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भोपाल में DA-प्रमोशन के मुद्दे पर हुई बड़ी मीटिंग:कर्मचारियों ने 4 चरण में ब्लॉक व जिला स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया, सरकार को देंगे नोटिस; संयुक्त मोर्चा ने बुलाई थी मीटिंग

मध्यप्रदेश3 महीने पहले
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मप्र अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने शनिवार को पदाधिकारियों और सहयोगी संगठनों की मीटिंग बुलाई थी। इसमें मौजूद कर्मचारी नेता। - Money Bhaskar
मप्र अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने शनिवार को पदाधिकारियों और सहयोगी संगठनों की मीटिंग बुलाई थी। इसमें मौजूद कर्मचारी नेता।

MP के लाखों अधिकारी-कर्मचारी DA और प्रमोशन के मुद्दे पर फिर से आंदोलन करने सड़कों पर उतरेंगे। शनिवार को मप्र अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा द्वारा भोपाल में बुलाई गई मीटिंग में सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों ने 4 चरणों में ब्लॉक व जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन करने का निर्णय लिया है। राजधानी में भी आंदोलन करने की सहमति बनी है। इसे लेकर सरकार को 20 सितंबर को नोटिस देकर आंदोलन का शंखनाद करेंगे।

मीटिंग कर्मचारी भवन गीतांजलि चौराहा पर हुई। जिसमें मोर्चा के जिलाध्यक्ष, संयोजक एवं सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। मीटिंग में आगामी रणनीति के लिए एजेंडे पर चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि आगामी दिनों में 4 चरणों में होने वाले आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी। मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सुभाष शर्मा ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत ब्लॉक स्तर पर धरना प्रदर्शन करके दी जाएगी। इसके बाद जिला और फिर राजधानी स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने सरकार द्वारा कर्मचारियों के महंगाई भत्ते, पदोन्नति एवं अन्य मांगों को नजरअंदाज करने पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि आगामी दिनों में होने वाले आंदोलन में एकजुट होंगे।

पदाधिकारी बोले- सरकार कर्मचारियों पर नहीं दे रही ध्यान

संयुक्त मोर्चा के भुवनेश पटेल, वीरेंद्र खोगल, जितेंद्र सिंह, महेंद्र शर्मा, ओपी कटियार, अंजू नारोलिया, एसएल सूर्यवंशी, सतीश शर्मा, अजय श्रीवास्तव, एसएस रजक आदि ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारियों को महंगाई बढ़ने पर जहां महंगाई भत्ता और अन्य भत्ते बढ़ाए गए हैं। वहीं मध्यप्रदेश सरकार कर्मचारियों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। एक तरफ सरकार कहती है कि कर्मचारी हमारे अभिन्न अंग है। दूसरी तरफ कर्मचारियों के ज्वलंत मुद्दों पर आंख बंद करके बैठ जाना सरकार की कर्मचारी विरोधी नीति उजागर करता है।

सहयोगी संगठनों के नेता उमाशंकर तिवारी, सीपी ठाकुर, विजय मिश्रा, नीरज श्रीवास्तव, शंकर सिंह सेंगर, महावीरप्रसाद शर्मा, अनिल बाजपेई, अरुण वर्मा, चंद्रशेखर परसाई, केएस तोमर, राजकुमार चंदेल, राकेश गुप्ता, गौतम पाटिल, शिवशंकर रजक, एसएल पंजवानी, महेंद्रसिंह बघेल, निहालसिंह जाट, अरविंद दुबे, विजय रायकवार, विजय रघुवंशी, जितेंद्र शाक्य आदि ने भी आंदोलन को लेकर अपनी बात रखी।

हड़ताल के बाद कोई संवाद नहीं किया गया

संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि 29 जुलाई को सामूहिक अवकाश लेने के बाद 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जानी थी, किंतु जनप्रतिनिधि व अफसरों के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दी थी। बावजूद सरकार ने न तो आदेश जारी किया और न ही किसी प्रकार का संवाद किया। इससे जाहिर होता है कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए शनिवार को मीटिंग में चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। 20 सितंबर को मुख्य सचिव को नोटिस देंगे। वहीं 4 चरणों में आंदोलन करेंगे।

भोपाल में हुई मीटिंग को संबोधित करते मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह।
भोपाल में हुई मीटिंग को संबोधित करते मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह।

यह मांगें अधूरी

  • 1 जुलाई 2020 एवं 1 जुलाई 2021 की वेतन वृद्धि में एरियर की राशि का भुगतान किया जाए।
  • प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र के समान केंद्रीय तिथि से 16% प्रतिशत महंगाई भत्ता का भुगतान किया जाए।
  • अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन की प्रोसेस जल्द शुरू हो।
  • गृह भाड़ा भत्ता केंद्रीय कर्मचारियों की तरह MP के अधिकारी-कर्मचारियों को भी दिया जाए।

इंक्रीमेंट की मांग हो चुकी पूरी

मोर्चा की इंक्रीमेंट, डीए और प्रमोशन की मांग थी। वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) को लेकर सरकार ने जुलाई में बड़ा फैसला लेते हुए MP के 6.70 लाख सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को दो इंक्रीमेंट देने का निर्णय लिया था। हालांकि, पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने जुलाई 2020 से जुलाई 2021 तक के एरियर को लेकर स्पष्ट नहीं किया। इसे लेकर भी नाराजगी है। डीए के संबंध में कर्मचारियों का असंतोष बढ़ रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार के मुकाबले उन्हें आधे से भी कम डीए मिल रहा है।

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