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  • On Seeing The Camera, The Children Were Taken Out And The Class Room Was Sanitized, The Building Was Dilapidated And The Class Was Put In The Verandah

स्कूलों का पहला दिन:कैमरा देखते ही बच्चों को बाहर निकालकर क्लास रूम सैनेटाइज किया, भवन जर्जर तो बरामदें में लगाई कक्षा

सागरएक महीने पहले
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  • कोविड गाइडलाइन के पालन को लेकर हर दिन 5-5 स्कूलों की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की जा रही

जिले में सोमवार से पहली से पांचवीं तक के स्कूल खोले गए। शहर की सरकारी स्कूलों में पहले दिन जहां कई कक्षाएं सूनी पड़ी रहीं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों में तय संख्या से अधिक विद्यार्थी मिले। स्थिति यह थी कि जब भास्कर टीम ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल पथरिया जाट का जायजा लेने पहुंची तो एक क्लास रूम में 30 से अधिक बच्चे भरे थे।

वहीं कैमरा देखते ही शिक्षक क्लास रूम में पहुंचे और उन्होंने बच्चों को बाहर निकालकर सैनेटाइजेशन का काम शुरू कर दिया। सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था न होने के कारण लंच में बच्चों को घर भेजा, जिसके बाद इक्का-दुक्का बच्चे ही वापस लौटे। कोविड गाइडलाइन की बात करें तो सरकारी स्कूलों के छोटे-छोटे कमरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होना मुश्किल था, वहीं विद्यार्थी तो दूर शिक्षक तक बगैर मास्क के कक्षाएं लेते नजर आए।

हर अधिकारी को कम से कम 5 स्कूलों की मॉनीटरिंग करना अनिवार्य

स्कूलें खुलने के बाद कोविड गाइडलाइन के पालन को लेकर हर दिन 5-5 स्कूलों की अॉनलाइन मॉनीटरिंग की जा रही है। जिसमें डीईओ से लेकर बीईओ, बीआरसी और जनशिक्षक तक सभी को हर दिन 5-5 स्कूलों की रिपोर्ट भोपाल भेजना होती है। फिलहाल वर्चुअल मॉनीटरिंग की व्यवस्था है, लेकिन यदि स्कूलों में कोविड गाइडलाइन के पालन में कोई कमी है तो इसे तत्काल दूर किया जाएगा।
- अजब सिंह ठाकुर, जिला शिक्षा अधिकारी सागर

प्राइमरी स्कूल पथरिया जाट- एकीकृत शाला में एक ही परिसर में पथरिया जाट और पथरिया अहीर प्राथमिक शाला है। पथरिया अहीर में जब भास्कर टीम पहुंची तो यहां दर्ज संख्या 120 में से 60 से अधिक बच्चे पहले ही दिन उपस्थित हो गए। यहां सिर्फ चौथी कक्षा व्यवस्थित रूप से लग रही थी। बाकी कक्षाओं में बच्चे झुंड में बैठे थे।

कैमरा देखते ही शिक्षक ने बच्चों को क्लास रूम से बाहर निकालकर सैनेटाइजेशन का बहाना बना दिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या कक्षाएं लगाने से पहले सैनेटाइजेशन का काम नहीं किया गया। वहीं पथरिया जाट में भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को बरामदे में बैठाया गया।

प्राइमरी स्कूल शिवाजी नगर- पहली से पांचवीं तक के स्कूल में केवल 2 ही बच्चे उपस्थित थे। जिन्हें पढ़ाने के लिए दो शिक्षक थे। ऐसे में एक शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही थीं और दूसरे खाली बैठे थे। बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिका बगैर मास्क के ही बैठीं मिलीं। स्कूल में टॉयलेट गंदे पड़े थे। वहीं स्कूल के सामने निर्माण कार्य चलने के कारण बच्चों को आने-जाने का रास्ता भी नहीं बचा।

प्राइमरी स्कूल गोपालगंज- यहां दो कक्षाओं के तीन बच्चे ही उपस्थित थे। कक्षा में मौजूद शिक्षिका आशा पाठक ने बताया कि स्कूल में 28 बच्चे दर्ज हैं और दो शिक्षक हैं। लेकिन दूसरी शिक्षिका कहां है, इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला। इसी परिसर में मौजूद माध्यमिक शाला में पांच बच्चों को दो शिक्षक पढ़ाते नजर आए, जबकि हाईस्कूल 9वीं और 10वीं की कक्षाएं विधिवत लग रहीं थीं।

प्राइमरी स्कूल हाथीखाना- स्कूल में सिर्फ तीन बालिकाएं ही मिलीं, जबकि दर्ज संख्या 51 हैं। शिक्षिका ने बताया कि सुबह 20 से 25 बच्चे स्कूल आए थे। लेकिन मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था न होने के कारण बच्चों को भोजन के िलए घर भेजना पड़ा। जिसके बाद तीन ही बच्चे वापस लौटे।

प्राइमरी स्कूल म्युनिसिपल- स्कूल में सिर्फ एक ही बालिका पढ़ती हुई मिली। जिसे पढ़ाने के िलए स्कूल में एक शिक्षिका मौजूद थीं। स्कूल में पदस्थ बाकी शिक्षकों के संबंध में कोई जवाब नहीं मिला। स्कूल परिसर में चारों तरफ कबाड़ और ठेले खड़े होने के कारण परिसर में गंदगी होती हैं। इसलिए आम दिनों में भी बच्चे पढ़ने नहीं आते।

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