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बाघों के आबाद होने की कहानी:पन्ना टाइगर रिजर्व में एक समय खत्म हो गए थे बाघ, 2009 में 1 बाघ और 2 बाघिन दूसरी जगह से लाए; अब संख्या 70 के पार

पन्ना3 महीने पहले
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हीराें के लिए प्रसिद्ध पन्ना नगरी बाघ की दहाड़ के लिए भी जाना जाता है। आज गुलजार पन्ना टाइगर रिजर्व को 2008 में बाघ विहीन घोषित कर दिया गया था। इसके बाद फील्ड डायरेक्टर, पार्क के कर्मचारी और स्थानीय लोगों ने बाघ लाने की मुहिम शुरू की। एक साल बाद फिर से बाघ बसाने की शुरुआत की गई। शुरू में एक बाघिन और दो बाघ लाए गए। आज 13 साल बाद इस पार्क में 70 से ज्यादा बाघ हैं।

पढ़िए, पन्ना में दोबारा बाघ बसाने की पूरी कहानी...

1981 में 209.54 वर्ग किलोमीटर एरिया में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क को राज्य सरकार ने मंजूरी दी थी। इसे 1994 ने देश का 22वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, लेकिन शिकार और अफसरों की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे बाघ खत्म होने लगे। 2007 तक पार्क सूना हो गया। एक भी बाघ नहीं बचा। बाघों के न होने के कारण पर्यटकों ने यहां आना बंद कर दिया था।

यह कारण था बाघ खत्म होने के

इसकी प्रमुख वजह बाघों का शिकार, रहने खाने की उचित व्यवस्था न करना, बाघों के अनुकूल वातावरण उपलब्ध न करवाना और पार्क के अधिकारी कर्मचारियों की उदासीनता थी। पार्क प्रबंधन बाघों की मौतों पर चुप्पी साधे रहता था। बाघों की आपसी लड़ाई या अन्य घावों के इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण भी कई बाघ काल के गाल में समा गए थे।

पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क।
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क।

2009 से फिर आई बाघों की बहार

पन्ना टाइगर रिजर्व के 2009 से 2014 तक फील्ड डायरेक्टर रहे श्रीनिवास मूर्ति ने बताया कि 2008 में जब पार्क बाघ विहीन हो गया। पोस्टिंग के बाद हमने पार्क में पुनः बाघों को स्थापित करने की एक ठोस योजना बनाई। इस पर वन विभाग मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार के सहयोग से अमल में लाया गया। पार्क के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को टाइगर रिजर्व बाघ विहीन होने के कारण जो सूनापन महसूस हो रहा था, उसके लिए सभी ने मिलकर काम किया।

2009 में हमने पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए सरकार से 2 बाघिन और एक बाघ की मांग की। सरकार ने हमे बांधवगढ़ पार्क से T1 बाघिन, कान्हा नेशनल पार्क से T2 बाघिन और पेंच टाइगर रिजर्व से T3 बाघ उपलब्ध करवाए। इनकी मेटिंग से आज बाघों का कुनबा टाइगर रिजर्व में चहलकदमी कर रहा हैं। मूर्ति ने बताया हमने बाघों को बच्चों की तरह पाला है, जिसके कारण आज सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। मूर्ति के अनुसार एक बार T3 नर बाघ टाइगर रिजर्व की सीमा से भटककर 250 किलोमीटर दूर यूपी के गांवों में चला गया था, जिसे दोबारा लाया गया था।

अब 70 बाघ हैं टाइगर रिजर्व में

पन्ना टाइगर रिजर्व में आज की स्थिति में कुल वयस्क और शावक मिलाकर 70 बाघ हैं। इसमे 42 ऐसे बाघ हैं जो कैमरे में ट्रैप हो चुके हैं और एडल्ट हैं। शावकों की गिनती नहीं की जाती, इसलिए उन्हें ट्रैप भी नहीं किया जाता।

नर बाघ कर रहा है मृत बाघिन के शावकों की देखभाल

पन्ना टाइगर रिजर्व में एक अजीब वाकया देखने को मिला है। मई महीने में मृत हुई पी 213-32 नाम की बाघिन के 10 माह के बच्चों की परवरिश बाघ पी 243 कर रहा है। टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने बताया कि नर बाघ को बच्चों से कोई मतलब नहीं होता है। वह मेटिंग के बाद इनसे नाता तोड़ देता है, लेकिन बाघिन की मौत के बाद नर बाघ पी 243 जो बाघिन के 4 अनाथ बच्चों का पिता है। अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। यह आश्चर्यजनक है। बाघ ने ही बच्चों को शिकार की कला सिखाई है जो अमूनन बाघिन सिखाती है। बीते दिनों बाघिन पी 213-32 के अनाथ 4 बच्चे नीलगाय का शिकार करते दिखे थे जो अपने पिता पी 243 बाघ से शिकार की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

दो दिन पहले शिकार करते बाघ शावक।
दो दिन पहले शिकार करते बाघ शावक।

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कठिन परिस्थितियों में होता है बाघ का पालन पोषण

वन्यजीव प्राणी विशेषज्ञ अजय दुबे ने बताया कि बाघों का पालन पोषण बहुत ही कठिन परिस्थितियों में होता है। 2 से 2.5 वर्ष तक की उम्र में इन्हें अन्य जंगली जीवों, तेंदुए और दूसरे बाघों से खतरा होता है। नर बाघ जब मादा के साथ मेटिंग करता है तब उसके बच्चों को मारकर खा जाता है, इसलिए बाघ जब तक 2 साल का नहीं हो जाता उसकी गिनती नहीं होती। हालांकि मोदी सरकार ने इस उम्र को घटाकर 1.5 वर्ष कर दिया है।

पन्ना से सुहृद तिवारी

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