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संबल योजना की जांच में मिली गड़बड़ी:88257 हितग्राही अपात्र, पोर्टल से नाम हटाए, अब 13 निकायों में 2.82 लाख बचे पात्र

दमोहएक महीने पहले
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  • कांग्रेस सरकार ने योजना का नाम बदलने के साथ-साथ जांच कराई थी, लेकिन बीच में उनकी सरकार चली गई

जिले में संबल योजना का लाभ लेने के लिए जुड़वाए गए अपात्र और फर्जी नामों को काटने की प्रक्रिया श्रम विभाग ने चालू कर दी है। नगरपालिका, जनपद पंचायत और नगर परिषदों ने जांच के दौरान 88 हजार 257 कार्ड अपात्र घोषित कर दिए हैं और उनके नाम पोर्टल से भी हटा दिए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा अपात्र नाम नगरपालिका दमोह से हटाए गए हैं।

अब यहां पर पंजीयनों की संख्या 22 हजार 930 रह गई है। हालांकि विभाग की ओर से अब भी कार्डों की जांच का सिलसिला जारी है। यहां पर बता दें कि वर्ष 2018 में प्रदेश की पूर्व सरकार द्वारा गरीबों के हित में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री संबल योजना शुरू की थी।

योजना प्रारंभ होने पर कुछ महीनों तक हितग्राहियों को इसका लाभ भी मिला, लेकिन विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार के बार कांग्रेस की सरकार ने इस योजना का नाम परिवर्तन करते हुए इसे नया नाम मुख्यमंत्री नया सवेरा कर दिया था और पात्र हितग्राहियों का चयन करने के लिए बीजेपी के कार्यकाल में जारी हुए संबल कार्डों की जांच के आदेश दिए थे।

बड़े स्तर पर इसकी जांच हुई थी। हालांकि जांच के बीच कांग्रेस की सरकार चली गई, लेकिन इसके बाद भी जांच में 3 लाख 71हजार 238 हितग्राहियों की संख्या घटकर 2 लाख 82 हजार 981 हो गई है। जिले सभी 13 जनपद, नगरपालिका और परिषदों में योजना का भौतिक सत्यापन करने बाद 88 हजार 257 अपात्र लोगों के नाम योजना से काटे गए।

इन योजनाओं में मिल रहा लाभ

योजना का लाभ कई हिस्सों में हितग्राहियों को मिल रहा था। जिसमें बच्चों की पढ़ाई का खर्च से लेकर, छात्रवृत्ति और बिजली के बिल तक में राहत थी। शुरूआती दौर में योजना में कई गरीब लोगों ने अपने पंजीयन कराए थे। योजना में पंजीयन कराने के बाद कुछ मह तक बिजली बिल योजना के तहत 100 से 200 रुपए के बीच आए थे, बिजली के बिलों की राशि को बाकायदा हितग्राही जमा भी कर रहे थे।

लेकिन बीच में कांग्रेस सरकार आने से योजना गड़बड़ हो गई लेकिन अब फिर से यह योजना चालू हुई है। नए सिरे से हितग्राहियों को इसका लाभ मिलना है। इस संबंध में श्रम अधिकारी जीडी गुप्ता ने बताया कि सभी निकायों ने संबल योजना के तहत बने कार्डों की जांच की थी, जिसमें गड़बड़ी मिलने पर उनके नाम पोर्टल से हटाए गए हैं।

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