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  • Then Narendra Giri Had Said That The Simhastha Chandal Would Not Allow Yoga To Have An Effect, The Fake Shankaracharyas And Kinnar Akhara Were Adamant Not To Come To The Simhastha.

यादों में... ऐसे बेबाक भी थे महंत नरेंद्र गिरि:उज्जैन में बोले थे- सिंहस्थ में चांडाल योग का असर नहीं पड़ने देंगे; फर्जी शंकराचार्यों और किन्नर अखाड़ा की एंट्री रोकने के लिए अड़ गए थे

उज्जैन2 महीने पहले
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महंत नरेंद्र गिरि- फाइल फोटो। - Money Bhaskar
महंत नरेंद्र गिरि- फाइल फोटो।

साधु-संतों के 13 प्रमुख अखाड़ों की संस्था, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के निधन से उज्जैन का धार्मिक जगत बेहद दुखी है। सिंहस्थ 2016 उन्हीं के नेतृत्व में संपन्न हुआ था। उन्होंने यहां सीधे सरकार से टकराते हुए आम जनता और साधु समाज के हित में कई फैसले लिए।

नरेंद्र गिरि ने उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ मेले में हिस्सेदारी के लिए नवगठित किन्नर अखाड़े को मान्यता देने से इनकार कर दिया था। प्रदेश सरकार की एक समिति का कहना था कि तीसरे लिंग के अखाड़े के इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने किन्नर अखाड़े को मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया था। सरकार का मानना था कि किन्नर भी समाज का अंग हैं, इसलिए समाज को उन्हें संरक्षण देना चाहिए।

इतना ही नहीं उन्होंने पहली बार दलित महामंडलेश्वर को सिंहस्थ में शामिल किया था। उनका मानना था कि आदिवासी, वनवासी समुदाय के साधुओं को तो महामंडलेश्र्वर बनाया गया था। कभी किसी दलित को इस शीर्ष पद सुशोभित नहीं किया गया। यह अखाड़ा परिषद का पहला फैसला है। इससे देश भर मे सामाजिक समरसता की दिशा में सुखद संदेश जाएगा।

चांडाल योग से भी भिड़ जाने का कहा था नरेंद्र गिरि ने
नरेंद्र गिरि साधु-संतों के साथ आमजनों की भी चिंता करते थे। पंडितों का दावा था कि उज्जैन सिंहस्थ में चांडाल योग बन रहा है, इससे जनहानि व प्राकृतिक आपदा आ सकती है। नरेंद्र गिरि ने कहा था कि हम चांडाल योग से भी भिड़ जाएंगे, पर आम लोगों और साधु-संतों को कुछ नहीं होने देंगे। इसके लिए उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना, जप-तप और हवन आदि करवाए थे। चांडाल योग के निवारण के लिए उन्होंने शिप्रा के उद्गम स्थल ग्राम उज्जैनी में मां शिप्रा व महाकालेश्वर मंदिर में पूजन-अर्चना भी की थी।

अतिक्रमण को लेकर सरकार व प्रशासन से जताई थी नाराजगी
नरेंद्र गिरि ने कहा था कि जिस क्षेत्र में सिंहस्थ लगता है, वह आवासीय नहीं होना चाहिए। वहां किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। यदि शासन ने प्रशासन को ऐसे क्षेत्र को संरक्षित रखने के लिए पत्र लिखा है तो प्रशासन की जवाबदारी बनती है कि उस पर अमल करें। आगामी सिहस्थ मेला 2028 के मान से सिंहस्थ मेला क्षेत्र को बढ़ाए जाने की मांग को लेकर प्रस्तावित उज्जैन मास्टर प्लान 2035 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा सुझाव के साथ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। नरेंद्र गिरि महाराज ने इंदौर रोड शांति पैलेस चौराहा से उन्हेल रोड तक सांवरा खेड़ी, जीवन खेड़ी को सिहंस्थ क्षेत्र घोषित करते हुए शिप्रा नदी के दोनों ओर 200 मीटर तक ग्रीन बेल्ट आरक्षित करने और प्रस्तावित उज्जैन मास्टर प्लान 2035 पर रोक लगाने की मांग की थी।

ताकत का अहसास: काम में कमी नजर आई तो साधु दिखाएंगे ताकत
सिंहस्थ 2016 के आयोजन को लेकर उन्होंने सरकार से साफ-साफ कह दिया था कि सिंहस्थ मेला शुरू होने के दो माह पहले सारे काम 100 प्रतिशत पूरे हो जाना चाहिए। यदि काम में कमी नजर आई तो साधु-संत अपनी ताकत दिखाएंगे।

गलती पर सख्त अंदाज: जो अखाड़ा गलती करे उस पर कार्रवाई जरूरी
अखाड़ों के भीतरी विवादों पर नरेंद्र गिरि का मानना था कि कहा यदि कोई अखाड़ा गलती करता है, तो उस पर कार्रवाई होना जरूरी है, तभी अनुशासन रहता है। उन्होंने उज्जैन के प्रेमानंद महाराज से महामंडलेश्वर की पदवी छीनने के लिए पत्र जारी कर दिया था।

नरेंद्र गिरि का हठ योग: देश में केवल 4 शंकराचार्य, बाकी किसी को सिंहस्थ में नहीं आने देंगे
नरेंद्र गिरि ने सिंहस्थ के पहले साफ कह दिया था कि फर्जी शंकराचार्यों की वजह से सनातन धर्म की मर्यादा घटती है। इसलिए सिंहस्थ 2016 में फर्जी शंकराचार्यों को घुसने नहीं दिया जाएगा। देश में सिर्फ 4 शंकराचार्य पीठ हैं और ये ही मान्य पीठ रहेंगी। इसी तरह फर्जी साधुओं को रोकने के लिए हर अखाड़ा परिषद को अपने साधु-संतों, महामंडलेश्वरों का परिचय पत्र जारी करने का कहा था।

शुद्धिकरण के पक्षधर: शिप्रा के लिए राष्ट्रपति तक जाने को तैयार थे नरेंद्र गिरि
नरेंद्र गिरि को शिप्रा में स्वच्छ देखना चाहते थे। सिंहस्थ के दौरान भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। शिप्रा में साफ पानी नहीं होने पर वे चिंतित रहते थे। उन्होंने सिंहस्थ के पहले मुख्यमंत्री से भी इस बारे में चर्चा की थी। उन्होंने अफसरों से कहा था कि वे अभी से सिंहस्थ 2028 की तैयारी शुरू करें। शिप्रा को लेकर भी सरकार जागे। जरूरत पड़ी तो, हम राष्ट्रपति तक जाने से नहीं चूकेंगे।

प्रयागराज में संदिग्ध हालात में मौत
प्रयागराज में भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। पुलिस के मुताबिक, उनका शव अल्लापुर में बाघंबरी गद्दी मठ के कमरे में फंदे से लटका मिला है। जांच-पड़ताल की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद ही घटना का कारण साफ हो पाएगा।

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