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जबलपुर सूखे की ओर:जिले में 43% कम बारिश हुई, न बरगी छलका और न परियट व खंदारी खाली, अभी तक 18 इंच ही बारिश हो पाई

जबलपुरएक वर्ष पहले
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बरगी जलाशय का कैचमेंट एरिया भी 420 मीटर ही भर पाया। - Money Bhaskar
बरगी जलाशय का कैचमेंट एरिया भी 420 मीटर ही भर पाया।

पिछले दो महीने से आसमान पर काल बादल मंडराते रहे, लेकिन मानसून इस बार जबलपुर से रूठा रहा। एक जून से अब तक महज 18 इंच ही बारिश हुई, जो औसत से 43% कम है। कम बारिश का असर बरगी और शहर के जलापूर्ति वाले जलाशयों पर भी देखा जा सकता है। इस बार न तो बरगी बांध छलक पाया और न ही परियट व खंदारी ही भर पाए।

मानसून के जल्दी आने के बाद भी शहर भारी बारिश के लिए तरस गया। जून, जुलाई की तरह अगस्त भी सूखा ही गुजरा। पिछले 11 साल में पहली बार अगसत में सबसे कम बारिश हुई है। इसके पहले 2014 में काम बारिश हुई थी, तब भी 169.7 मिमी बारिश हाे गई थी। वर्ष 2020 में अगस्त में 680.4 मिमी बारिश हुई थी। पिछले वर्ष अब तक 37 इंच (941.2 मिमी) बारिश हुई थी। पर अभी तक 497.3 मिमी (18 इंच) ही बारिश हुई है। जिले में औसतन बारिश 52 इंच के लगभग होती है।

खंदारी जलाशय क्षमत से 25 फीट खाली है।
खंदारी जलाशय क्षमत से 25 फीट खाली है।

आंकड़ाें से समझें जिले में बारिश का हाल

  • अभी तक कुल बारिश 497.3 मिमी हुई।
  • अभी तक जिले में बारिश 878.9 मिमी होनी चाहिए थी।
  • अगस्त में अब तक हुई बारिश 88.2 मिमी हुई।
  • अभी तक अगस्त में बारिश 401.9 मिमी होनी चाहिए थी।
  • जिले में अभी तक औसतन से 43% प्रतिशत कम बारिश हुई है।
  • 50% से कम बारिश होने पर जिले को सूखा ग्रस्त माना जाएगा।

बारिश का सिस्टम सक्रिय कम होने बावजूद भी कम बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक जबलपुर देश का सेंटर प्वाइंट है। यहां बंगाल की खाड़ी औ दक्षिण-पश्चिम अरब की सागर से दोनों मानसून आते हैं। कई बार दोनों ओर से मानसून तेज रहता है तो यहां औसत से भी अधिक बारिश हो जाती है। कई बार ऐसा होता है कि यहां तक आते-आते दोनों ओर के मानसून कमजोर पड़ जाता है। इस कारण बारिश कम होती है। माैसम विभाग के मुताबिक एक-दो दिन में बारिश हो सकती है। द्रोणिका के ग्वालियर, सीधी, अम्बिकापुर होकर गुजरने और नए मानसूनी सिस्टम बनने से बारिश होने का अनुमान है।

जलाशयों में भी दिख रहा कम बारिश का असर

बारिश की बेरुखी ही है कि पिछली बार अगस्त में बरगी बांध के 21 में से 13 गेट खोलने पड़े थे। लेकिन इस बार आषाढ़ गुजरा, सावन बीता अब भादो भी आ गया लेकिन बारिश नहीं होने से बरगी बांध छलक नहीं पाया। बरगी बांध में अधिकतम जलस्तर 422.76 मीटर होना चाहिए। वर्तमान में 420 मीटर पानी है। बरगी से ही शहर और नहरों से खेतों को पानी की सप्लाई साल भर होती है। साथ ही नर्मदा में जल स्तर भी इसी बांध से समय-समय पर छोड़े गए पानी से मेंटेन रहता है। अब मानसून विदाई की ओर है।

परियट जलाशय भी अभी 5 फीट खाली।
परियट जलाशय भी अभी 5 फीट खाली।

परियट और खंदारी भी खाली

शहर की आधी आबादी की प्यास बुझाने वाले परियट और खंदारी जलाशय भी इस बार खाली ही हैं। परियट में अब भी अधिकतम 1390 फीट जलस्तर की तुलना में 1385 फीट ही जलस्तर है। वहीं खंदारी में अधिकतम 1454 फीट की तुलना में 27 फीट खाली है। जबकि खंदारी व परियट से शहर की एक तिहाई हिस्से की टंकियां भरी जाती हैं। परियट से जहां 27 एमएलडी तो खंदारी से 5 एमएलडी पानी शहर को सप्लाई होती है। अभी तो शहर को दोनों वक्त पेयजल सप्ताई हो पाएगी, लेकिन गरमी में मारामारी मचेगी।

जलाशयाें का जलस्तर
जलाशयअधिकतमन्यूतनतममौजूदा जलस्तर
परियट1390 फीट ​​​​​​​1360 फीट ​​​​​​​1385 फीट​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​
खंदारी1454 फीट1417 फीट1429 फीट
बरगी422 मीटर403 मीटर420 मीटर
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