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महाकाल की सवारी निकलना शुरू:21वीं सवारी पुराने रूट से निकल रही, जगह-जगह किया जा रहा स्वागत

उज्जैन6 महीने पहले
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सवारी के रास्ते में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। - Money Bhaskar
सवारी के रास्ते में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

दो बार के सावन की सवारी व पिछले साल की कार्तिक-अगहन माह की 4 व इस बार कार्तिक-अगहन माह की 2 सवारी के बाद महाकाल की सवारी फिर अपने पुराने और परंपरागत रूट पर निकलना शुरू हो चुकी है।

रास्ते को कई जगह फूलों से सजाया और रांगोली बनाई गई।
रास्ते को कई जगह फूलों से सजाया और रांगोली बनाई गई।

दो साल बाद फिर अपने बीच महाकाल को पाने की खुशी में कई जगह सवारी का स्वागत किया जाएगा। जगह-जगह पुष्प वर्ष कर प्रसाद वितरण किया जाएगा।

गोपाल मंदिर पर भी भगवान महाकाल का पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।
गोपाल मंदिर पर भी भगवान महाकाल का पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।

प्रशासन व पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं, ताकि भीड़ में निकलते वक्त ट्रैफिक जाम व अन्य परेशानियां न हों।

महाकाल की सवारी आज परंपरागत मार्ग पर निकल रही है।
महाकाल की सवारी आज परंपरागत मार्ग पर निकल रही है।

भगवान महाकालेश्वर की मार्गशीर्ष (अगहन) माह की पहली सवारी सोमवार को निकल रही है। कोविड-19 के प्रतिबंध हटने के बाद महाकाल की सवारी परंपरागत मार्ग से निकाली जा रही है।

रास्ते में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह महाकाल की सवारी का फूलों से स्वागत किया।
रास्ते में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह महाकाल की सवारी का फूलों से स्वागत किया।

महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक गणेश धाकड़ ने बताया कि सवारी तय समय निकलकर शाम 6 बजे मंदिर लौट आएगी। कार्तिक-मार्गशीर्ष (अगहन) माह की चार सवारियों के क्रम में यह तीसरी सवारी है। इसके बाद एक और सवारी निकलेगी।

इस परंपरागत मार्ग से सवारी
सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वहं शिप्रा के जल से भगवान श्री चन्द्रमौलीश्वर का अभिषेक उपरांत सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार, होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।

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