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नेशनल लोक अदालत:7 वर्ष की उम्र में हुआ एक्सीडेंट, इलाज में खर्च हो गए लाखों, एड़ी ठीक कराने में लगेंगे 7 लाख रुपए, पर बस संचालक 4 लाख रुपए से अधिक देने को तैयार नहीं था

जबलपुर3 महीने पहले
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जिला कोर्ट पहुंची चीफ जस्टिस ने चुटकी में बैंक से संबंधी एक प्रकरण को कर दिया निराकृत। - Money Bhaskar
जिला कोर्ट पहुंची चीफ जस्टिस ने चुटकी में बैंक से संबंधी एक प्रकरण को कर दिया निराकृत।

नेशनल लोक अदालत में जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचे एक पीड़ित अपने बेटे के एक्सीडेंट की क्षतिपूर्ति मामले में पहुंचा था। सात साल पहले उसके साथ वर्षीय बेटे का एक्सीडेंट हो गया था। इलाज में सात लाख खर्च कर डाले। पर बस संचालक क्षतिपूर्ति महज 4 लाख रुपए दे रहा है। जबकि हादसे ने मासूम को उम्र भर के लिए विकलांग बना दिया।

नरसिंहपुर निवासी प्रकाश साहू ने बताया कि वर्ष 2014 में उसका बेटा मयंक साहू मैहर अपनी नानी के यहां गया था। रोड पार करते समय बस ड्राइवर शारदा उपाध्याय ने लापरवाही पूर्वक चलतो हुए मयंक साहू का बांया पैर कुचल दिया।

मयंक साहू के पैर की एड़ी पूरी तरह से खराब हो चुका है।
मयंक साहू के पैर की एड़ी पूरी तरह से खराब हो चुका है।

गंभीर रूप से घायल मयंक को जबलपुर में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके पैर की एड़ी पूरी तरह से खराब हो चुका। इसके इलाज के लिए डॉक्टरों ने 7 लाख रूपए का खर्च बताया है। पर बस कंपनी सिर्फ 4 लाख रुपए ही देने को तैयार थी। मैहर की सिविल कोर्ट से केस को हाईकोर्ट जबलपुर ट्रांसफर किया गया था।

चीफ जस्टिस पहुंचे जिला कोर्ट

चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक नेशनल लोक अदालत के दौरान अचानक जिला कोर्ट पहंुच गए। वहां इंडियन बैंक के लोन बकाया का प्रकरण निराकृत के लिए पहुंचा था। चीफ जस्टिस ने मामले को सुना और खड़े-खड़े ही समझौता करा दिया। इसी तरह दो अन्य मामलों को भी उन्होंने सुना। पूरे प्रदेश में दो लाख से अधिक प्रकरणों में समझौता हुआ।

प्रदेश भर में 1382 खंडपीठों का गठन कर 2 लाख से अधिक प्रकरणों में हुई सुनवाई

प्रदेश में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसके लिए प्रदेश भर में 1382 खंडपीठों का गठन किया गया था। प्रदेश में दो लाख से अधिक प्रकरणों में समझौते हुए। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक ने नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस दौरान कार्यपालक अध्यक्ष व प्रशासनिक न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव, प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार सक्सेना मौजूद रहे।

नेशनल लोक अदालत में परस्पर समझौता योग्य मामले सहमति से निराकृत किए गए। जबलपुर जिला अदालत के स्तर पर कुल 10 हजार 694 मामलों को चुना गया था। इन मामलों में कुटुंब न्यायालय के प्रकरण, सिविल विवाद, नगर निगम के प्रॉपर्टी व जल टैक्स समेत अन्य वित्तीय प्रकरण शामिल थे।

कोर्ट में आपसी समझौते से सुलझाए जा रहे मामले।
कोर्ट में आपसी समझौते से सुलझाए जा रहे मामले।

1400 प्रकरणों में बीएसएनएल ने समझौता करने बुलाया

बीएसएनएल प्रबंधन ने टेलीफोन सेवाओं से जुड़े 1400 प्रकरणों को निराकृत करने के लिए नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सभी पक्षों को बुलाया था। जबलपुर, सिहोरा, पाटन, कटनी न्यायालय के प्रकरणों में उपभोक्ता को समझौता करने बुलाया गया था।

बिजली के प्रकरणों में भी हुआ समझौता

बिजली कंपनियों ने भी अनियमितताओं के प्रकरण में समझौते कर मामले निराकृत किए। इस दौरान मूल राशि में 30% तक माफी दी गई, तो ब्याज में शतप्रतिशत छूट दी गई। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुताबिक बिजली चोरी, मीटर टेम्परिंग, अधिक भार, लंबे समय से बिल बकाया आदि से जुड़े प्रकरणों में उपभोक्ताओं के प्रकरणों में समझौता किया गया।। कंपनी ने जुर्माने के मूल राशि में 20 से 30% की छूट दी ।

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