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मैहर में दिन भर चला बवाल:केजेएस सीमेंट के श्रमिक नेता का शव रख कर प्रदर्शन, मुआवजे और नौकरी की शर्त पर देर रात बनी बात

सतना2 महीने पहले
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मैहर के राजनगर में स्थित अहलूवालिया समूह की केजेएस सीमेंट प्लांट के श्रमिक नेता की मौत के बाद मैहर में दिन भर बवाल मचा रहा। फैक्ट्री के बाहर मजदूरों का हुजूम जमा रहा और सड़क पर शव रख कर देर रात तक प्रदर्शन चलता रहा। इस दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील नजर आया। देर रात मामला तब शांत हुआ जब प्रबंधन ने मुआवजे, नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की जिम्मेदारी की शर्त मानी। हालांकि इसके बाद भी कुछ नेता किस्म के ठेकेदार वहां नेतागिरी दिखाने की कोशिश करते रहे।

केजेएस सीमेंट के श्रमिक नेता और सीटू यूनियन के मैहर अध्यक्ष मनीष शुक्ला पर पिछले दिनों जानलेवा हमला हुआ था। मनीष को इलाज के लिए जबलपुर में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार की रात श्रमिक नेता की मौत हो गई। यूनियन नेता की मौत की खबर मिलने के बाद से ही फैक्ट्री में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। जबलपुर में पीएम के बाद जब शनिवार की दोपहर शव मैहर पहुंचा, तब तक वहां भारी संख्या में मजदूर फैक्ट्री गेट के सामने जमा हो चुके थे। सीटू यूनियन के सतना जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह रावल, महासचिव तेज प्रताप दुबे और राकेश सिंह भी प्रबन्धन से चर्चा के लिए केजेएस पहुंच गए थे। नाराज मजदूरों ने श्रमिक नेता मनीष शुक्ला का शव सड़क पर रख दिया और प्रदर्शन करने लगे।

पुलिस ने कई मजदूर नेताओं से की पूछताछ

उधर केजेएस सीमेंट में हंगामे की आशंका के मद्देनजर शुक्रवार की रात से ही मैहर थाना पुलिस के अलावा आसपास के अन्य थानों का फोर्स भी वहां तैनात कर दिया था। एडिशनल एसपी एसके जैन भी हालात पर नजर रखने केजेएस पहुंच गए थे। शाम तक तो प्रबंधन की तरफ से सीटू यूनियन के नेताओं और अन्य श्रमिकों और परिजनों से बातचीत करने कोई आगे नहीं आया, लेकिन बाद में जब प्रशासन ने दखल दिया तो वार्ता का दौर शुरू हुआ। उधर गेट के सामने मजदूर नारेबाजी करते रहे और इधर कई बार बात बनते-बनते बिगड़ती रही।

एक करोड़ के मुआवजे की मांग साढ़े 22 लाख रुपए पर रुकी
पहले तो प्रदर्शनकारी एक करोड़ रुपए मुआवजे के साथ मृत श्रमिक नेता के परिवार के एक सदस्य को स्थाई नौकरी, दोनों बच्चों की पढ़ाई के खर्च की मांग पर अड़े रहे, लेकिन बाद में बात 50 लाख पर अटक गई। प्रबंधन 18 लाख रुपए मुआवजा देने पर राजी हुआ, लेकिन परिजन और सीटू नेता इस पर सहमत नहीं थे। कई दौर तक चली वार्ता के बाद आखिर देर रात साढ़े 22 लाख रुपए के मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को 72 सौ रुपए महीने की नौकरी और मृतक के दोनों बच्चों की पढ़ाई का खर्च प्रबंधन द्वारा उठाए जाने पर सहमति बनी। इसके बाद प्रदर्शन खत्म हुआ और देर रात लगभग 1 बजे शव को मृतक के घर ले जाया गया।

पुलिस ने की कई लोगों से पूछताछ
इधर फैक्ट्री कैंपस के पास मजदूर प्रदर्शन में लगे रहे और उधर मैहर पुलिस श्रमिक नेता की हत्या की वारदात की जांच पड़ताल में भी जुट गई। पुलिस ने इस सिलसिले में जानलेवा हमले वाली रात श्रमिक नेता को छोड़ने गए लोगों, फैक्ट्री के कुछ ठेकेदारों से भी थाने में पूछताछ की। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि श्रमिक नेता मनीष शुक्ला पर जानलेवा हमला किन लोगों ने और क्यों किया था।

प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में कुछ लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए थे। वारदात फैक्ट्री के बाहर बाइपास मार्ग पर हुई थी, लिहाजा पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं। फुटेज में मनीष की बाइक के पीछे एक अन्य बाइक में कुछ लोग जाते हुए नजर आए हैं। पुलिस उनका भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।

घटना की रात ही दिया था पुलिस को बयान
श्रमिक नेता मनीष शुक्ला ने घटना की रात ही पुलिस को अपना बयान दिया था। उस वक्त मनीष की हालत इतनी गंभीर नहीं थी। उसने खुद अपना बयान दिया था और दस्तखत भी किए थे। एक एएसआई ने उसके बयान पर मजदूरों के सामने दस्तखत कराए थे, लेकिन इसके बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि मनीष की हालत बिगड़ी और उसे जबलपुर ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई? यह सवाल हर किसी के जेहन में कौंध रहा है। सवाल घटना के शुरुआती दौर में पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे हैं। हालांकि इस मामले में अब एसपी आशुतोष गुप्ता खुद नजर बनाए हुए हैं और हर स्थिति की बारीक से बारीक जानकारी ले रहे हैं।

मजदूर नेताओं से बात करती पुलिस।
मजदूर नेताओं से बात करती पुलिस।
पुलिस अधिकारियों, प्रबंधन और मजदूर नेताओं में देर रात तक बातचीत चलती रही।
पुलिस अधिकारियों, प्रबंधन और मजदूर नेताओं में देर रात तक बातचीत चलती रही।
मजदूर नेता की मौत पर कई मजदूर प्रदर्शन करने पहुंचे।
मजदूर नेता की मौत पर कई मजदूर प्रदर्शन करने पहुंचे।
मनीष के शव को रखकर मजदूर नेताओं ने प्रदर्शन किया।
मनीष के शव को रखकर मजदूर नेताओं ने प्रदर्शन किया।
मनीष की मौत के बाद जाम की स्थिति बन गई।
मनीष की मौत के बाद जाम की स्थिति बन गई।
इसी फैक्ट्री में मजदूर नेता मनीष काम किया करते थे।
इसी फैक्ट्री में मजदूर नेता मनीष काम किया करते थे।
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