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श्रीराम प्रतिज्ञा स्थल पहुंची विधायक नारायण की पदयात्रा:धर्म सभा में बोले साधु- संत, अगर चित्रकूट का विकास नहीं कर सकती मप्र सरकार तो यूपी को सौंप दें

सतना2 महीने पहले
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भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के 84 कोशीय परिक्रमा मार्ग में स्थित श्रीराम प्रतिज्ञास्थल सिद्धा पर्वत में शुक्रवार को हुई धर्म सभा में साधु- संतों ने भगवान राम की स्मृतियों को सहेजने और चित्रकूट के विकास के मुद्दे पर भोपाल से दिल्ली तक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी की पद यात्रा के सिद्धा पहुंचने पर हुई इस धर्म सभा मे शामिल होने पहुंचे संत यह कहने से भी नहीं चूके कि यदि मप्र सरकार चित्रकूट का विकास नहीं कर सकती तो यह धर्म क्षेत्र यूपी को सौंप दिया जाए। वहां योगी हैं और वो भी संत हैं जो संत समाज की भावनाओं को समझते हैं।

बता दें कि मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने 27 सितंबर से चित्रकूट से सिद्धा पर्वत तक पदयात्रा शुरू की थी। चित्रकूट के विकास और भगवान राम की स्मृतियों को सहेजने-संरक्षित करने के मसले पर शुरू हुई। नारायण की पदयात्रा 84 कोशीय परिक्रमा पथ से होते हुए शुक्रवार को सिद्धा पर्वत पहुंची जहां धर्म सभा हुई।

इस सभा में बड़ी संख्या में उपस्थित हुए साधु-संतों, क्षेत्रीय लोगों और तमाम आस्थावानों ने गैर राजनीतिक मंच से सरकार से चित्रकूट के संरक्षण और इसे तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग उठाई। लोगों ने राम के काम के लिए भोपाल और दिल्ली तक भी लड़ाई लड़ने का संकल्प व्यक्त किया।

विधायक नारायण ने कहा कि राज्य और केंद्र में राम की सरकार है। राम की स्मृतियों को सहेजने के लिए सरकारों को यहां चल रही खदानें बंद कराने कदम उठाने चाहिए। चित्रकूट का 80 फीसदी हिस्सा एमपी में है, उसे तीर्थ क्षेत्र घोषित कर यहां विकास किया जाना चाहिए।

संत समाज इस बात से आहत है कि यूपी ने अपने हिस्से के 20-25 फीसदी हिस्से को सजाने संवारने का काम किया। ब्रांडिंग की लेकिन मप्र का चित्रकूट उपेक्षित पड़ा है। संत समाज अपनी इसी पीड़ा के कारण एमपी का चित्रकूट भी यूपी को सौंप दिए जाने की बात करता है, जो दुखद और चिंतनीय है। नारायण ने सरकार से अपील की है कि इस क्षेत्र को तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए।

संत राजीव लोचनदास महाराज ने कहा कि चित्रकूट की भूमि में किसी जीवात्मा, महात्मा ने नहीं बल्कि परमात्मा ने तपस्या की है। अयोध्या महान है, क्योंकि वहां दशरथ नंदन राम ने जन्म लिया, लेकिन चित्रकूट ने राम को भगवान राम बनाया। यहां के कण कण में भगवान राम बसे हैं। यदि चित्रकूट का संरक्षण नहीं हुआ, सिद्ध पर्वत के क्षेत्र में चल रही खदानें बंद न की गई, 84 कोशीय परिक्रमा को संरक्षित न किया गया, तो रामा दल दिल्ली पर चढ़ाई करेगा।

मदनगोपाल दास महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज ये पदयात्रा यहां समाप्त नहीं हो रही बल्कि इससे कहीं आगे तक ये जाएगी। हम साधु संतों की पीड़ा है कि जहां भगवान राम ने प्रतिज्ञा ली आज उसी स्थान को छिन्न भिन्न किया जा रहा है। भगवान ने चित्रकूट को खुद संजोया - संरक्षित किया।

भगवान ने यहां 84 कोश की परिक्रमा की परिधि में लीलाएं की हैं। चित्रकूट सिर्फ शास्त्रों में महिमा मंडित हैं लेकिन कागजों में नहीं है। हम चाहते हैं कि 84 कोश का चित्रकूट कागजों में भी तीर्थ क्षेत्र घोषित हो। अगर मप्र वाले न कर पा रहे हों तो इसे उप्र को इसका भू भाग दे दिया जाए, वहां संत हैं योगी जी के रूप में, वे ऐसा कर सकते हैं।

सनकादिक त्यागी जी महाराज ने कहा कि भगवान राम स्वयं संकल्प हैं। सिद्धा में उन्होंने संकल्प लेकर रावण और लंका समेत असुर जाति का नाश किया था। आज उसी संकल्प को छिन्न भिन्न करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि एक-एक संत लाखों के बराबर है, परमाणु बम की तरह है। राम के काम के लिए हर लड़ाई लड़ने को सहर्ष तैयार है। अपने भगवान के लिए दुनिया के किसी भी कोने में जाने और सब कुछ न्योछावर करने को तैयार है।

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