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डेंगू के लिए जिम्मेदार कौन:नगर निगम और सिविल सर्जन को एडवोकेट ने भेजा नोटिस, आरोप- ड्यूटी को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई

अमृतसरएक वर्ष पहले
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एडवोकेट विश्व लूथरा भेजे गए नोटिस के बारे में बताते हुए। - Money Bhaskar
एडवोकेट विश्व लूथरा भेजे गए नोटिस के बारे में बताते हुए।

पहले कोरोना और फिर डेंगू ने लोगों को अपनी चपेट में लिया। अमृतसर में डेंगू मरीजों के सरकारी आंकड़े 1500 से ऊपर नहीं गए। लेकिन शहर के हर दूसरे घर में डेंगू का मरीज था। इनमें से कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने डेंगू का फैलाव होने से पहले ही नगर निगम और सेहत विभाग को सचेत किया था। इसके बावजूद दोनों विभागों ने संजीदगी दिखाने देरी कर दी। डेंगू के दर्द से गुजर चुके वकील ने अब दोनों विभागों के पदाधिकारियों को नोटिस भेजकर 60 दिन में जवाब मांग लिया है।

खजाना गेट स्थित शहीद उधम सिंह नगर वार्ड 68 निवासी एडवोकेट विश्व लूथरा पिछले माह अक्टूबर में डेंगू से बीमार हो गए थे। करीब दो सप्ताह तक उन्हें इस बीमारी से जूझना पड़ा था। लेकिन शहर में डेंगू के इतना अधिक फैलने के जिम्मेदार सिर्फ दो ही विभाग थे, जिन्हें समय पर फॉगिंग करनी चाहिए थी। विश्व लूथरा ने जानकारी दी कि उन्होंने भी बीमार होने से पहले दोनों विभागों को खजाना गेट व आसपास की स्थिति के बारे में अवगत करवाया था। लेकिन दोनों विभागों ने सिर्फ खानापूर्ति की। अब जब पूरा शहर इसकी चपेट में आ गया तो दोनों विभागों को फॉगिंग की याद आई। ऐसे में दोनों विभागों में से गलती किसकी है, अगर दोनों विभागों की गलती है तो दोनों विभागों को इसके लिए जवाब देना चाहिए।

दोनों विभागों को भेजा गया नोटिस।
दोनों विभागों को भेजा गया नोटिस।

दोनों विभागों को दी थी शिकायत

एडवोकेट विश्व लूथरा ने बताया कि सितंबर में जब डेंगू अपने शुरुआती दौर में था तो खजाना गेट के पास बंगाली बस्ती में हर घर में मरीज थे। उन्होंने लोगों को जागरुक करने के मकसद से सिविल सर्जन से संपर्क किया। लेकिन उन्होंने उन्हें पैनडेमिक कंट्रोल अफसर के पास भेज दिया। उन्होंने खानापूर्ति के लिए बाहर-बाहर स्प्रे करवाया, वह भी अच्छी तरह से नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने नगर निगम अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब न आया। यही कारण है कि उन्होंने दोनों विभागों को नोटिस भिजवाया है।

60 दिनों में देना होगा जवाब

एडवोकेट विश्व लूथरा ने बताया कि उन्होंने यह नोटिस अपने दोस्त एडवोकेट अर्शजीत सिंह सोढी के जरिए भेजा है। यह एक सिविल नोटिस है, जिसके चलते विभागों को अगले 60 दिन में इसका जवाब देना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मामला कोर्ट में जाएगा, जहां दोनों विभागों को जवाब देना होगा। यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि आने वाले सालों में दोनों विभाग समय से पहले सचेत रहना सीखें और लोगों को इसका खामियाजा न भुगतना पड़े।

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