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महाकाल में 110 दिन में 23 करोड़ आए:जल्दी दर्शन और भस्म आरती से ही 3 करोड़ 87 लाख रुपए समिति को मिले

उज्जैन3 महीने पहले
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महाकाल मंदिर में शनिवार को आकर्षक शृंगार किया। - Money Bhaskar
महाकाल मंदिर में शनिवार को आकर्षक शृंगार किया।

महाकालेश्वर मंदिर के खजाने में 28 जून से 15 अक्टूबर तक 110 दिन में 23.03 करोड़ रुपए आए। इसमें मंदिर को सीधे आय के रूप में शीघ्र दर्शन व भस्मआरती बुकिंग से मिले 3.87 करोड़ रुपए शामिल है। ध्वजा चढ़ाने व भांग शृंगार की बुकिंग से 2.27 लाख रुपए व अन्य दान आदि से 28.77 लाख रुपए मिले हैं। मंदिर समिति के अधिकारियों का कहना है कि मंदिर के लेखा में भले 23 करोड़ रुपए की प्राप्तियां दिखाई दे रही हैं लेकिन वास्तविक रूप में मंदिर को करीब 9 करोड़ रुपए की आय ही हुई है।

कोरोना के दूसरे दौर के लॉक डाउन के बाद 28 जून से मंदिर में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश शुरू हुआ था। लॉकडाउन के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित था। मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं के आने की तादाद तेजी से बढ़ी। इस दौरान विदेशी भक्त भी पहुंचे, जिससे विदेशी मुद्रा भी भेंट पेटियों से निकलीं। अभी इनकी गणना बाकी है।

28 जून से 15 अक्टूबर तक के लेखा रिकॉर्ड के अनुसार 110 दिन में लड्डू प्रसाद, शीघ्र दर्शन टिकट, मंदिर परिसर में रखी विभिन्न भेंट पेटियों, अभिषेक भेंट से प्राप्त राशि, भस्म आरती बुकिंग और अन्य दान आदि, ध्वजा व भांग शृंगार से 23 करोड 3 लाख 54 हजार 538 रुपए मंदिर के खजाने में आए। 11 सितंबर से भस्मआरती में प्रवेश शुरू किया गया है। इसी दिन से प्रोटोकॉल दर्शन पर 100 रुपए और भस्मआरती बुकिंग पर 200 रुपए का दान लेने की शुरुआत भी हुई। ऑनलाइन भस्मआरती बुकिंग पर 100 रुपए दान पहले से लागू है।

मंदिर के खजाने में इस तरह आए रुपए

  • लड्डू प्रसाद 8.20 करोड़
  • शीघ्र दर्शन 7.53 करोड़
  • भेंट पेटी से 5.66 करोड़
  • अभिषेक-भेंट 92 लाख
  • भस्म आरती 34.70 लाख
  • विविध दान 28.77 लाख
  • अन्न क्षेत्र भेंट 5.87 लाख
  • ध्वजा बुकिंग 2.27 लाख
  • कुल प्राप्ति 23.3 करोड़

लड्‌डू प्रसाद में घाटा, भेंट में पुजारियों, पुरोहितों का हिस्सा

कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है मंदिर के लेखा में 23 करोड़ रुपए की प्राप्तियां हैं। यह आय नहीं है। लड्डू प्रसाद से 8.20 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जबकि इनके निर्माण पर ज्यादा राशि खर्च होती है। एक किलो लड्डू प्रसाद की लागत 300 रुपए आ रही है, जबकि श्रद्धालुओं को यह 260 रुपए में दिया जाता है। लड्डू प्रसाद को भोग टैग मिलने के बाद इसकी डिमांड बढ़ रही है। अभिषेक भेंट से प्राप्त राशि में से 75 फीसदी राशि पंडे-पुजारियों को दी जाती है।

गर्भगृह भेंट पेटी की राशि का 35 फीसदी हिस्सा भी पंडे-पुजारियों को जाता है। अन्नक्षेत्र पर भी मंदिर समिति खर्च करती है। मंदिर समिति के प्रशासक गणेश धाकड़ बताते हैं कि मंदिर में अनेक मद ऐसी हैं जिनमें मोटी राशि दिखाई देती है लेकिन वास्तविकता में मंदिर को आय के रूप में बहुत कम राशि मिलती है। कुछ ही मद हैं जिनमें मंदिर को सीधी आय होती है।

19 महीने तक भस्मआरती में प्रवेश नहीं मिला

कोरोना की दूसरी लहर शुरू होते ही 17 मार्च 2020 से भस्मआरती में प्रवेश बंद कर दिया था, जो 11 सितंबर 2021 से शुरू हुआ। भस्मआरती का देश-विदेश के भक्तों में क्रेज है। भस्मआरती बंद होने से श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रही। भस्मआरती शुरू होते के बाद संख्या बढ़ रही है। भस्म आरती में एक दिन में 1 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश मिल रहा है।

ऑनलाइन परमिशन वाले श्रद्धालु से 100 रुपए और ऑफ़ लाइन परमिशन वाले श्रद्धालु से 200 रुपए दान के रूप में लिए जा रहे हैं। इस बीच श्रावण में भी काफी संख्या में श्रद्धालु आए। इससे शीघ्र दर्शन (250 रुपए दान) से राशि मिली। दान पेटियों से भी 5 करोड़ 66 लाख 12 हजार 384 रुपए मिले। शीघ्र दर्शन से 7 करोड 53 लाख 25 हजार 250 रुपए मिले।

निर्माण में बनें भक्त सहयोगी

समिति अध्यक्ष सिंह कहते हैं- मंदिर परिसर में अरबों के निर्माण चल रहे हैं। परिसर का विस्तार हो रहा है। ऐसे में मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं के संचालन में भक्तों की भागीदारी जरूरी है। भक्तजन मंदिर में दान के लिए समिति कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। ऑनलाइन दान सुविधा भी है।

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