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देवी प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू:दमोह में विसर्जन यात्रा में उत्साह के साथ उमड़ा जनसैलाब

दमोह2 महीने पहले
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माता की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते भक्त। - Money Bhaskar
माता की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते भक्त।

दमोह में देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम शुरू हो गया है। दोपहर से जारी हुआ यह क्रम देर रात तक चलेगा, जिसमें देवी प्रतिमा के साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल होंगे। दोपहर में देवी विसर्जन के शहर के अलग-अलग स्थानों से भक्तगण पूरे उत्साह और उमंग के साथ सड़कों पर निकले। डीजे की धुन पर नाचते गाते युवा, महिलाएं एक अलग ही आनंद की अनुभूति करा रहे हैं।

दमोह शहर में दर्जनों देवी प्रतिमाएं विराजमान की जाती है। कुछ प्रतिमाएं हमेशा की तरह दिन में ही विसर्जन के लिए निकाली जाती हैं, लेकिन इन सभी के फुटेरा तालाब पहुंचने का रूट एक ही होता है। सभी प्रतिमाएं स्थानीय घंटाघर चौराहा पहुंचती हैं और यहां से बकौली चौराहा, मोहन टॉकीज तिराहा, पुराना थाना, सिटी नल, महाकाली चौक, गौरीशंकर तिराहा से होते हुए फुटेरा तालाब पहुंचते हैं।

वैसे तो देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए चल समारोह प्रतिबंधित किए गए हैं और केवल चंद लोग ही देवी प्रतिमा के साथ मौजूद रह सकते हैं, लेकिन धर्म और आस्था के आगे पुलिस व प्रशासन अपने नियम कानून चलाने में असमर्थ है। ऐसा इसलिए भी, क्योंकि धार्मिक आस्था पर पुलिस या प्रशासन का अधिक दबाव किसी विवाद को जन्म दे सकता है इसलिए प्रशासन की ओर से भी ज्यादा शक्ति नहीं की जा रही है।

सूर्यास्त के बाद शहर का दशहरा एक अलग ही रंग में रंग जाता है। बीते कई सालों से दमोह का दशहरा अपने आप में एक अलग ख्याति रखता है। बड़े-बड़े अखाड़े और हजारों की भीड़ इस दशहरे को एक अलग ही रंग देता है, हालांकि बीते साल कोरोना गाइडलाइन के कारण सामान्य प्रक्रिया के तहत देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था, लेकिन इस बार माहौल ठीक है और कोविड-19 का प्रभाव कम होने के कारण लोगों में उत्साह देखने मिल रहा है।

इसलिए हो सकता है कि शाम को निकलने वाली देवी प्रतिमाओं के साथ अखाड़े शामिल हो सकते हैं, जो अपनी परंपरा अनुसार कई तरह के हुनर का प्रदर्शन करते हैं। यह बात अलग है कि जिला प्रशासन ने स्थानीय घंटाघर पर इस बार कोई मंच तैयार नहीं किया है, लेकिन इस प्रमुख धार्मिक पर्व पर लोगों के उत्साह को रोकना भी ठीक नहीं होगा।

प्रतिमाओं के विसर्जन पर बनने वाला था विवाद

धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पुलिस व प्रशासन की शक्ति कई बार नुकसानदेह साबित हो जाती है। उदाहरण के तौर पर प्रशासन ने स्थानीय फुटेरा तालाब में देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए एक कुंड बनाया था और वहां पर एक बोर्ड लगा दिया था कि तालाब में प्रतिमाओं का विसर्जन प्रतिबंधित है।

इसलिए कुंड में ही प्रेमी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाए। जैसे ही यह जानकारी हिंदू संगठनों को हुई तो सोशल मीडिया पर जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया। आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और उसके बाद यह कहना पड़ा कि वह घाटों पर ही प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। नगर पालिका प्रशासन द्वारा कुंड के पास लगाया गया बोर्ड भी तत्काल हटा लिया गया।