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  • More Than 4 Thousand Officers employees Of 32 Unions Were On Mass Leave, Those Who Did Not Agree Were Celebrated By The Agitators With Folded Hands.

रजिस्ट्री नहीं हो पाई, कलेक्टर कार्यालय में भी काम ठप:32 संघों के 4 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी रहे सामूहिक अवकाश पर, जो नहीं माने उन्हें आंदोलनकारियों ने हाथ जोड़कर मनाया

नीमच2 महीने पहले
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कलेक्टोरेट में कार्यालय हाथ जोड़कर आंदोलन में शामिल होने के लिए मनाया। - Money Bhaskar
कलेक्टोरेट में कार्यालय हाथ जोड़कर आंदोलन में शामिल होने के लिए मनाया।

जिले भर मे स्थित सभी सरकारी कार्यालय गुरुवार को सूने पड़े रहे। केंद्रीय कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता दिए जाने, दो वेतन वृद्धि सहित अन्य प्रमुख मांगों को लेकर मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर जिले में भी 32 संघों के 4 हजार से ज्यादा शासकीय अधिकारी कर्मचारी एक दिवसीय सामूहिक अवकाश पर रहे। जिसके कारण कलेक्ट्रेट, तहसील, नगरीय निकाय, शिक्षा, कृषि सहित सभी विभागों में विभागीय काम पूरी तरह से ठप रहे।

मोर्चा के जिलाध्यक्ष ज्ञानवर्धन श्रीवास्तव ने बताया 29 जुलाई के एक दिवसीय अवकाश के लिए कर्मचारियों से आवेदन भरवाकर पहले ही जमा कर दिए गए थे। जिले भर के कर्मचारियों मांगों के समर्थन में अवकाश लिया। मोर्चा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने सोमवार को इंक्रीमेंट संबंधी आदेश जारी किए हैं लेकिन इसमें महंगाई भत्ते का जिक्र नहीं है। जबकि एरियर्स को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। इसलिए जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। यदि सरकार कोई फैसला नहीं लेती है तो 30 जुलाई से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। विदित हो कि संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर पिछले 10 दिनों से चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है। मोर्चा पदाधिकारी सांसद, विधायकों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर महंगाई भत्ता व वेतन वृद्धि देने की मांग कर चुके हैं। एक दिनी सामूहिक अवकाश के चलते मोर्चा के जिला पदाधिकारियों ने कुछ सरकारी कार्यालयों का भ्रमण किया। इस दौरान जो कर्मचारी काम करते मिले तो उन्हें हाथ जोड़कर मनाया। साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर सांकेतिक रूप से विरोध प्रकट किया।

नहीं हो हुए जनता के काम- मांगों को लेकर अवकाश पर कर्मचारियों के चले जाने से कलेक्ट्रेट, नगर निकाय, तहसील आदि में भी सन्नाटा पसरा रहा। अधिकारी और आउटसोर्स से नियुक्त कर्मचारी तो दफ्तर पहुंचे लेकिन अन्य नियमित प्रमुख कर्मचारियों के न होने से वहां कोई काम नहीं कर पाए। जनता से जुड़े काम भी नहीं हुए। सबसे ज्यादा मकान-प्लाट की रजिस्ट्री, आय-जाति व नक्शा, नामांतरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसे कामों पर असर पड़ा। लोग दफ्तर पहुंचे और बैरंग ही लौट आए।

ये हैं प्रमुख मांगें

  • 1 जुलाई 2020 एवं 1 जुलाई 2021 की वेतन वृद्धि में एरियर की राशि का भुगतान किया जाए।
  • प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र के समान केंद्रीय तिथि से 16% प्रतिशत महंगाई भत्ता का भुगतान किया जाए।
  • अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन की प्रोसेस जल्द शुरू हो।
  • गृह भाड़ा भत्ता केंद्रीय कर्मचारियों की तरह एमपी के अधिकारी-कर्मचारियों को भी दिया जाए।
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