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दिल्ली तक फैली जबलपुर के फूलों की खुशबू:किसान ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से प्रभावित होकर शुरू की खेती, देशभर में सप्लाई

जबलपुर4 महीने पहले
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जबलपुर के किसान ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के भाषण से प्रभावित होकर पांच साल पहले फूलों की खेती शुरू की। खेत में गेंदा, गोल्डन वाइट ओरिएंटा, जरबेरा, रजनीगंधा, गुलाब सहित कई तरह की वैरायटी उगाते हैं। उनके फूल लखनऊ, दिल्ली समेत देश के दूसरे शहरों तक जाते हैं। वह एक हेक्टेयर में पांच लाख रुपए का गोल्डन वाइट टोरंटो उगा लेते हैं। फूलों की खेती कर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं। भास्कर खेती किसानी सीरीज-41 में आइए जानते हैं फूलों की खेती करने वाले ओमकार पटेल के बारे में उनके भाई अम्बिका पटेल (प्रगतिशील किसान, परियट, जबलपुर) से

हम तीन भाई हैं। मैं जैविक खेती करता हूं तो मेरे दूसरे नंबर के भाई ओमकार पटेल फूलों की खेती करते हैं। सेंट अलॉयशियस कॉलेज में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आए हुए थे। उन्होंने जबलपुर में फूलों की खेती की संभावना व्यक्त की थी। बताया था कि जबलपुर से फूलों के तीन बाजार नागपुर, दिल्ली, लखनऊ ट्रेन से लगे हैं। परंपरागत खेती की तुलना में फूलों की खेती से अधिक आमदनी किसान प्राप्त कर सकते हैं। उनके भाषण से प्रभावित होकर ओमकार पटेल ने तीन एकड़ में फूलों की खेती शुरू की।

एक एकड़ में लगाया है गेंदा।
एक एकड़ में लगाया है गेंदा।

एक एकड़ में लगाया है गेंदा

ओमकार ने एक एकड़ में गेंदा का फूल लगाया है। मल्चिंग विधि से फूलों की खेती की है। बाद में इसमें रजनीगंधा लगा देंगे। गेंदा का फूल 10 रुपए से 15 रुपए किलो तक बिक जाता है। वहीं, एक हेक्टेयर में गोल्डन वाइट ओरिएंटा, जरबेरा के फूल लगा रखे हैं। गोल्डन वाइट ओरिएंटा एक हेक्टेयर में लगा रखे हैं। इसकी कटाई चार बार होती है। यह प्रति स्टिक एक रुपए में बिक जाती है। गुलदस्ता बनाने में इसका उपयोग होता है।

गोल्डन वाइट ओरिएंटा के एक हेक्टेयर में कमाएं पांच लाख रुपए।
गोल्डन वाइट ओरिएंटा के एक हेक्टेयर में कमाएं पांच लाख रुपए।

रजनीगंधा की खेती फरवरी में करें

फरवरी में रजनीगंधा की नर्सरी लगाई जाती है। अप्रैल से इसके फूल आने लगते हैं। खुशबूदार होने की वजह से इसकी बाजार में काफी डिमांड रहती है। 20 डिग्री ये अधिक तापमान होते ही इसकी रोपाई कर देनी चाहिए। 6 सेमी की दूरी पर इसे लगाया जाता है। ड्रिप इरिगेशन से इसकी सिंचाई करनी होती है। तीन दिन पानी दें और तीन दिन गैप रखे। इसमें पोटेशियम वाला कोई भी खाद डाल सकते हैं।

रजनीगंधा फरवरी में लगाएं।
रजनीगंधा फरवरी में लगाएं।

सुबह या शाम को तोड़ना होता है

रजनीगंधा फूल को यदि माला, गजरा, वेनी आदि बनाने के लिए तोड़ना है तो सुबह या शाम को तोड़ें। कटे फूल के रूप में 50 या 100 स्पाइक के बंडल बनाकर बाजार में भेजना होता है। यदि दूर भेजना है तो स्पाइक का सबसे नीचे वाला फूल खिलने के पहले ही काट लें। बाजार नजदीक है, तो 2-3 फूल खिलने पर काटें। स्पाइक लम्बी होने पर अधिक कीमत मिलती है। 80 से 100 क्विंटल प्रतिवर्ष फूल प्राप्त कर सकते हैं।

फूलों की खेती में बाजार की जानकारी होनी चाहिए

फूलों की खेती में बाजार की जानकारी होनी चाहिए। एक पैर बाजार में तो दूसरा पैर खेत में होना चाहिए। ओमकार ने लखनऊ बाजार में अच्छी पैठ बनाई है। चित्रकूट एक्सप्रेस से हर शाम को फूल लखनऊ भेज दिया जाता है। वहां स्टेशन पर उसे थोक विक्रेता उतार लेते हैं और ऑनलाइन भुगतान कर देते हैं। अधिक माल होने पर दिल्ली और स्थानीय मार्केट में भी सप्लाई की जाती है। रोज चार से पांच हजार रुपए की आमदनी हो जाती है।