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CG में 27 लोगों को रौंदने वालों की कहानी:पिता की मौत, मां ने छोड़ा, ड्राइवरी करते शिशुपाल से मिला; यही तस्करी का पहला कदम

सिंगरौली2 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ के जशपुर में शुक्रवार को धार्मिक जुलूस में शामिल लोगों को रौंदने वाले दोनों आरोपी बबलू विश्वकर्मा और शिशुपाल शाह मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के रहने वाले हैं। दोनों पेशे से तस्कर हैं। कल भी वे ओडिशा से गांजे की खेप लेकर छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य प्रदेश आ रहे थे। इसी दौरान जशपुर के पत्थलगांव में इन्होंने दुर्गा विसर्जन के लिए जा रहे लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी। इस घटना में एक की मौत हो गई,जबकि 26 लोग घायल हो गए थे। पढ़िए दोनों आरोपियों के तस्कर बनने की कहानी...

ड्राइवर से तस्कर बना बबलू
सिंगरौली एसपी ने बताया कि 21 साल का बबलू विश्वकर्मा जिले के शासन ठूसा गांव का रहने वाला है। जब वह एक साल का था, तभी उसके पिता निधन हो गया था। इसके बाद उसकी मां ने हरियाणा के व्यक्ति से दूसरी शादी कर ली। बबलू अपने नाना-नानी के घर में बड़ा हुआ।

वह 8 महीने पहले काम की तलाश में मौसी के घर बरगवां आया था। यहां उसे ड्राइवर का काम मिल गया। इसी दौरान उसकी मुलाकात शिशुपाल शाह से हुई। शिशुपाल एक प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर था। दोनों के बीच कुछ ही समय में गहरी दोस्ती हो गई।

पुलिस ने आरोपी बबलू और शिशुपाल को पकड़ लिया है।
पुलिस ने आरोपी बबलू और शिशुपाल को पकड़ लिया है।

शिशुपाल पहले ही रख चुका था अपराध की दुनिया में कदम
शिशुपाल की कहानी बबलू से बिल्कुल अलग है। बबलू तो काम करने आया था, लेकिन शिशुपाल पहले से ही चोरी के अलावा अन्य अपराध में शामिल रहा था। उसकी अपनी पत्नी से भी नहीं बनती थी। पत्नी ने उसके खिलाफ बरगवां थाने में प्रताड़ना की शिकायत भी दर्ज करवा रखी है।

घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने कार में आग लगा दी थी।
घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने कार में आग लगा दी थी।

जेल गया और बन गया तस्कर
बताया जाता है कि ड्राइवर का काम करते हुए शिशुपाल ने चोरी का डीजल बेचने का काम शुरू कर दिया था। इस केस में वह सजा भी काट चुका है। जेल में उसकी पहचान कुछ तस्करों से हुई। यहां से उसे तस्करी का काम मिलना शुरू हो गया। इस काम के लिए उसे एक साथी की तलाश थी। बबलू से मिलने के बाद शिशुपाल ने उसे अपने साथ तस्करी के काम में लगा लिया।

इस प्रकार से कार में गांजा भर रखा था।
इस प्रकार से कार में गांजा भर रखा था।

छोटे से बन गए बड़े तस्कर
शिशुपाल की जेल में हुई तस्करों से दोस्ती इस काम में मदद करने लगी। पहले तो उन्होंने 1000-2000 के गांजे की तस्करी से शुरुआत की, लेकिन जैसे-जैसे मांग बढ़ी इनकी पहुंच भी बढ़ने लगी। कुछ ही समय में इन्होंने ओडिशा सहित अन्य प्रदेशों से गांजा लाकर छत्तीसगढ़ और एमपी में बेचना शुरू कर दिया। 6 महीने में ही हाल ऐसे हो गए कि इनके तौर तरीके तो बदले ही। कार में गांजे की बड़ी खेप भी ढोने लगे।

घटना से गुस्साए लोगों ने कार के ड्राइवर की जमकर पिटाई की।
घटना से गुस्साए लोगों ने कार के ड्राइवर की जमकर पिटाई की।

100 से भी ज्यादा स्पीड से दौड़ा रहे थे कार
ओडिशा से गांजा लेकर सिंगरौली के लिए निकले तस्करों के मन में भय था कि कहीं पुलिस की पकड़ में नहीं आ जाएं। इसलिए वे गाड़ी तेजी से दौड़ाकर छत्तीसगढ़ की सीमा पार करना चाह रहे थे। जैसे ही से जशपुर में पहुंचे। सड़क पर धार्मिक जुलूस निकल रहा था। सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल थे।

गति तेज होने से ये कार को कंट्रोल में नहीं कर पाए और कार जुलूस में घुस गई। जुलूस में घुसने के बाद भी इन्होंने कार की स्पीड कम नहीं की और तेजी से कार दौड़ाकर भागने की कोशिश की। हालांकि आगे पुलिस ने इन्हें दबोच लिया और पीछे लगी भीड़ ने ड्राइवर को पीट दिया। इतना ही नहीं कार को भी आग के हवाले कर दिया।

(सिंगरौली से देवेंद्र पांडे की रिपोर्ट)

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