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विकास:कीर्ति स्तंभ से महाराणा प्रताप चौराहा तक बनेगी मॉडल सड़क, सेंट्रल लाइटिंग व क्यारियां भी होंगी

दमोहएक महीने पहले
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  • दो कराेड़ रुपए की लागत से बनेगी 14 मीटर चौड़ी सड़क, 6 माह में पूरा हाेगा काम

शहर के कीर्ति स्तंभ चौराहा से महाराणा प्रताप चौराहे मार्ग के दिन संवरने वाले हैं। आगामी माह में यह सड़क शहर की सबसे अच्छी सड़क बनेगी। जिसे मॉडल सड़क का नाम दिया जाएगा। अभी तक यह सड़क 7 मीटर चौड़ी है, जिसे बढ़ाकर 14 मीटर कर दिया जाएगा। जिससे यह सड़क फोरलेन में तब्दील हो जाएगी। इसके साथ ही सड़क के बीचों बीच क्यारियां, डिवाइडर, सेंट्रल लाइटिंग होगी।

साथ ही सड़क के दोनों ओर फुटपाथ भी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री शहरी अधोसंचरना विकास के तहत इस सड़क को नगर पालिका द्वारा 2 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा। साथ ही इस पूरी सड़क को दो चरणों में बनाया जाएगा। जिसमें कलेक्टोरेट के सामने महाराणा प्रताप चौराहा से बेलाताल तक एवं दूसरा चरण बेलाताल से कीर्ति स्तंभ चौराहा तक बनेगा। पूरी सड़क की लंबाई 1 किमी है।

सोमवार को टीएल बैठक में कलेक्टर ने नगर पालिका अधिकारियों को मॉडल सड़क बनाने के लिए सभी तरह की औपचारिकताएं शीघ्र ही पूर्ण कराने के निर्देश दिए। गौरतलब है की यह मार्ग शहर का सबसे व्यस्ततम मार्ग है। इस मार्ग पर कलेक्टोरेट, एसपी ऑफिस, सिंचाई विभाग, पीएचई, उद्योग विभाग सहित अन्य शासकीय कार्यालय हैं।

इसके अलावा जबलपुर नाका, वैशाली नगर सहित ग्रामीण अंचलों से आने वाले लोग ज्यादातर इसी मार्ग से शहर में आते हैं। जिससे मार्ग पर 24 घंटे आवागमन होता है। हालही में बारिश की वजह से सड़क कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। ऐसे में हादसों की आशंका बनी रहती है।

इस मामले को लेकर सीएमओ निशिकांत शुक्ला ने बताया कि कीर्ति स्तंभ से महाराणा प्रताप चौराहा तक सड़क स्वीकृत हो चुकी है। यह सड़क मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास के तहत बनाई जाएगी। जिसे छह माह में बनाया जाएगा।

सड़क चौड़ीकरण के लिए पर्याप्त जगह है

कीर्ति स्तंभ से लेकर महाराणा प्रताप चौराहा तक सड़क चौड़ीकरण के लिए पर्याप्त जगह है। हालांकि बेलाताल के पास कुछ पेड़ इसमें बाधक बन रहे हैं। साथ ही कलेक्टर बंगले की बाउंड्रीबाल, बीएसएनएल की बाउंड्रीवॉल भी बाधक बनेगी। इन सब अड़चनों को शीघ्र ही दूर किया जाएगा। दूसरी ओर जो पेड़ काटे जाएंगी, उनकी उनकी जगह शहर की खाली पड़ी जगहों पर विकसित पौधों का रोपण किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।

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