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MP की हवा फेफड़े खराब करने वाली:इसी रफ्तार से प्रदूषण बढ़ा तो अगले 5 साल में दिल्ली से बदतर हवा हो जाएगी भोपाल, इंदौर सहित 7 बड़े शहरों की

भोपाल7 महीने पहलेलेखक: संदीप राजवाड़े
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मध्य प्रदेश के बड़े शहरों की हवा तेजी से दूषित होती जा रही है। नवंबर के इन 18 दिनों में भोपाल, इंदौर ग्वालियर सहित 7 शहरों का वायु प्रदूषण स्तर यानी AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 300 से ऊपर पहुंच गया है जो बहुत खराब माना जाता है। लंग्स और सांस से जुड़ी परेशानी वाली मरीजों के लिए तो यह बहुत नुकसानदायक है। कुछ शहर में तो यह 500 के आंकड़े को छूने वाला है जो गंभीर की श्रेणी में आता है। 15 साल के आंकड़ों का एनालिसिस करने पर निकला कि हर 5 साल में MP की हवा दोगुना दूषित होती जा रही है। यदि इसी रफ्तार से प्रदूषण होता रहा तो अगले 5 साल में यहां की हवा दिल्ली से बदतर हो जाएगी।

प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति जानने के लिए दैनिक भास्कर ऐप ने 2005 से 2021 तक के डाटा की पड़ताल की। इसमें निकलकर आया कि 2005 की तुलना में 2021 में किसी शहर में दो गुना तो किसी में 4 से 5 गुना तक हवा प्रदूषित हो गई। जिस रफ्तार से वायु प्रदूषण बढ़ा है, इसे लेकर पर्यावरण वैज्ञानिक चिंता जता रहे हैं। उन्हें भी डर है इस दिशा में यदि सरकार सख्ती से कदम नहीं उठाएगी तो नई दिल्ली की तरह यहां भी हालात बेकाबू हो जाएंगे। देखिए सिटी दर सिटी हवा कैसे दूषित होती जा रही है-

भोपाल: 15 साल में यहां की हवा 4 गुना ज्यादा दूषित हो गई। नवंबर के 18 दिनों में हवा का औसतन AQI 253.44 हो गया। 2005 में RSPM (Respirable Suspended Particulate Matter) का स्तर 58.60 था। RSPM (pm10) का मानक 100 से ऊपर होना, स्वास्थ्य के लिए खराब है। AQI 200 से ऊपर होना खराब है।

इंदौर: पांच साल में यहां भी प्रदूषण दोगुना बढ़ा है। नवंबर में औसतन AQI 203.22 तक पहुंच गया। 2016 में यहां का RSPM 101.9 था। यह आंकड़ा 2011 में 135.5 और 2005 में 123.7 था।

ग्वालियर: सबसे खराब स्थिति ग्वालियर की है। यहां नवंबर के इन 18 दिनों का एवरेज AQI 308.77 तक पहुंच गया। 2016 में RSPM 100.2 था यानी 5 साल में तीन गुना हवा खराब हो गई।

जबलपुर: नवंबर के 18 दिन में एवरेज AQI 249.44 है। 2016 में वायु प्रदूषण का मानक RSPM 71.2 था जबकि 2011 में 73.8।

सिंगरौली: सिंगरौली में नवंबर के 18 दिनों में 286. 22 AQI है। 2016 में यहां का RSPM 75.1% था। इस तरह यहां पांच साल में चार गुना हवा प्रदूषित हो गई।

कटनी: यहां का इस माह का एवरेज AQI 284.76 पहुंच गया है। 2016 में RSPM 73 था, इस तरह यहां भी 4 गुना तेजी से हवा दूषित हो रही है।

सागर: 5 साल में यहां की हवा 3 गुना ज्यादा दूषित हो गई। नवंबर में औसतन 204.7 AQI हो गया। 2005 में यहां का RSPM 80.1 था।

प्रदेश में ‌वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण

  • खस्ताहाल सड़कें और उससे उड़ने वाली धूल।
  • वाहनों की बढ़ती संख्या खासकर कंडम हो चुके वाहन।
  • फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं और डस्ट।
  • खुले में लकड़ी और कोयले को जलाना।
  • निर्माणाधीन इमारतों से निकलने वाली धूल।

तत्काल गंभीर कदम उठाने होंगे वर्ना 5 साल बाद सांस लेना मुश्किल हो जाएगा
भोपाल बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के एनवायरनमेंट साइंस के एचओडी विपिन व्यास ने कहा- 4 गुना रफ्तार से हवा खराब हो रही है जो बहुत खराब संकेत हैं। तत्काल गंभीर कदम उठाने होंगे वरना आने वाले सालों में सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। शासन इलेक्ट्रिकल व्हीकल को बढ़ावा दे रही है लेकिन केवल इतने से काम नहीं चलेगा। लोगों को भी अपनी आदतें बदलना होंगी। प्रदेश के बड़े शहरों में ठंड के दौरान हवा ज्यादा खराब हो रही है।

ठंड में वायु प्रदूषण ज्यादा, लगातार मॉनिटर कर रहे

वायु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एए मिश्रा ने कहा- यह सही है कि प्रदेश में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। हालांकि इंदौर व कुछ छोटे शहरों में सुधार भी दिखाई दे रहा है। लोगों को समझना होगा कि ठंड के दौरान जब हवा में नमी रहती है तो वायु प्रदूषण धूल व ट्रैफिक से ज्यादा होता है। धूल व धुआं के पार्टिकल ऊपर न जाकर नमी के कारण सीमित दायरे में ही रह जाते हैं, इससे वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। पीएम 2.5 के स्तर के जो बारीक कण धूल वह सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंच कर फेफड़े व हार्ट को इफेक्ट करते हैं। प्रदेश के 18 शहरों के 21 जगहों व सभी फैक्ट्रियों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। अन्य शहरों में मैन्युअल जांच की जा रही है।

कंट्रोल करने के यह हो सकते हैं उपाय

  • सड़क किनारे ज्यादा से ज्यादा प्लांटेशन, दोनों साइड पर पेवमेंटब्लॉक लगाएं।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं बढ़ाएं व इलेक्ट्रिक व्हीकल पर ज्यादा सब्सिडी दें।
  • ठंड के दिनों में खुले में अलाव जलाने का दूसरा विकल्प तलाशें।
  • लकड़ी व कोयला जलाने पर मनाही हो।
  • निर्माणाधीन इमारत पर ग्रीन नेट लगाने की अनिवार्यता व सख्ती से निगरानी।

2016 तक RSPM, अब AQI से मापते हैं हवा की क्वालिटी

मध्यप्रदेश वायु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों ने बताया- 2005 से 2016 तक प्रदूषण जांचने का स्तर pm10 को कैलकुलेट करके आरएसपीएम (Respirable Suspended Particulate Matter) निकाला जाता था। 2016 के बाद पीएम 2.5 के साथ आठ पैरामीटर्स जोड़े गए जो अब 12 हो गए। हवा में पीएम 10, पीएम 2.5 (हवा में बारीक कण), सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, अमोनिया, लेड को कैलकुलेट करके वायु प्रदूषण के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को निकाला जाता है।