पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Business News
  • Local
  • Mp
  • Ujjain
  • This Is How Mahakal's Prasad Is Prepared Read The Whole Process For The First Time Only In Dainik Bhaskar

देश के पहले फाइव स्टार हाइजीन वाले लड्‌डू की REPORT:महाकाल प्रसाद की शुद्धता; रसोई में दो एयर कटर और इंसेक्ट लाइट किलर लगे हैं ताकि एक भी कीड़ा अंदर न जाए

उज्जैन/शैलेष दीक्षितएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

उज्जैन में महाकाल का प्रसाद लड्‌डू खास है। लड्‌डू को फाइव स्टार हाइजीन रेटिंग दिया गया है। हर दिन 50 क्विंटल तक लड्‌डू तैयार किए जाते हैं। महाकाल मंदिर हाइजिन में फाइव स्टार रेटिंग पाने वाला देश का पहला मंदिर यूं ही नहीं बना है। इसके लिए 50 से ज्यादा लोग लगातार 10 घंटे काम करते हैं। लड्‌डू बनाने से लेकर पैकिंग तक सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। फूड सेफ्टी ऑफिसर बसंत दत्त शर्मा बताते हैं, एक किलो लड्‌डू तैयार करने में लगभग 260 रुपए का खर्च होता है। इसी कीमत पर हम श्रद्धालुओं को लड्‌डू प्रसाद उपलब्ध कराते हैं। इसमें हम किसी तरह का लाभ नहीं कमाते न ही किसी तरह का नुकसान वहन करते हैं।

महाकाल मंदिर से करीब 7 किमी दूर चिंतामण गणेश मंदिर के नजदीक लड्‌डू तैयार किए जाते हैं। यहां प्रवेश द्वार पर दो एयर कटर लगे हैं। इनके कारण 90 प्रतिशत मक्खियां और अन्य इंसेक्ट्स बाहर ही रह जाते हैं। प्रवेश द्वार के अंदर इंसेक्ट लाइट किलर लगे हैं, ताकि किसी तरह से अंदर आ चुके मक्खी-मच्छर को यहीं खत्म किया जा सके।

चूहों को पकड़ने के लिए रेट किलर पैड रखे गए हैं। यहां लगातार झाड़ू-पोंछा लगाकर सफाई की जाती है। प्रत्येक कर्मचारी मास्क और सिर पर कैप लगाकर रखते हैं। इतना ही नहीं हर कर्मचारी को बॉडी टेम्प्रेचर चेक किए बगैर अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। प्रवेश के पहले लिक्विड सोप से हाथ धोने के बाद सैनिटाइज किया जाता है। मॉनीटरिंग के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे हैं। सभी काम की मॉनीटरिंग महाकाल मंदिर स्थित कंट्रोल रूम से की जाती है। फूड इंस्पेक्टर अचानक कभी भी प्रसाद को चेक करता है।

आइए देखिये और समझिये कि देश के पहले फाइव स्टार हाइजिन रेटिंग वाले मंदिर में कैसे तैयार होते हैं सबसे शुद्ध लड्‌डू
पहला स्टेप - खरीदी
खरीदी की पूरी प्रक्रिया टेंडर के माध्यम से होती है। देसी घी, ड्रायफ्रूट, चने की दाल, रवा की खरीदी की जाती है। खरीदी गई सभी सामग्री की जांच करते हैं। यह काम खाद्य विभाग की टीम करती है। जरा भी कमी होने पर उसे विक्रेता को लौटा दिया जाता है। बेसन के लिए चने की सूखी दाल खरीदी जाती है। उसे छान और बीन कर गंदगी हटाते हैं। इसके बाद उसे यहीं पर चक्की में पीसकर बेसन तैयार किया जाता है। रवा सीधे फैक्ट्री से आता है। देशी घी की खरीदी उज्जैन दुग्ध संघ (सांची) से की जाती है। महाकाल मंदिर की प्रसादी के लिए खरीदी होने और बड़ी मात्रा होने के कारण सांची की ओर से विशेष दाम (न्यूनतम) तय किए जाते हैं। काजू, किशमिश व इलायची को भी बारीकी से परखा जाता है।

दूसरा स्टेप - स्टोर
खरीदी गई सभी सामग्री को एफएसएसएआई मानकों के अनुरूप स्टोर किया जाता है। जैसे चने की दाल व रवा को दीवार से करीब दो फीट दूर और नीचे प्लास्टिक के रैक रखकर स्टोर किया जाता है। यहां नमी न आए इसके इंतजाम किए जाते हैं। ड्रायफ्रूट को एयर कंडीशनर कमरे में रखा जाता है। दाल में नमी होने पर उसे धूप में सुखाया जाता है।

लड्‌डू के लिए तैयार मिश्रण।
लड्‌डू के लिए तैयार मिश्रण।

तीसरा स्टेप - लड्‌डू की तैयारी
एक बार में 20 किग्रा बेसन, 5 किग्रा रवा को 20 किग्रा देसी घी के साथ भट्‌टी की तेज आंच में सिकाई की जाती है। यह प्रक्रिया डेढ़ से दो घंटे चलती है। इस दौरान मिश्रण को कड़छे से लगातार हिलाया जाता है। 16 साल से महाकाल की लड्‌डू प्रसादी तैयार कर रहे राजू हलवाई बताते हैं, सिके हुए बेसन को बड़ी ट्रे में ठंडा किया जाता है। इसमें चौबीस घंटे का समय लग जाता है। ठंडा होने पर इसमें पिसी हुई शकर, इलायची व ड्रायफ्रूट मिलाया जाता है। हाथों से इसे अच्छी तरह से मिलाकर रख दिया जाता है। इस तरह लड्‌डू का मिश्रण तैयार हो जाता है।

प्रत्येक पैकेट का सही तोल किया जाता है।
प्रत्येक पैकेट का सही तोल किया जाता है।

चौथा स्टेप - पैकिंग
मिश्रण से लड्‌डू तैयार करने का काम 25 लोगों की टीम करती है। लड्डू बनने के बाद 250 ग्राम, 500 ग्राम और 1 किग्रा लड्‌डुओं की पैकिंग की जाती है। एक लड्‌डू का वजन औसतन 50 ग्राम के लगभग रखा जाता है। इसके लिए इलेक्ट्रिक तोल कांटा इस्तेमाल किया जाता है। इस तोल कांटे की भी समय-समय पर जांच की जाती है। तैयार पैकेट्स को वजन के अनुसार अलग-अलग कैरेट्स में रखा जाता है। यहां से लड्‌डुओं के कैरेट्स को स्टोर रूम में रख दिया जाता है।

अंतिम स्टेप - सप्लाई
महाकाल मंदिर में बने अलग-अलग आउटलेट की मांग के अनुसार अलग-अलग वजन के पैकेट्स सप्लॉय किए जाते हैं। यहां से पूरी तरह से बंद गाड़ी में सुरक्षित रूप से लड्‌डुओं को महाकाल मंदिर तक पहुंचाया जाता है।

दो साल पहले 'भोग सर्टिफिकेट' मिला था
फूड सेफ्टी ऑफिसर बसंत दत्त शर्मा कहते हैं, हमें दो साल पहले 'भोग सर्टिफिकेट' (ब्लिसफुल हाइजनिक ऑफरिंग टू गॉड) मिल चुका है। इस वजह से हाइजिन रेटिंग कराने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि हम हाइजिन के मानकों का पालन पहले से ही कर रहे थे। फाइव स्टार हाइजिन रेटिंग मिलने के बाद महाकाल मंदिर समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर आशीषसिंह उज्जैन के रेलवे स्टेशन, इंदौर एयरपोर्ट सहित अन्य स्थानों पर आउटलेट खोलने की तैयारी में हैं।

खबरें और भी हैं...