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अर्थी को राखी बांध दी विदाई:कारम तट पर 1 चिता पर 4 भाइयों का अंतिम संस्कार, महाराष्ट्र में हाईवे पर जानलेवा हादसे में गई थी जान

खरगोन4 महीने पहले
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महाराष्ट्र में शुक्रवार को हुए हादसे में इन 4 भाइयों सहित 13 की हुई थी मौत। - Money Bhaskar
महाराष्ट्र में शुक्रवार को हुए हादसे में इन 4 भाइयों सहित 13 की हुई थी मौत।
  • ठेकेदार ने 5-5 लाख व महाराष्ट्र सरकार ने 2-2 लाख रु. सहायता की घोषणा की
  • जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 60 किलो गेहूं व 25 किलो चावल के अलावा 5-5 हजार रुपए दिए

महेश्वर तहसील के मेलखेड़ी गांव में रक्षाबंधन पर हर साल की रौनक गायब रही। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उत्सव मनाते है। लेकिन इस बार घर-गलियों में सन्नाटा है। गांव के डावर परिवार के 4 युवाओं की शुक्रवार दोपहर महाराष्ट्र के सिंधखेड़ाजा-मेहकर हाईवे पर तेढ़गांव के पास हुए हादसे में मौत के बाद हर आंख नम हैं। दो दिन के इंतजार के बाद रविवार तड़के 4 बजे गणेश डावर (20), नारायण डावर (25), दीपक डावर (21) व सुनील डावर (22) के शव अलग-अलग एंबुलेंस से गांव पहुंचे।

हादसे के बाद शव क्षत-विक्षत होने से परिजनों को केवल बेटों का चेहरा दिखाया गया। बहन लक्ष्मी, कविता व अनिता ने अर्थी को ही राखी बांधकर भाइयों को विदाई दी। सुबह 9 बजे कारम नदी किनारे एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। जिला प्रशासन की ओर से शनिवार रात 10 बजे मंडलेश्वर एसडीएम ओमनारायणसिंह गांव पहुंचे। पंचायत के माध्यम से संबल योजना के तहत 5-5 हजार रुपए आर्थिक मदद दिलवाई। इसके अलावा रविवार को चारों मृतकों के परिवार को 60-60 किलो गेहूं व 25-25 किलो चावल दिए गए।

गांव में मजदूरी कम व रोजाना काम भी नहीं, इसलिए गए थे

मेलखेड़ी के गणेश डावर का दिव्यांग भाई महादेव भी मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गया था। उसने बताया शुक्रवार सुबह वाहन से मजदूरी के लिए निकले। मैं दुकान पर जाने के कारण नहीं जा सका। गांव में मजदूरी कम व लगातार काम नहीं मिलने से गए थे। वहां मिस्त्री को 550 रु. व मजदूर को 350 रु. मजदूरी मिलती है। रविवार ही ठेकेदार ने हिसाब करने बुलाया है। महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों को 2-2 व ठेकेदार ने 5-5 लाख रु. देने की घोषणा की है।

राखी के त्योहार के बाद फिर शुरू होगी काम की तलाश

गांव के मोहन डावर व जगदीश डावर ने बताया क्षेत्र में काम की कमी है। परिवार के पालन के लिए पलायन मजबूरी बन गया है। इसके चलते ही गांव के चार बेटों को खो दिया। रक्षाबंधन पर्व के बाद एक बार फिर काम की तलाश में जाना ही पड़ेगा। प्रशासन को मनरेगा व अन्य योजना के तहत लगातार काम दिलवाने की व्यवस्था करना चाहिए। निर्माण कार्य शुरू होते भी है तो मजदूरों की बजाय मशीनों से काम करवाया जाता है।

मनरेगा में हर माह 10 करोड़ से ज्यादा का हो रहा भुगतान

मनरेगा के जिला परियोजना अधिकारी श्याम रघुवंशी बताते हैं जिले में हर माह 10 हजार से ज्यादा काम हो रहे हैं। कुल 1.79 लाख जॉबकार्ड हैं। अफसरों का दावा है काम की जिले में कोई कमी नहीं है। हर महीने 10-12 करोड़ रुपए का ऑनलाइन खातों में भुगतान हो रहा है। महेश्वर जपं क्षेत्र में भी दावा है कई मजदूर इसलिए बाहर काम कर रहे हैं उन्हें मनरेगा से ज्यादा मजदूरी मिलती है। अधिक मजदूरी की वजह से बाहर जाते हैं।

हाईवे पर मिलती है ज्यादा मजदूरी

  • मनरेगा में काम की कमी नहीं है। हाईवे पर मजदूरी अधिक मिलने से मेलखेड़ी के ग्रामीण वहां गए थे। गांव में मशीनों से काम हो रहा है तो जांच करवाई जाएगी। - मीना झा, सीईओ जनपद पंचायत महेश्वर
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