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बीच का रास्ता:विक्रम में पीछे के दरवाजे से हुई भर्ती में अब, रास्ता निकालने में लगा विश्वविद्यालय

उज्जैन2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Money Bhaskar
फाइल फोटो
  • शासन स्तर पर फिक्स आउटसोर्स एजेंसी को आधार बनाने का गणित
  • इमरजेंसी के नाम पर 50 से ज्यादा कर्मचारियों को अब तक नौकरी पर रखा

विक्रम विश्वविद्यालय में पीछे के दरवाजे से हुई भर्ती में विश्वविद्यालय प्रशासन रास्ता निकालने में जुटा हुआ है। इसमें शासन स्तर पर फिक्स आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों को रखा जाना दर्शाया जाएगा। इसकी प्रमुख वजह है कि भर्ती शुरू करने से पहले विवि प्रशासन ने आउटसोर्स एजेंसी का ठेका ही नहीं दिया और बगैर एजेंसी के ही क्रीड़ा विभाग खेल प्रशिक्षक, प्रयोगशाला टेक्नीशियन, माइक्रो बॉयोलॉजी अध्ययनशाला, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, ऑनलाइन सेल सहित विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में नियुक्ति कर दी गई।

दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद विवि प्रशासन ने बीच का रास्ता निकालना शुरू कर दिया है। इसमें वह शासन स्तर पर फिक्स आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों को रखा जाना दर्शाएगी, ताकि कर्मचारी आउटसोर्स माध्यम से रखे जाना साबित हो सके। विवि प्रशासन उन्हें वेतन जारी नहीं कर सकता है, यदि वह ऐसा करता है तो रखे गए कर्मचारी विक्रम विश्वविद्यालय के कहलाएंगे। ऐसे में विवि प्रशासन की ओर मुश्किल होगी। इसी वजह से नया रास्ता निकालते हुए फिक्स एजेंसी से कर्मचारियों को आउटसोर्स माध्यम से कर्मचारियों को दर्शाए जाने का खेल शुरू हो गया है। इसके तहत कर्मचारियों को दर्शाया जाएगा और आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से ही कर्मचारियों के वेतन भुगतान का भी रास्ता निकल जाएगा। इधर, विवि प्रशासन का तर्क है कि इमरजेंसी के चलते कुछ कर्मचारियों को रखा गया है। शासन स्तर पर आउटसोर्स एजेंसी फिक्स है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों को रखा गया है।

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