिसटते हुए किसी तरह टांडा के गांव जहूरा में गुज्जरों के डेरे से आ गया।

सड़क पर पहुंचा तो किसी ने उसे देखकर बस में बिठा दिया और उसकी टिकट भी खर्च की। इसके बाद सरमस्तपुर पहुंचा तो किसी ने उसे घिसटते हुए देखा तो गढ़दीवाला की समाज सेवी संस्था को काॅल कर दी। संस्था के सदस्य अलावलपुर के नजदीक सरमस्तपुर पहुंचे और मजदूर को पहले काला बकरा के सरकारी अस्पताल और फिर वहां से टांडा के प्राइवेट अस्पताल में ले गए।

घिसटते देखा तो पगड़ीधारी व्यक्ति ने टिकट दिलवा बस में बिठाया

काली नगर, सिकंदरपुर, मेरठ (यूपी) के रहने वाले पिंटू ने बताया कि 4 महीने पहले किशनगढ़ के नजदीक सरमस्तपुर गांव में काम करता था। इस दौरान टांडा के गांव जहूरा का एक गुज्जर उसे 8 हजार रुपए प्रतिमाह देने की बात कह अपने साथ काम के लिए ले गया। उसने 4 महीने काम किया, लेकिन कोई पैसा नहीं मिला। 25 दिन पहले उसने गुज्जर को बताया कि परिवार को पैसे भेजने हैं।

इस पर उसे डंडों से पीटा गया और फिर पांव में 5 कीलें ठोक दीं, जोकि आरपार हो गईं। 18 दिन दर्द सहने के बाद 6 दिन पहले डेरे से निकल आया। रास्ते में पगड़ीधारी व्यक्ति मिला, जिसने किराया देकर बस में बिठाया तो बुधवार रात सरमस्तपुर पहुंच गया। गुरुद्वारा साहिब के पास किसी ने उसे सड़क पर हाथों के बल रेंगते और कराहते देखा तो गढ़दीवाला की संस्था को सूचना दी।

संस्था के सदस्य रात करीब 9:30 बजे एंबुलेंस लेकर सरमस्तपुर पहुंच गए। इसके बाद उसे काला बकरा अस्पताल ले गए, जहां डाॅक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। इसके बाद संस्था के सदस्य उसे टांडा के प्राइवेट अस्पताल में ले गए।

संस्था के सदस्य युवक को ले गए अस्पताल
गढ़दीवाला की संस्था बाबा दीप सिंह सेवा दल के मुख्य सेवादार मनजोत सिंह तलवंडी ने बताया कि पिंटू को पहले वे सरकारी अस्पताल और फिर टांडा के प्राइवेट अस्पताल में ले गए, ताकि पैरों में लगी कीलें निकालकर पिंटू को इस असहनीय दर्द से राहत दिलाई जा सके।

कील नहीं, पहले से हुआ है ऑपरेशन : डॉ. लवप्रीत
टांडा के वेव्ज अस्पताल के डॉ. लवप्रीत ने बताया कि मरीज को घायलावस्था में लाया गया था। पैर में कील घुसे होने की बात पर उन्होंने कहा कि मरीज का पहले से ऑपरेशन हुआ है। फिलहाल एक्स-रे में यह कील नहीं लग रहे।

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