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भास्कर सरोकार:उज्जैन में 10 लाख दीपक लगाने का प्रस्ताव, अयोध्या उत्सव में जले थे 9 लाख 41 हजार

उज्जैन4 महीने पहलेलेखक: ओमप्रकाश सोणोवणे
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शहर के नागरिक बोले- शिव, शक्ति और श्रीकृष्ण से संबंधित उत्सव होना चाहिए। - Money Bhaskar
शहर के नागरिक बोले- शिव, शक्ति और श्रीकृष्ण से संबंधित उत्सव होना चाहिए।

अयोध्या और काशी की तर्ज पर उज्जैन में 1 मार्च को महाशिवरात्रि महोत्सव मनाया जाना है। इसे दिव्य महाकाल-भव्य उज्जयिनी के रूप में मनाने के लिए प्रशासन की एक टीम ने अयोध्या का दौरा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इसके आधार पर उज्जैन में महाशिवरात्रि उत्सव की परिकल्पना की जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार अयोध्या में 9.41 लाख दीपक प्रज्वलित किए गए थे। इस उत्सव को अंजाम देने में 9 हजार वालंटियर्स ने कमान संभाली थी। एक अनुमान है कि इस इवेंट पर प्रति दीपक 9 रुपए का खर्च आया था। उज्जैन में 10 लाख दीपक लगाने का प्रस्ताव दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने 1 मार्च महाशिवरात्रि को महाकाल के महामहोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की है। इस दिन पूरे शहर की सजावट कर दीपकों की जगमग करने, सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से उत्सव मनाया जाने पर मंथन किया जा रहा है। इस मौके पर महाकालेश्वर मंदिर के आसपास किए जा रहे 300 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण भी होगा।

इसके लिए 15 फरवरी तक अधिकांश काम पूरे करने की ताकीद की गई है। सीएम के ओएसडी आनंद शर्मा को उज्जैन में होने वाले महोत्सव की जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े तीन सदस्यीय दल ने अयोध्या जाकर वहां मनाए गए दीपोत्सव की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों, अयोध्या विकास प्राधिकरण, श्रीरामजन्म भूमि ट्रस्ट व इवेंट से जुड़े अन्य समाजसेवियों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को प्रस्तुत की है।

अयोध्या में ऐसे हुई तैयारी

अयोध्या में दीपोत्सव की परिकल्पना करने वाले मनोज दीक्षित के अनुसार सबसे पहले हमने इस आइडिया पर प्रोजेक्ट बनाया। इसे सीएम योगी आदित्यनाथ को बताया। सीएम ने ओके कर दिया तब विद्यार्थियों, समाजसेवियों, कलाकारों को जोड़ा और 9 हजार से ज्यादा वालिंटियर्स तैयार किए।

इसके दो पार्ट थे- सरकार और प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं की और वालिंटियर्स के माध्यम से इवेंट को धरातल पर उतारा। दीपकों का निर्माण और उन्हें प्रज्वलितकरने की व्यवस्था सबसे कठिन थी। स्थानों का चयन किया। करीब सवा करोड़ रुपए का बजट सरकार का था। सांस्कृतिक आयोजन की कमान अयोध्या शोध संस्थान को दी गई। नागरिकों का सीताराम स्वरूप में फैशन शो तक हुआ। उज्जैन में शिव, शक्ति और श्रीकृष्ण को केंद्र में रख कर आयोजन किया जा सकता है।

नागरिक बोले- उज्जैन का महत्व अलग, इसलिए अलग इवेंट
भास्कर ने शहर के नागरिकों से चर्चा कर उनकी राय भी जानी। शिप्रा परिक्रमा का आयोजन करने वाले राजेश कुशवाह का कहना है कि उज्जैन अद्भुत तीर्थ है। यहां ज्योतिर्लिंग के साथ देवी शक्तिपीठ भी है। भगवान श्रीकृष्ण ने यहां शिक्षा ग्रहण की। यह काल गणना का केंद्र, सम्राट विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास की कर्मभूमि है।

इसलिए महाशिवरात्रि महोत्सव को महाकाल पर केंद्रित रखते हुए अलग-अलग आयोजन किए जा सकते हैं। पुजारी आशीष गुरु का कहना है कि महाशिवरात्रि शिव का पर्व है। उज्जैन शिव की नगरी है। शिव से संबंधित अन्य मंदिर भी हैं। उन्हें जोड़ा जाना चाहिए। समाजसेवी गिरिश जायसवाल कहते हैं- साहित्य, संस्कृति और शिक्षा की नगरी भी है। आयोजन में यह भी शामिल होना चाहिए। जंबू जैन धवल का मानना है उज्जैन में अन्य संप्रदाय भी हैं, उन्हें आयोजन से जोड़ना चाहिए।

दीपक के लिए 30 हजार लीटर तेल का बंदोबस्त करना होगा
रिपोर्ट में अयोध्या में हुए आयोजन के साथ उज्जैन के आयोजन के लिए सुझाव दिए गए हैं। अयोध्या में सरकार ने दीपक निर्माण के लिए कुंभकारों को इलेक्ट्रिक दीप मेकर उपलब्ध कराए थे। उज्जैन में भी कुंभकारों से चर्चा कर दीपक बनवाए जा सकते हैं। उज्जैन में 10 लाख दीपक लगाए जाना चाहिए, इसके लिए 12 लाख दीपकों की जरूरत होगी।

बत्ती के लिए खादी ग्रामोद्योग की मदद ली जा सकती है। इसके लिए 30 हजार लीटर तेल का बंदोबस्त करना होगा। दीपक लगाने और इवेंट के स्थान तय करना होंगे। घरों और बाजारों में सजावट के लिए नागरिकों, व्यापारियों को तैयार करना होगा। सांस्कृतिक आयोजन के लिए थीम तय करने और प्रस्तुतियों के लिए कला संस्थाओं को जोड़ना होगा। इवेंट के लिए विभिन्न समितियों का गठन करना होगा।

आयोजन के लिए संक्षिप्त सुझाव दें
सरकार के इस आयोजन के लिए भास्कर नागरिकों के सुझाव आमंत्रित करता है। अपने सुझाव संक्षिप्त में मोबाइल नंबर- 9826111123 पर भेज सकते हैं।