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विक्रम के दो प्रोफेसर में फिर हुआ वाक युद्ध:एमबीए के कुछ कोर्स विभाग में संचालित करने को लेकर बनी विवाद की स्थिति

उज्जैन2 महीने पहले
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उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय के MBA विभाग के बाहर दो प्रोफेसरों का वाक युद्ध विक्रम के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मौखिक विवाद की शुरुआत MBA संस्थान में अन्य पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर हुआ है।

विक्रम विश्वविद्यालय का पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान का नाम एक बार फिर चर्चा में है। बताया गया कि शुक्रवार को MBA संस्थान के बाहर ही विभाग के प्रोफेसर दीपक गुप्ता और विद्यार्थी कल्याण संकाय अध्यक्ष प्रो. एस के मिश्रा के बीच वाक युद्ध की स्थिति बन गई। कारण था कि विश्वविद्यालय द्वारा पिछले वर्ष शुरू किए गए MBA के 6 पाठ्यक्रमों को एमबीए संस्थान में शिफ्ट किया जा रहा है। विक्रम विश्वविद्यालय में पिछले वर्ष से आईआईपीएस इंस्टिट्यूट खोलकर वाग्देवी भवन कॉमर्स विभाग में एमबीए के तीन पाठ्यक्रम एमबीए मार्केटिंग फाइनेंस और एचआर शुरू किए थे। इस सत्र से 3 नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं जिसमें एमबीए मीडिया मैनेजमेंट , इवेंट मैनेजमेंट और हॉस्पिटल मैनेजमेंट शामिल है। आईआईपीएस इंस्टीट्यूट के इन सभी छह पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान के भवन में संचालित करने के लिए शुक्रवार को कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडे और कुलसचिव डॉ प्रशांत पौराणिक के साथ विद्यार्थी कल्याण संघ का अध्यक्ष प्रो. एस के मिश्रा गए थे। व्यवस्था देखने के बाद कुलपति और कुलसचिव तो रवाना हो गए। वही जब डीएसडब्ल्यू प्रो. मिश्रा रवाना हो रहे थे , उसी दौरान विभाग के बाहर एमबीए संस्थान के निदेशक प्रो. दीपक गुप्ता की बहस डॉ मिश्रा से हो गई। दोनों के बीच वाक युद्ध ऐसा हुआ कि कुछ लोगों को बीच बचाव में आना पड़ा। मामले को लेकर डॉ एस के मिश्रा ने चर्चा में बताया कि कुलपति कुलसचिव के विभाग से जाने के बाद डॉ गुप्ता ने उनके ऊपर एमबीए संस्थान में कोर्स शुरू कराने के आरोप लगाते हुए इतना कुछ कहा कि उन्हें भी तैश में आकर जवाब देना पड़ा। डॉ मिश्रा ने बताया कि एमबीए के 6 नए कोर्स जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय संस्थान में प्रारंभ करने की उनकी कोई मंशा नहीं है। यह निर्णय कुलपति ने लिया है। इसलिए कुलपति और कुलसचिव से चर्चा करना चाहिए। डॉ गुप्ता ने मुझ पर लिंक खोलकर प्रवेश देने और संस्थान में पाठ्यक्रम संचालित करवाने के आरोप लगाकर कुछ भी कह दिया। वहीं इस मामले को लेकर निदेशक डॉ दीपक गुप्ता से चर्चा की तो उन्होंने विवाद जैसा कुछ भी होने से इंकार कर फोन काट दिया।

विशेषज्ञों की मानें तो नए पाठ्यक्रमों की स्वीकृति नहीं

MBA के नए कोर्स संचालन को लेकर कुछ विशेषज्ञों से चर्चा की तो यह स्थिति सामने आई कि आईआईपीएस इंस्टीट्यूट के माध्यम से एमबीए के लिए गत वर्ष शुरू हुए 3 पाठ्यक्रम और इस वर्ष शुरू किए जा रहे तीन पाठ्यक्रम की स्वीकृति एआईसीटीई से नहीं है। इसलिए यह कोर्स MBA संस्थान में नहीं चलाए जा सकते हैं। कारण है कि MBA संस्थान में संचालित हो रहे एमबीए पाठ्यक्रम का अप्रूवल प्रतिवर्ष एआईसीटीई से लेने के साथ ही शपथ पत्र भी दिया जाता है। शपथ पत्र में उल्लेख किया जाता है कि संस्थान में एआईसीटीई से अप्रूवल कोर्स का नियमानुसार संचालन किया जाएगा। यह भी कारण बताया गया कि संस्थान में एआईसीटीई की अनुमति के बिना अन्य कोर्स मान्य नहीं है। बताया गया कि शपथ पत्र पर कुलसचिव के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसी स्थिति में यहां बिना अप्रूवल अन्य पाठ्यक्रम शुरू हुए तो शपथ पत्र झूठा साबित हो सकता है।

कुलपति ने कहा विश्वविद्यालय कोर्स शुरू करें तो अनुमति की जरूरत नहीं

विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडे से कोर्स संचालन को लेकर चर्चा की तो उनका कहना था कि विश्व विद्यालय को नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। इंदौर विश्वविद्यालय में कई कोर्स संचालित हो रहे हैं। MBA के जो नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं उसके लिए अलग इंस्टिट्यूट रहेगा। व्यवसाय प्रबंध संस्थान के भवन में कक्षाओं का संचालन होगा। यहां बड़ा भवन होने से उसकी उपयोगिता ली जा सकेगी। कुलपति ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में कोर्स चालू नहीं किए तो इतने शिक्षकों का बड़ा वेतन कहां से देंगे। उन्होंने कहा कि अब कार्य कराने के लिए कठोर निर्णय लेना होंगे।